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देश में सर्वश्रेष्ठ बनने से दूर नहीं पीलीभीत टाइगर रिजर्व : सीसीएफ
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समाजिक वानिकी कार्यालय सभागार में आयोजित प्रेस कांफ्रेस में जानकारी देते सीसीएफ व मौजूद अन्य अ
पीलीभीत। मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) बरेली जोन विजय सिंह ने कहा कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व नौ जून को अपनी स्थापना का एक दशक पूरे करने जा रहा है। टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद जिस तरह से वन एवं वन्यजीव प्रबंधन किया गया, उसी का परिणाम है कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व देश के श्रेष्ठ टाइगर रिजर्वों में शुमार होने की ओर है।
सामाजिक वानिकी के सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि वर्ष 1972 में वन्यजीव अधिनियम लागू होने के साथ ही वन्यजीव संरक्षण पर ध्यान देना शुरू किया गया। 90 के दशक में वनों एवं वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर कई बड़े प्रयास शुरू किए गए।
उन्होंने बताया कि नौ जून 2014 को पीलीभीत टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण पर प्राथमिकता के आधार पर कार्य किए गए। मैनेजमेंट एवं क्वालिटी ऑफ फॉरेस्टी के लिहाज से देखें तो पीटीआर देश के श्रेष्ठ टाइगर रिजर्वों में शुमार होने की ओर अग्रसर है।
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डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने कहा कि पीटीआर बाघ समेत वन्यजीवों की बढ़ती संख्या और यहां के जैव विविधता के लिए जाना जाता है। पर्यटन की दृष्टि से पीटीआर बनने के बाद वर्ष 2015 में 17582 पर्यटक पहुंचे थे, वहीं वर्तमान पर्यटन सत्र में 38300 पर्यटक यहां पहुंच चुके हैं। इसमें 164 विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।
पर्यटन सत्र के दौरान 1.12 करोड़ की आय हो चुकी है जोकि वर्ष 2020 से छह गुना अधिक है। उन्होंने बताया कि नौ जून को शहर के एक होटल में स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। कार्यक्रम में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) वन एवं पर्यावरण डॉ. अरुण कुमार सक्सेना एवं राज्यमंत्री वन एवं पर्यावरण केपी मलिक के साथ अपर मुख्य सचिव फारेस्ट मनोज कुमार सिंह, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ, पीसीसीएफ हाफ, पीसीसीएफ एडिमिनिस्ट्रेशन, दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ललित वर्मा समेत कई बड़े वन अफसरों को आमंत्रित किया गया है।
उन्होंने बताया कि स्थापना दिवस पर पांच शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से रेस्क्यू व्हीकल समेत अन्य कर्मियों को किट आदि का वितरण किया जाएगा। साथ ही पीटीआर के 10 साल के इतिहास को एक फिल्म के जरिये प्रस्तुत किया जाएगा।
इस दौरान डीएफओ ट्रेनी भरत, उप प्रभागीय वनाधिकारी पीटीआर रमेश चौहान, उप प्रभागीय वनाधिकारी वन एवं वन्यजीव प्रभाग अंजनी श्रीवास्तव, पीलीभीत रेंज के रेंजर सतेंद्र मोहन श्रीवास्तव, डिप्टी रेंजर शेर सिंह, सर्वेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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सामाजिक वानिकी के सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि वर्ष 1972 में वन्यजीव अधिनियम लागू होने के साथ ही वन्यजीव संरक्षण पर ध्यान देना शुरू किया गया। 90 के दशक में वनों एवं वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर कई बड़े प्रयास शुरू किए गए।
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उन्होंने बताया कि नौ जून 2014 को पीलीभीत टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण पर प्राथमिकता के आधार पर कार्य किए गए। मैनेजमेंट एवं क्वालिटी ऑफ फॉरेस्टी के लिहाज से देखें तो पीटीआर देश के श्रेष्ठ टाइगर रिजर्वों में शुमार होने की ओर अग्रसर है।
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डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने कहा कि पीटीआर बाघ समेत वन्यजीवों की बढ़ती संख्या और यहां के जैव विविधता के लिए जाना जाता है। पर्यटन की दृष्टि से पीटीआर बनने के बाद वर्ष 2015 में 17582 पर्यटक पहुंचे थे, वहीं वर्तमान पर्यटन सत्र में 38300 पर्यटक यहां पहुंच चुके हैं। इसमें 164 विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।
पर्यटन सत्र के दौरान 1.12 करोड़ की आय हो चुकी है जोकि वर्ष 2020 से छह गुना अधिक है। उन्होंने बताया कि नौ जून को शहर के एक होटल में स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। कार्यक्रम में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) वन एवं पर्यावरण डॉ. अरुण कुमार सक्सेना एवं राज्यमंत्री वन एवं पर्यावरण केपी मलिक के साथ अपर मुख्य सचिव फारेस्ट मनोज कुमार सिंह, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ, पीसीसीएफ हाफ, पीसीसीएफ एडिमिनिस्ट्रेशन, दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ललित वर्मा समेत कई बड़े वन अफसरों को आमंत्रित किया गया है।
उन्होंने बताया कि स्थापना दिवस पर पांच शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से रेस्क्यू व्हीकल समेत अन्य कर्मियों को किट आदि का वितरण किया जाएगा। साथ ही पीटीआर के 10 साल के इतिहास को एक फिल्म के जरिये प्रस्तुत किया जाएगा।
इस दौरान डीएफओ ट्रेनी भरत, उप प्रभागीय वनाधिकारी पीटीआर रमेश चौहान, उप प्रभागीय वनाधिकारी वन एवं वन्यजीव प्रभाग अंजनी श्रीवास्तव, पीलीभीत रेंज के रेंजर सतेंद्र मोहन श्रीवास्तव, डिप्टी रेंजर शेर सिंह, सर्वेश कुमार आदि मौजूद रहे।