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पितृ पक्ष का आखिरी दिनः अब भी अगर नहीं सुधारी भूल तो आज सिरा दो पुरखों के फूल

Thu, 17 Sep 2020 12:19 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2020 12:19 AM IST
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Pitra Paksha
पीलीभीत। पितृ पक्ष का आज आखिरी दिन है। अगर कोई अपने पुरखों के फूल (अस्थियां ) गंगा में नहीं सिरा पाया है तो वह आज मुक्तिधाम से फूल लेकर उन्हें गंगा में प्रवाहित करके अपने पुरखों का तर्पण विधि विधान से कर सकता है। अब भी तमाम ऐसे परिवार हैं जो परलोक गमन के बाद अपनी व्यस्तता के चलते पुरखों के फूल यानी उनकी अस्थियां गंगा में विसर्जित नहीं कर सके। ऐसे लोग पितृ पक्ष के अंतिम दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या पर फूल सिराकर अपने पुरखों का तर्पण कर सकते हैं। मुक्तिधाम में अब भी 145 परिवार अपने पुरखों के अस्थि कलश लेने नहीं आए।
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पितृ अमावस्या को सर्व पितरी श्राद्ध भी कहते हैं। शास्त्रों के मुताबिक इस दिन पितरों को विधिवत विदाई दी जाती है। उसके बाद पूर्वज धरती से वापस परलोक चले जाते हैं। मगर, अब भी कई ऐसे परिवार हैं, जिनके पूर्वजों को परलोक गमन किए हुए छह माह से अधिक का समय बीत चुका है, पर अब तक उनकी अस्थियों का विसर्जन नहीं किया गया। मान्यता है कि मृत्यु के बाद अस्थियों का गंगा में विसर्जन होने के बाद ही आत्मा को मृत्यु लोक से मुक्ति मिलती है। अस्थियां विसर्जित न होने तक आत्मा भटकती रहती है।
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शहर के मुक्तिधाम की एक कोठरी में करीब 400 कलशों में चिताओं से चुने गए फूल पितृ पक्ष से पहले इस इंतजार में रखे थे कि शायद कभी कोई अपना उन्हें लेने आए और गंगा में प्रवाहित कर उन्हें मुक्ति दिलाएगा। अमर उजाला ने इस समाचार को दो सितंबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर को संज्ञान में लेने के बाद मुक्तिधाम समिति के सदस्यों ने पिछले दिनों 31 दिसंबर तक के अस्थिकलशों को कछला घाट पर ले जाकर विधि विधान से उन्हें गंगा में प्रवाहित कर दिया था। मुक्तिधाम में अब भी 145 अस्थि कलश रखे हुए हैं। हालांकि यह अस्थि कलश उन लोगों के हैं, जिनकी मृत्यु 31 दिसंबर 2019 के बाद हुई है। बृहस्पतिवार को श्राद्ध करने का अंतिम दिन है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन अस्थियों को सिराने का अंतिम मौका है। परिजन आज अपने पूर्वजों के फूल गंगा नदी में सिरा कर अपने दायित्वों से मुक्त हो सकते हैें। मुक्तिधाम के सेवादार भगवानदास ने बताया कि मुक्तिधाम समिति ने कुछ दिन पूर्व ही 258 अस्थिकलशों का विसर्जन कछला घाट पर किया था। अब भी मुक्तिधाम में 145 अस्थिलकश रखे हैं। इनकी सूची बनाई जा रही है।
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श्राद्ध पक्ष के अंतिम दिन ऐसे करें पितरों को विदा
सर्व पितृ अमावस्या पितरों की विदाई का दिन है। इस दिन श्राद्ध पक्ष का समापन होता है। पंडित आशुतोष शर्मा कहते हैं कि धार्मिक मान्यता के अनुसार बृहस्पतिवार का दिन पितरों के विसर्जन के लिए उत्तम माना गया है। इस दिन पितरों को विदा करने से पितृ और देव दोनों प्रसन्न होते हैं। यह मोक्ष देने वाले भगवान विष्णु की पूजा का दिन भी है। इसलिए सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितरों का विसर्जन विधि विधान से किया जा सकता है। इस दिन पितरों के तर्पण के निमित्त सात्विक पकवान बनाएं। फिर पुरखों को याद कर विधि विधान से उनका तर्पण करें।
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