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बहनोई की जलाकर हत्या के मामले में दो भाइयों को आजीवन कारावास
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पीलीभीत। अपर सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला ने बहनोई की पेट्रोल छिड़कने के बाद जलाकर हत्या करने के मामले में बीसलपुर के गांव खनंका निवासी प्रेमराज और उसके भाई विजयपाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक को ढाई हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया है।
अभियोजन के अनुसार शाहजहांपुर जिले के थाना कटरा के गांव परशुरामपुर निवासी रूबी पत्नी अवधेश ने बीसलपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके पति अवधेश की पहली पत्नी गांव खनंका की रहने वाली थी। उसका निधन हो गया। उसके बाद अवधेश ने उससे दूसरी शादी की। चार अगस्त 2017 को वह अपने पति अवधेश के साथ पहली पत्नी की पुत्री राधा जो गांव खनंका में थी, उसे लेने गईं थीं। वहीं पर विवाद हो गया। प्रेमराज और उसके भाई विजय पाल ने अवधेश के ऊपर डिब्बे से पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसमें वह गंभीर रूप से जल गए। उन्हें बीसलपुर अस्पताल ले जाया गया। वहां से जिला अस्पताल पीलीभीत लाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें बरेली रेफर कर दिया गया। बरेली में इलाज के दौरान 15 अगस्त 2017 को रात के 9:00 बजे उनकी मौत हो गई। पुलिस ने शव का पंचायत नामा भरकर अंतिम परीक्षण कराया। विवेचना के बाद प्रेमराज और विजयपाल के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कुल 8 गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए गए। अवधेश की मृत्यु से पूर्व उसके मृत्यु पूर्व बयान तहसीलदार आनंद प्रकाश राय ने 4 अगस्त 2017 को अंकित किए थे। अपर सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला ने आरोपी प्रेमराज और विजयपाल को दोषी पाकर आजीवन कारावास और प्रत्येक को ढाई-ढाई हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
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अभियोजन के अनुसार शाहजहांपुर जिले के थाना कटरा के गांव परशुरामपुर निवासी रूबी पत्नी अवधेश ने बीसलपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके पति अवधेश की पहली पत्नी गांव खनंका की रहने वाली थी। उसका निधन हो गया। उसके बाद अवधेश ने उससे दूसरी शादी की। चार अगस्त 2017 को वह अपने पति अवधेश के साथ पहली पत्नी की पुत्री राधा जो गांव खनंका में थी, उसे लेने गईं थीं। वहीं पर विवाद हो गया। प्रेमराज और उसके भाई विजय पाल ने अवधेश के ऊपर डिब्बे से पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसमें वह गंभीर रूप से जल गए। उन्हें बीसलपुर अस्पताल ले जाया गया। वहां से जिला अस्पताल पीलीभीत लाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें बरेली रेफर कर दिया गया। बरेली में इलाज के दौरान 15 अगस्त 2017 को रात के 9:00 बजे उनकी मौत हो गई। पुलिस ने शव का पंचायत नामा भरकर अंतिम परीक्षण कराया। विवेचना के बाद प्रेमराज और विजयपाल के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कुल 8 गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए गए। अवधेश की मृत्यु से पूर्व उसके मृत्यु पूर्व बयान तहसीलदार आनंद प्रकाश राय ने 4 अगस्त 2017 को अंकित किए थे। अपर सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला ने आरोपी प्रेमराज और विजयपाल को दोषी पाकर आजीवन कारावास और प्रत्येक को ढाई-ढाई हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
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