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प्रजननकाल में मछलियों का हो रहा अवैध शिकार
पीलीभ्ाीत ब्यूराो
Updated Wed, 12 Jul 2017 10:42 PM IST
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प्रजनन काल के चलते जिले के सभी डैम में लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद मछलियों का शिकार किया जा रहा है। यह प्रतिबंध मछलियों के प्रजनन काल के चलते हर साल जुलाई से सितंबर तक लगाया जाता है। इन दिनों शारदा, दिूयनी, पौटा डैम समेत शारदा नदी व जंगल झीलों में शिकारी जमकर अवैध शिकार कर रहे हैं। पकड़ी गई मछलियों को पड़ोसी प्रांत उत्तराखंड समेत आसपास के बाजारों में सप्लाई किया जा रहा है।
शारदा सागर डैम में मछली के ठेके नीलामी की अवधि तीस जून तक रहती है। इसके बाद मछलियों का प्रजनन काल शुरू हो जाता है। ऐसे में डैम मेें तीन माह के लिए मछली शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। इधर प्रतिबंध लगने के कुछ दिन बाद ही शारदा डैम में मछली का शिकार शुरू हो गया। शिकारी छोटी-छोटी नावों के माध्यम से अवैध शिकार कर रहेे हैं। वहीं शारदा नदी में टाइगर रिजर्व होने के चलते मछली के शिकार पर पूरी तरह से प्रतिबंध है, लेकिन इन दिनों शारदा पार जंगल की झीलों में मछली का अवैध शिकार तेजी से हो रहा है। शारदा नदी का जिम्मा टाइगर रिजर्व के हवाले है, वहीं शारदा सागर की देखभाल मत्स्य विभाग करता है, लेकिन दोनों क्षेत्रों में अवैध मछली शिकार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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उत्तराखंड समेत स्थानीय बाजारों में हो रही है सप्लाई
शारदा नदी पर नौजल्हा, गभिया, रमनगरा, धुरिया पलिया व वीरखेड़ा तक अवैध शिकार किया जा रहा है। वहीं शारदा डैम में रमनगरा व गभिया सहराई में डैम के 20वें किमी तक शिकार किया जा रहा है। शारदा नदी व झीलों से लाई गई मछली को उत्तराखंड के खटीमा में सप्लाई किया जा रहा है। वहीं शारदा डैम की मछली को कलीनगर व अन्य आसपास की की मंडियों में सप्लाई किया जा रहा है।
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डैम में घटती जा रही मछलियों की संख्या
डैम को भरने को दो नहरों से पानी डाला जाता है। नहरों से पानी भरने के दौरान सिल्ट अधिक आने के चलते एक तो चारे की कमी होती जा रही है, दूसरे सिल्ट से पटने के चलते बरसात में जिन क्षेत्रों से पानी का तेज बहाव डैम में जाता है, वहीं से मछली की ब्रीडिंग होती है, लेकिन अब तेज बहाव न होने के चलते पिछले कई वर्षों से मछलियों की ब्रीडिंग नहीं हो पा रही है। बहरहाल प्रजनन काल के चलते हो रहे अवैध शिकार पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में मछलियों की कई प्रजातियां विलुप्त हो जाएगी।
दियूनी व पौटा डैम में भी अवैध शिकार
अमरिया ब्लाक क्षेत्र में दियूनी व पौटा डैम पड़ते हैं। इन दोनों डैमों में भी मछली शिकार पर प्रतिबंध है, लेकिन प्रजनन काल होने के बावजूद इन दोनों डैम से शिकारी मछली का जमकर अवैध शिकार रहे हैं।
शारदा डैम में यह पाई जाती हैं प्रजातियां
डैम में रोहू, कतला, नरेन, कुर्सा, सौल, बाम, टेगन, बैकर, लांची, रेवा, नैनी, भाकुर, गोछ आदि।
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शारदा सागर डैम में मछली के ठेके नीलामी की अवधि तीस जून तक रहती है। इसके बाद मछलियों का प्रजनन काल शुरू हो जाता है। ऐसे में डैम मेें तीन माह के लिए मछली शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। इधर प्रतिबंध लगने के कुछ दिन बाद ही शारदा डैम में मछली का शिकार शुरू हो गया। शिकारी छोटी-छोटी नावों के माध्यम से अवैध शिकार कर रहेे हैं। वहीं शारदा नदी में टाइगर रिजर्व होने के चलते मछली के शिकार पर पूरी तरह से प्रतिबंध है, लेकिन इन दिनों शारदा पार जंगल की झीलों में मछली का अवैध शिकार तेजी से हो रहा है। शारदा नदी का जिम्मा टाइगर रिजर्व के हवाले है, वहीं शारदा सागर की देखभाल मत्स्य विभाग करता है, लेकिन दोनों क्षेत्रों में अवैध मछली शिकार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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उत्तराखंड समेत स्थानीय बाजारों में हो रही है सप्लाई
शारदा नदी पर नौजल्हा, गभिया, रमनगरा, धुरिया पलिया व वीरखेड़ा तक अवैध शिकार किया जा रहा है। वहीं शारदा डैम में रमनगरा व गभिया सहराई में डैम के 20वें किमी तक शिकार किया जा रहा है। शारदा नदी व झीलों से लाई गई मछली को उत्तराखंड के खटीमा में सप्लाई किया जा रहा है। वहीं शारदा डैम की मछली को कलीनगर व अन्य आसपास की की मंडियों में सप्लाई किया जा रहा है।
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डैम में घटती जा रही मछलियों की संख्या
डैम को भरने को दो नहरों से पानी डाला जाता है। नहरों से पानी भरने के दौरान सिल्ट अधिक आने के चलते एक तो चारे की कमी होती जा रही है, दूसरे सिल्ट से पटने के चलते बरसात में जिन क्षेत्रों से पानी का तेज बहाव डैम में जाता है, वहीं से मछली की ब्रीडिंग होती है, लेकिन अब तेज बहाव न होने के चलते पिछले कई वर्षों से मछलियों की ब्रीडिंग नहीं हो पा रही है। बहरहाल प्रजनन काल के चलते हो रहे अवैध शिकार पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में मछलियों की कई प्रजातियां विलुप्त हो जाएगी।
दियूनी व पौटा डैम में भी अवैध शिकार
अमरिया ब्लाक क्षेत्र में दियूनी व पौटा डैम पड़ते हैं। इन दोनों डैमों में भी मछली शिकार पर प्रतिबंध है, लेकिन प्रजनन काल होने के बावजूद इन दोनों डैम से शिकारी मछली का जमकर अवैध शिकार रहे हैं।
शारदा डैम में यह पाई जाती हैं प्रजातियां
डैम में रोहू, कतला, नरेन, कुर्सा, सौल, बाम, टेगन, बैकर, लांची, रेवा, नैनी, भाकुर, गोछ आदि।