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24 घंटे में 30 मिमी बारिश ने बर्बाद कर दी धान की फसल
सार
सूखे जैसे हालात का डटकर सामना करते हुए किसानों ने कड़ी मेहनत से धान की फसल तैयार की, लेकिन बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया।खेतों में पानी भरा होने से कंबाइन से कटाई नहीं हो पा रही है।बारिश से धान का रंग भी काला पड़ सकता है, जिसके चलते कीमतों में गिरावट आ सकती है।
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अमरिया क्षेत्र में हुई बरसात से एक खेत में भरा पानी। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
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विस्तार
पीलीभीत। सूखे जैसे हालात का डटकर सामना करते हुए किसानों ने कड़ी मेहनत से धान की फसल तैयार की, लेकिन बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। बीते 24 घंटे में 30 एमएम से ज्यादा हुई बारिश से धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। सैकड़ों एकड़ फसल खेतों में बिछ गई है। खेतों में पानी भरने से फसल गल भी सकती है।
पिछले साल अक्तूबर में आई बाढ़ से सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई थी। हजारा क्षेत्र और शारदा नदी के आसपास किसान फसल की कटाई तक नहीं कर सके थे। इस बार फिर बारिश किसानों पर मुसीबत बनकर टूटी है। अमरिया में धान की फसल खेतों में बिछ गई है। खेतों में ज्यादा पानी होने से फसल डूब गई। यही हाल पूरनपुर क्षेत्र का रहा। यहां भी सैकड़ों एकड़ फसल डूब गई है। शुक्रवार की दोपहर जब बूंदाबांदी बंद हुई तो किसान खेतों में फसल देखने पहुंचे। हालात देखकर उनके चेहरे मुर्झा गए।
कटाई के साथ खरीद भी प्रभावित,
कीमतों पर पड़ सकता है असर
पिछले दो दिनों से लगातार रुक-रुककर हुई बारिश से धान की कटाई प्रभावित हुई है। खेतों में पानी भरा होने से कंबाइन से कटाई नहीं हो पा रही है। कई किसानों ने मजदूर लगाकर हाथ से फसल कटवाना शुरू कर दिया है।
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बारिश के चलते शुक्रवार को मंडियों में धान की आवक भी कम हुई। सरकारी खरीद भी प्रभावित हुई। शुक्रवार को कुछ सेंटरों पर ही किसान धान लेकर पहुंचे। अब धान की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। बारिश से धान का रंग भी काला पड़ सकता है, जिसके चलते कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि पिछले दो दिनों से बाजार में धान की कीमतों में वैसे भी 200 रुपये तक की गिरावट आ गई है। पिछले साल किसानों को 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब धान बेचना पड़ा था।
खेतों से पानी निकाल दें किसान
मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएस ढाका ने बताया कि अगर खेत में पानी भर गया है तो तुरंत उसे निकालने का बंदोबस्त करें। अगर ज्यादा दिनों तक पानी भरा रहता है तो खड़ी फसल भी गिर सकती है। पानी में डूबकर फसल गल सकती है। धान काला पड़ सकता है।
किसान बोले, पिछले साल भी हुआ था नुकसान
पूरनपुर के गांव जादौंपुर के किसान एजाज बताते हैं नदी के पास आठ बीघा धान की फसल खड़ी थी। सुबह जब खेत देखने गए तो पचास फीसदी फसल बिछ चुकी थी। पिछले साल भी बारिश होने से नुकसान उठाना पड़ा था। अमरिया के किसान गुरजीत सिंह कहते हैं कि कुछ फसल कटवा ली थी। बाकी खेत में खड़ी है। अब पानी सूूखे तभी कटाई हो सकेगी। दो एकड़ फसल बिछ गई है। कुछ पानी में भी डूबी है।
राइस मिल मालिकों व किसानों से की बात
पूरनपुर। धान खरीद को लेकर शुक्रवार को डिप्टी आरएमओ विकास चंद्र तिवारी ने मंडी समिति पहुंचकर किसानों, राइस मिल मालिकों से वार्ता की।
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पिछले साल अक्तूबर में आई बाढ़ से सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई थी। हजारा क्षेत्र और शारदा नदी के आसपास किसान फसल की कटाई तक नहीं कर सके थे। इस बार फिर बारिश किसानों पर मुसीबत बनकर टूटी है। अमरिया में धान की फसल खेतों में बिछ गई है। खेतों में ज्यादा पानी होने से फसल डूब गई। यही हाल पूरनपुर क्षेत्र का रहा। यहां भी सैकड़ों एकड़ फसल डूब गई है। शुक्रवार की दोपहर जब बूंदाबांदी बंद हुई तो किसान खेतों में फसल देखने पहुंचे। हालात देखकर उनके चेहरे मुर्झा गए।
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कटाई के साथ खरीद भी प्रभावित,
कीमतों पर पड़ सकता है असर
पिछले दो दिनों से लगातार रुक-रुककर हुई बारिश से धान की कटाई प्रभावित हुई है। खेतों में पानी भरा होने से कंबाइन से कटाई नहीं हो पा रही है। कई किसानों ने मजदूर लगाकर हाथ से फसल कटवाना शुरू कर दिया है।
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बारिश के चलते शुक्रवार को मंडियों में धान की आवक भी कम हुई। सरकारी खरीद भी प्रभावित हुई। शुक्रवार को कुछ सेंटरों पर ही किसान धान लेकर पहुंचे। अब धान की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। बारिश से धान का रंग भी काला पड़ सकता है, जिसके चलते कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि पिछले दो दिनों से बाजार में धान की कीमतों में वैसे भी 200 रुपये तक की गिरावट आ गई है। पिछले साल किसानों को 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब धान बेचना पड़ा था।
खेतों से पानी निकाल दें किसान
मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएस ढाका ने बताया कि अगर खेत में पानी भर गया है तो तुरंत उसे निकालने का बंदोबस्त करें। अगर ज्यादा दिनों तक पानी भरा रहता है तो खड़ी फसल भी गिर सकती है। पानी में डूबकर फसल गल सकती है। धान काला पड़ सकता है।
किसान बोले, पिछले साल भी हुआ था नुकसान
पूरनपुर के गांव जादौंपुर के किसान एजाज बताते हैं नदी के पास आठ बीघा धान की फसल खड़ी थी। सुबह जब खेत देखने गए तो पचास फीसदी फसल बिछ चुकी थी। पिछले साल भी बारिश होने से नुकसान उठाना पड़ा था। अमरिया के किसान गुरजीत सिंह कहते हैं कि कुछ फसल कटवा ली थी। बाकी खेत में खड़ी है। अब पानी सूूखे तभी कटाई हो सकेगी। दो एकड़ फसल बिछ गई है। कुछ पानी में भी डूबी है।
राइस मिल मालिकों व किसानों से की बात
पूरनपुर। धान खरीद को लेकर शुक्रवार को डिप्टी आरएमओ विकास चंद्र तिवारी ने मंडी समिति पहुंचकर किसानों, राइस मिल मालिकों से वार्ता की।