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Pilibhit News: रोडवेज बसों के बिना ''बेबस'' यात्री
Tue, 18 Jun 2024 02:54 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Tue, 18 Jun 2024 02:54 AM IST
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पीलीभीत का रोडवेज बस स्टैंड । फाइल फोटो
पीलीभीत। अधिकारियों की अनदेखी के चलते दिल्ली के अलावा अन्य मार्गों पर बसों का संचालन नियमित नहीं है। इस वजह से यात्रियों को परेशानी हो रही है। बसों के बिना ''बेबस'' यात्रियों की सुनवाई भी नहीं हो रही।
स्थानीय डिपो से कुल 112 बसों का संचालन किया जा रहा है। इसमें से नौ बसें अनुबंध की है। डिपो से करीब 40 बसों का संचालन दिल्ली के लिए हो रहा है। इसमें से पांच बसें कौशांबी तक भेजी जा रही हैं। स्थानीय मार्गों पर सवारियां कम होने का हवाला देते बसों का संचालन नहीं हो पा रहा। यह स्थिति तब है जब प्रतिदिन जिले के दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग मुख्यालय आते हैं।
इसका फायदा सीधे तौर पर डग्गामार वाहन चालक उठा रहे है। इन दिनों पूर्णागिरी का मेला चल रहा है। यात्री पीलीभीत तक आसानी से अपना सफर तय कर पहुंच जाते है, लेकिन पीलीभीत पहुंचने के बाद यात्रियों को घर तक पहुंचने के लिए धक्के खाने होते है। बावजूद जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है।
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किलोमीटर का खेल यात्रियों के लिए बना मुसीबत
रोडवेज के एक कर्मचारी ने बताया कि संविदा के कर्मचारियों को किलोमीटर पूरा करने पर ही वेतन दिया जाता है। स्थानीय मार्गों पर इनका किलोमीटर पूरा हो नहीं पाता। ऐसे में वह स्थानीय मार्गों पर सवारियां न होने का हवाला देते है। जिस वजह से बसों का संचालन इन मार्गों पर नहीं होता है। जबकि जिला मुख्यालय आने के लिए नियमित सवारियां ही बड़ी संख्या में है।
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बीसलपुर मार्ग पर डग्गामार वाहनों का ही सहारा
जिले के बरेली, पूरनपुर, अमरिया या फिर टनकपुर मार्ग की बात की जाए, तो यहां पर अन्य डिपो की बसों का संचालन भी होता है। मगर बीसलपुर मार्ग पर अन्य डिपो की बसें भी उपलब्ध नहीं है। चार बजे के बाद बस सहित अन्य साधन व 6.20 के बाद ट्रेन नहीं मिलती। ऐसे में यात्रियों को भटकना पड़ता है।
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इन मार्गों पर इतनी बसों का संचालन
दिल्ली- 40
कानपुर- एक
लखनऊ- तीन
आगरा- एक
टनकपुर- आठ
मथुरा- दो
अलीगढ़- दो
हरिद्वार-एक
विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार
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वर्जन:
जिन मार्गों पर जैसी सवारियां हैं, उसी तरह से बसों का संचालन किया जा रहा है। दिल्ली मार्ग पर सबसे ज्यादा सवारियां रहती हैं। इस वजह से वहां पर ज्यादा ध्यान रहता है। लोकल मार्गों पर स्वयं जाकर सर्वे किया है। सवारी नाममात्र ही मिलती हैं। - पवन कुमार श्रीवास्तव,एआरएम
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स्थानीय डिपो से कुल 112 बसों का संचालन किया जा रहा है। इसमें से नौ बसें अनुबंध की है। डिपो से करीब 40 बसों का संचालन दिल्ली के लिए हो रहा है। इसमें से पांच बसें कौशांबी तक भेजी जा रही हैं। स्थानीय मार्गों पर सवारियां कम होने का हवाला देते बसों का संचालन नहीं हो पा रहा। यह स्थिति तब है जब प्रतिदिन जिले के दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग मुख्यालय आते हैं।
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इसका फायदा सीधे तौर पर डग्गामार वाहन चालक उठा रहे है। इन दिनों पूर्णागिरी का मेला चल रहा है। यात्री पीलीभीत तक आसानी से अपना सफर तय कर पहुंच जाते है, लेकिन पीलीभीत पहुंचने के बाद यात्रियों को घर तक पहुंचने के लिए धक्के खाने होते है। बावजूद जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है।
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किलोमीटर का खेल यात्रियों के लिए बना मुसीबत
रोडवेज के एक कर्मचारी ने बताया कि संविदा के कर्मचारियों को किलोमीटर पूरा करने पर ही वेतन दिया जाता है। स्थानीय मार्गों पर इनका किलोमीटर पूरा हो नहीं पाता। ऐसे में वह स्थानीय मार्गों पर सवारियां न होने का हवाला देते है। जिस वजह से बसों का संचालन इन मार्गों पर नहीं होता है। जबकि जिला मुख्यालय आने के लिए नियमित सवारियां ही बड़ी संख्या में है।
बीसलपुर मार्ग पर डग्गामार वाहनों का ही सहारा
जिले के बरेली, पूरनपुर, अमरिया या फिर टनकपुर मार्ग की बात की जाए, तो यहां पर अन्य डिपो की बसों का संचालन भी होता है। मगर बीसलपुर मार्ग पर अन्य डिपो की बसें भी उपलब्ध नहीं है। चार बजे के बाद बस सहित अन्य साधन व 6.20 के बाद ट्रेन नहीं मिलती। ऐसे में यात्रियों को भटकना पड़ता है।
इन मार्गों पर इतनी बसों का संचालन
दिल्ली- 40
कानपुर- एक
लखनऊ- तीन
आगरा- एक
टनकपुर- आठ
मथुरा- दो
अलीगढ़- दो
हरिद्वार-एक
विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार
वर्जन:
जिन मार्गों पर जैसी सवारियां हैं, उसी तरह से बसों का संचालन किया जा रहा है। दिल्ली मार्ग पर सबसे ज्यादा सवारियां रहती हैं। इस वजह से वहां पर ज्यादा ध्यान रहता है। लोकल मार्गों पर स्वयं जाकर सर्वे किया है। सवारी नाममात्र ही मिलती हैं। - पवन कुमार श्रीवास्तव,एआरएम