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साहब! कड़ाके की ठंड में तो जलवा दीजिए अलाव...
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,पीलीभीत
Updated Fri, 05 Jan 2018 07:58 PM IST
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पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी के बीच गलन भरी ठंड से यहां लोग ठिठुर रहे हैं। ठंड से बचने के लिए लोगों द्वारा किए जा रहे जतन नाकाफी साबित हो रहे हैं। गर्म कपड़े पहनकर भी लोग कांपते नजर आ रहे हैं। ऐसे में शहर के अंदर नगरपालिका की ओर से किए गए अलाव जलवाने के दावे की हकीकत का पता लगाने अमर उजाला की टीम सड़कों पर निकली तो दावे की स्थिति चौंकाने वाली नजर आई। अधिकांश चौराहों पर अलाव की व्यवस्था नहीं थी। लोग किसी तरह कूड़ा करकट जलाकर हाथ तापते मिले। स्थानीय लोगों का कहना था कि पालिका की ओर से कुछ एक स्थानों पर रात में अलाव भेजा जाता है, दिन में अपने पास से ही व्यवस्था करनी पड़ती है। आलम यह है कि आलीशान ऑफिस में रूम हीटर की गर्मी में बैठे नगर पालिका के अधिकारियों व कर्मचारियों को शहर के अंदर खुले आसमान के नीचे रिक्शा, ई- रिक्शा चालकों और रोड किनारे झुग्गी झोपड़ी डाल कर रहने वालों की कोई चिंता नहीं है। पड़ताल में शहर के प्रमुख चौराहों और रोडवेज बस स्टैंड जैसे अधिकांश स्थानों पर रिक्शा चालक और गरीब तबके के लोग गलन भरी ठंड में कांपते- ठिठुरते नजर आए।
अलाव के दावे का सच जानने के लिए टीम गैस चौराहा पहुंची यहां कहीं अलाव नहीं दिखा। लोग ठंड से ठिठुर रहे थे। स्थानीय निवासी घनश्याम दास सक्सेना ने बताया कि पालिका की ओर से सिर्फ रात को नाम मात्र का अलाव डाला जाता है, जो रात को 15 से 20 मिनट में जलकर खत्म हो जाता है। मजबूरी में सभी लोग अपने पास से अलाव की व्यवस्था करते हैं।
आयुर्वेदिक कॉलेज चौराहे पर कुछ लोग उपलों से आग जलाते दिखे। यहां बैठे लोगों का कहना था कि पालिका गरीबों पर कोई ध्यान नहीं दे रही। स्थानीय दुकानदार शेर सिंह ने बताया की वार्ड मेंबर की ओर से रात में अलाव की व्यवस्था कराई थी, जिसकी वजह से खुले आसमान में रात काटने वाले लोगों को कुछ राहत मिली। अधिकतर लोग कूड़ाकरकट जला कर ही ठंड से बचने का इंतजाम कर लेते हैं।
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शहर का कमल्ले चौराहे पर भी पालिका प्रशासन के दावे मुंह चिढ़ाता नजर आए। यहां चौराहे पर भी अलाव की व्यवस्था नहीं दिखाई दी। फल विक्रता नसीम ने बताया कि उसे दिन में अब तक कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं दिखी। ठंड से बचने के लिए स्थानीय लोग खुद ही अलाव की व्यवस्था करते हैं तो वहीं हाथ ताप लेते हैं।
बेलो वाले चौराहे पर पालिका दावा करती है कि अलाव की व्यवस्था रोजाना की जा रही है। मगर यहां कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं दिखी। स्थानीय निवासी नियाम तुल्लाह ने बताया कि यह अलाव उन्होंने खुद जलवाई है। इसमें नगर पालिका का कोई योगदान नहीं है। स्थानीय कुछ लोगों का आरोप था कि पालिका की ओर से भेजी जाने वाली लकड़ी कर्मचारी बेच लेते होंगे।
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अलाव के दावे का सच जानने के लिए टीम गैस चौराहा पहुंची यहां कहीं अलाव नहीं दिखा। लोग ठंड से ठिठुर रहे थे। स्थानीय निवासी घनश्याम दास सक्सेना ने बताया कि पालिका की ओर से सिर्फ रात को नाम मात्र का अलाव डाला जाता है, जो रात को 15 से 20 मिनट में जलकर खत्म हो जाता है। मजबूरी में सभी लोग अपने पास से अलाव की व्यवस्था करते हैं।
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आयुर्वेदिक कॉलेज चौराहे पर कुछ लोग उपलों से आग जलाते दिखे। यहां बैठे लोगों का कहना था कि पालिका गरीबों पर कोई ध्यान नहीं दे रही। स्थानीय दुकानदार शेर सिंह ने बताया की वार्ड मेंबर की ओर से रात में अलाव की व्यवस्था कराई थी, जिसकी वजह से खुले आसमान में रात काटने वाले लोगों को कुछ राहत मिली। अधिकतर लोग कूड़ाकरकट जला कर ही ठंड से बचने का इंतजाम कर लेते हैं।
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शहर का कमल्ले चौराहे पर भी पालिका प्रशासन के दावे मुंह चिढ़ाता नजर आए। यहां चौराहे पर भी अलाव की व्यवस्था नहीं दिखाई दी। फल विक्रता नसीम ने बताया कि उसे दिन में अब तक कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं दिखी। ठंड से बचने के लिए स्थानीय लोग खुद ही अलाव की व्यवस्था करते हैं तो वहीं हाथ ताप लेते हैं।
बेलो वाले चौराहे पर पालिका दावा करती है कि अलाव की व्यवस्था रोजाना की जा रही है। मगर यहां कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं दिखी। स्थानीय निवासी नियाम तुल्लाह ने बताया कि यह अलाव उन्होंने खुद जलवाई है। इसमें नगर पालिका का कोई योगदान नहीं है। स्थानीय कुछ लोगों का आरोप था कि पालिका की ओर से भेजी जाने वाली लकड़ी कर्मचारी बेच लेते होंगे।