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कैसे होंगे गरीबों की बेटियों के हाथ पीले... अनलॉक में भी लॉक चल रहा है शादी अनुदान
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पीलीभीत। बेटी के हाथ पीले करने के लिए परिवार वाले शादी अनुदान की आस लगाए बैठे हैं, मगर इस बार उनकी उम्मीदों पर कोविड-19 ने पानी फेर दिया है। सरकार ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के लिए शादी अनुदान के लिए बजट ही जारी नहीं किया है। चूंकि अभी सामूहिक कार्यक्रमों पर रोक है, इसलिए इस योजना के लिए भी धन नहीं दिया गया। ऐसे में ये गरीब परिवार जल्द से जल्द कोरोना महामारी खत्म होने की दुआ कर रहे हैं।
प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना गरीबों के लिए वरदान बनी हुई थी। जनपद में पिछले तीन साल में एक हजार से अधिक निर्धन परिवारों की बेटियों की शादियां सामूहिक विवाह योजना के तहत कराई जा चुकी है। लॉकडाउन से पहले ही गरीबों ने बेटी का घर बसाने के लिए तमाम सपना संजोने के साथ कुछेक तैयारियां भी की थीं, मगर कोविड-19 के संक्रमण के चलते सामूहिक शादियां संपन्न होना मुश्किल है। वहीं सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में अब सामूहिक शादी योजना का बजट भी जारी नहीं किया। पहले से ही आर्थिक तंगी के बीच जिंदगी गुजार रहे गरीबों के सामने बेटी की शादी करना बड़ा चुनौती बन गया है। इधर इन गरीब परिवारों ने अब ‘व्यक्तिगत शादी अनुदान योजना’ में आवेदन करना शुरू दिया है। इस योजना के तहत एक शादी पर 20 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है, जो शादी के बाद ही दी जाती है।
51 हजार की आर्थिक मदद देती है सरकार
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सरकार एक कन्या की शादी के लिए 51 हजार रुपये की आर्थिक मदद देती है। 35 हजार रुपये लड़की के खाते में जमा कराए जाते हैं। दस हजार रुपये से शादी के सामान की खरीदारी को मिलते हैं और शेष छह हजार रुपये प्रति जोड़ा शादी के आयोजन पर खर्च के लिए दिया जाता है। जबकि पूर्व सरकार एक शादी के लिए पहले 35 हजार रुपये की आर्थिक मदद देती थी।
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शासन से सामूहिक विवाह संबंधी कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। कोविड-19 के संक्रमण के चलते सामूहिक शादियां आगे भी होने की संभावना अभी कम ही है। -केपी सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना गरीबों के लिए वरदान बनी हुई थी। जनपद में पिछले तीन साल में एक हजार से अधिक निर्धन परिवारों की बेटियों की शादियां सामूहिक विवाह योजना के तहत कराई जा चुकी है। लॉकडाउन से पहले ही गरीबों ने बेटी का घर बसाने के लिए तमाम सपना संजोने के साथ कुछेक तैयारियां भी की थीं, मगर कोविड-19 के संक्रमण के चलते सामूहिक शादियां संपन्न होना मुश्किल है। वहीं सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में अब सामूहिक शादी योजना का बजट भी जारी नहीं किया। पहले से ही आर्थिक तंगी के बीच जिंदगी गुजार रहे गरीबों के सामने बेटी की शादी करना बड़ा चुनौती बन गया है। इधर इन गरीब परिवारों ने अब ‘व्यक्तिगत शादी अनुदान योजना’ में आवेदन करना शुरू दिया है। इस योजना के तहत एक शादी पर 20 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है, जो शादी के बाद ही दी जाती है।
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51 हजार की आर्थिक मदद देती है सरकार
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सरकार एक कन्या की शादी के लिए 51 हजार रुपये की आर्थिक मदद देती है। 35 हजार रुपये लड़की के खाते में जमा कराए जाते हैं। दस हजार रुपये से शादी के सामान की खरीदारी को मिलते हैं और शेष छह हजार रुपये प्रति जोड़ा शादी के आयोजन पर खर्च के लिए दिया जाता है। जबकि पूर्व सरकार एक शादी के लिए पहले 35 हजार रुपये की आर्थिक मदद देती थी।
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शासन से सामूहिक विवाह संबंधी कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। कोविड-19 के संक्रमण के चलते सामूहिक शादियां आगे भी होने की संभावना अभी कम ही है। -केपी सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी