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Pilibhit News: कढ़ाई-बुनाई के काम से भविष्य संवार रहीं समूह की महिलाएं
Sun, 28 Dec 2025 11:34 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sun, 28 Dec 2025 11:34 PM IST
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बिलसंडा। ब्लॉक क्षेत्र में महिलाएं भी व्यापार में पुरुषों के साथ बराबर हिस्सा ले रही हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाएं कढ़ाई-बुनाई का काम कर परिवार की आर्थिक स्थिति को संवारने में अहम भूमिका निभा रही हैं। समूहों की ओर से दी जाने वाली आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण ने इन महिलाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।
ब्लॉक के कई गांवों में स्वयं सहायता समूहों ने महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पहले ग्रामीण महिलाएं घर तक सीमित रहती थीं। अब प्रशिक्षण लेकर वे व्यापारिक दृष्टि से कपड़ों की कढ़ाई, डिजाइनिंग और जॉब वर्क करके अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। इसी क्रम में गांव घुघौरा में या वारिश स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कढ़ाई-बुनाई से अपनी आय बढ़ा रही हैं। समूह की अध्यक्ष सोनी बेगम ने बताया कि उनके समूह में 11 सदस्य हैं। वह बरेली-मुरादाबाद से सूट एवं साड़ी पर कढ़ाई के लिए सामान लेकर आती हैं।
इसके बाद घर पर बने अड्डे पर तीन से चार महिलाएं सूट-साड़ी पर कार्य करती हैं। एक सूट पर लगभग दो दिन में कार्य और साड़ी पर पांच दिन में कढ़ाई का काम पूरा हो जाता है। तैयार किए हुए सूट और साड़ी को बरेली और मुरादाबाद मंडी में बिक्री किया जाता है। इससे एक माह में करीब बीस हजार रुपये की आय होती है। इस तरह प्रत्येक महिला को पांच से छह हजार रुपये की आय हो जाती है।
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ब्लॉक के कई गांवों में स्वयं सहायता समूहों ने महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पहले ग्रामीण महिलाएं घर तक सीमित रहती थीं। अब प्रशिक्षण लेकर वे व्यापारिक दृष्टि से कपड़ों की कढ़ाई, डिजाइनिंग और जॉब वर्क करके अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। इसी क्रम में गांव घुघौरा में या वारिश स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कढ़ाई-बुनाई से अपनी आय बढ़ा रही हैं। समूह की अध्यक्ष सोनी बेगम ने बताया कि उनके समूह में 11 सदस्य हैं। वह बरेली-मुरादाबाद से सूट एवं साड़ी पर कढ़ाई के लिए सामान लेकर आती हैं।
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इसके बाद घर पर बने अड्डे पर तीन से चार महिलाएं सूट-साड़ी पर कार्य करती हैं। एक सूट पर लगभग दो दिन में कार्य और साड़ी पर पांच दिन में कढ़ाई का काम पूरा हो जाता है। तैयार किए हुए सूट और साड़ी को बरेली और मुरादाबाद मंडी में बिक्री किया जाता है। इससे एक माह में करीब बीस हजार रुपये की आय होती है। इस तरह प्रत्येक महिला को पांच से छह हजार रुपये की आय हो जाती है।
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