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थर्माकोल-प्लास्टिक के प्रयोग पर रोक
ब्यूरो, अमर उजाला पीलीभीत
Updated Thu, 18 Dec 2014 06:47 PM IST
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हजारों लोगों की आस्था का केंद्र यह मंदिर और उसका परिसर साफ-सुथरा रहे, इसके लिए उन्होंने श्रद्धालुओं द्वारा भंडारा और अन्य संस्कारों के दौरान प्रयोग की जाने वाली थर्माकोल की प्लेट और प्लास्टिक के गिलासों पर प्रतिबंध लगा दिया है। श्रद्धालुओं से उन्होंने मंदिर परिसर में इन वस्तुओं का प्रयोग न करने की अपील भी करनी शुरू कर दी है। पुजारी द्वारा चार दिन पहले शुरू किए गए इस अभियान का असर भी दिखने लगा है।
इस मंदिर को श्रद्धालु शक्तिपीठ मानते हैं। मान्यता है कि नकटा दानव को यशवंतरी देवी ने मार कर जनता को राहत दिलाई थी। तभी से उन्हें देवी शक्ति के रूप में पूजा जाता है। हर नवरात्रि पर यहां पूरे नौ दिन मेला लगता है। पूर्णागिरि जाने वाले श्रद्धालु भी यहां झंडी चढ़ा कर जाते हैं। इसके अलावा प्रतिदिन यहां 100-150 श्रद्धालु आते हैं।
मनौती पूरी होने पर श्रद्धालु यहां भंडारा, मुंडन व अन्य धार्मिक कार्यक्रम कराते हैं। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालु थर्माकोल की जूठी प्लेट और प्लास्टिक के गिलास परिसर में इधर-उधर डाल देते हैं, जिससे यहां गंदगी हो रही थी। नगर पालिका ने मंदिर परिसर में एक डस्टबिन रखी है लेकिन उसका कूड़ा नियमित नहीं उठाया जाता है।
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डस्टबिन का कूड़ा नियमित उठवाया जाएगा। मंदिर परिसर साफ-सुथरा रहे, इसके लिए भी व्यवस्था की जाएगी।
- प्रभात जायसवाल, चेयरमैन नगर पालिका
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इस मंदिर को श्रद्धालु शक्तिपीठ मानते हैं। मान्यता है कि नकटा दानव को यशवंतरी देवी ने मार कर जनता को राहत दिलाई थी। तभी से उन्हें देवी शक्ति के रूप में पूजा जाता है। हर नवरात्रि पर यहां पूरे नौ दिन मेला लगता है। पूर्णागिरि जाने वाले श्रद्धालु भी यहां झंडी चढ़ा कर जाते हैं। इसके अलावा प्रतिदिन यहां 100-150 श्रद्धालु आते हैं।
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मनौती पूरी होने पर श्रद्धालु यहां भंडारा, मुंडन व अन्य धार्मिक कार्यक्रम कराते हैं। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालु थर्माकोल की जूठी प्लेट और प्लास्टिक के गिलास परिसर में इधर-उधर डाल देते हैं, जिससे यहां गंदगी हो रही थी। नगर पालिका ने मंदिर परिसर में एक डस्टबिन रखी है लेकिन उसका कूड़ा नियमित नहीं उठाया जाता है।
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डस्टबिन का कूड़ा नियमित उठवाया जाएगा। मंदिर परिसर साफ-सुथरा रहे, इसके लिए भी व्यवस्था की जाएगी।
- प्रभात जायसवाल, चेयरमैन नगर पालिका