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तीन घंटे रूका रहा फौजी के शव का अंतिम संस्कार
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बीसलपुर (पीलीभीत)। सड़क हादसे में मौत के बाद फौजी के अंतिम संस्कार को लेकर हंगामा हो गया। परिजनों ने फौज के अफसर के आए बिना आर्मी जवान के अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। यह खबर मिलने पर विधायक, एसडीएम मौके पर पहुुंचे। परिवारवालों से बातचीत कर उनको हरसंभव मदद का भरोसा दिलाकर शांत कराया। इसके बाद ही परिवार के लोग माने। करीब तीन घंटे तक अंतिम संस्कार रुका रहा।
बीसलपुर-शाहजहांपुर रोड पर नीवादांडी गांव के पास वाहन की टक्कर से शनिवार रात करीब साढ़े नौ बजे ग्राम सफौरा निवासी फौजी 30 वर्षीय राजेंद्र की मौत हो गई थी। वह 15 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। शनिवार रात को बीसलपुर रामलीला मेला जा रहे थे। रविवार दोपहर करीब दो बजे पोस्टमार्टम के बाद राजेंद्र का शव गांव पहुंच गया। अंतिम संस्कार की तैयारी सुबह से चल रही थी। इसी बीच अचानक परिवार के लोगों ने अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। फौज के किसी जिम्मेदार अधिकारी के गांव आने की मांग शुरू कर दी। इसकी खबर प्रशासन को लगी तो खलबली मच गई। कुछ ही देर में एसडीएम सौरभ दुबे, कोतवाल हरिशंकर वर्मा पुलिस बल के साथ पहुंच गए। भाजपा के बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा भी आ गए। उन्होंने परिवार वालों से बातचीत की। हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। यह कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह खुद परिवार के साथ फौज के अधिकारियों से मुलाकात करने चलेंगे। इस आश्वासन पर घरवाले मान गए। फिर पांच बजे शव का अंतिम संस्कार किया गया।
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बीसलपुर-शाहजहांपुर रोड पर नीवादांडी गांव के पास वाहन की टक्कर से शनिवार रात करीब साढ़े नौ बजे ग्राम सफौरा निवासी फौजी 30 वर्षीय राजेंद्र की मौत हो गई थी। वह 15 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। शनिवार रात को बीसलपुर रामलीला मेला जा रहे थे। रविवार दोपहर करीब दो बजे पोस्टमार्टम के बाद राजेंद्र का शव गांव पहुंच गया। अंतिम संस्कार की तैयारी सुबह से चल रही थी। इसी बीच अचानक परिवार के लोगों ने अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। फौज के किसी जिम्मेदार अधिकारी के गांव आने की मांग शुरू कर दी। इसकी खबर प्रशासन को लगी तो खलबली मच गई। कुछ ही देर में एसडीएम सौरभ दुबे, कोतवाल हरिशंकर वर्मा पुलिस बल के साथ पहुंच गए। भाजपा के बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा भी आ गए। उन्होंने परिवार वालों से बातचीत की। हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। यह कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह खुद परिवार के साथ फौज के अधिकारियों से मुलाकात करने चलेंगे। इस आश्वासन पर घरवाले मान गए। फिर पांच बजे शव का अंतिम संस्कार किया गया।
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