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न हनुमान जी ने लंका जलाई, न रावण ने अट्ठाहास किया..सबने धरना दिया
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बीसलपुर (पीलीभीत)। रामलीला में रविवार को लंका दहन का मंचन होना था। लेकिन दर्शक न लंका दहन देख पाए न रावण का अट्ठाहास सुन पाए। क्योंकि नियमों की अनदेखी पाए जाने पर अधिकारियों की ओर से रामलीला मेले में लगे झूले और खेल-तमाशे बंद कराए जाने पर हंगामा हो गया। कार्रवाई के विरोध में मेला कमेटी के साथ रामलीला के पात्रों ने मंचन बंद कर दिया और धरने पर बैठ गए। काफी देर तक हंगामा होता रहा। करीब दो घंटे बाद अधिकारी बैकफुट पर आ गए और बंद कराए गए सभी खेल-तमाशे शुरू करा दिए। इसके बाद मामला शांत हो सका। हालांकि इस दौरान रविवार को होने वाली लीला का मंचन नहीं हो सका।
रविवार शाम करीब पांच बजे एसडीएम सौरभ दुबे, सीओ प्रवीण मलिक रामलीला मेले की व्यवस्थाएं चेक करने पहुंचे। यहां झूले और खेल तमाशों को लेकर नियमों की अनदेखी सामने आई। उनका कहना था कि सुरक्षा के लिहाज से मानक पूरे नहीं किए गए हैं। इस पर उन्होंने मानक पूरे होने तक झूले और खेल तमाशे बंद करा दिए। इधर, कार्रवाई का तुरंत ही विरोध हो गया। मेला कमेटी के लोग अधिकारियों की कार्रवाई को गलत बताते हुए धरने पर बैठ गए। लीला कर रहे पात्र भी उनके समर्थन में आ गए और लीला बंद कर धरने में शामिल हुए। मौजूद लोगों ने भी धरने का समर्थन कर दिया। अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। एसडीएम-सीओ ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन कोई नहीं माना। करीब दो घंटे चले धरने के बाद विधायक रामसरन वर्मा की मौजूदगी में वार्ता शुरू हुई। जिसके बाद झूले और खेल तमाशे सवा सात बजे शुरू करा दिए गए, तब जाकर मामला पूरी तरह से शांत हो सका। हंगामे के चलते रविवार को होने वाली लंका दहन लीला का मंचन नहीं हो सका।
खेल-तमाशे चेक किए गए तो मानकों की अनदेखी सामने आई। इस पर मानक पूरा होने तक इसको बंद कराया गया था। खेल-तमाशे वालों ने मानक पूरे करने का आश्वासन दिया है। इस पर उनको शुरू करा दिया है। - सौरभ दुबे, एसडीएम
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मेला हमारा सौ साल से इसी मानक के अनुसार होता है। कभी किसी अधिकारी ने कोई आपत्ति नहंी की। इस बार बेवजह परेशान किया गया है। यह गलत था, इसलिए धरना दिया गया था। - गोपाल कृष्ण अग्रवाल, मेला प्रबंधक
मेले में विवाद का पता लगते ही मौके पर गया था। दोनों पक्षों को बैठाकर बातचीत कराई गई। इसके बाद मामला शांत करा दिया गया है। - रामसरन वर्मा, विधायक
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रविवार शाम करीब पांच बजे एसडीएम सौरभ दुबे, सीओ प्रवीण मलिक रामलीला मेले की व्यवस्थाएं चेक करने पहुंचे। यहां झूले और खेल तमाशों को लेकर नियमों की अनदेखी सामने आई। उनका कहना था कि सुरक्षा के लिहाज से मानक पूरे नहीं किए गए हैं। इस पर उन्होंने मानक पूरे होने तक झूले और खेल तमाशे बंद करा दिए। इधर, कार्रवाई का तुरंत ही विरोध हो गया। मेला कमेटी के लोग अधिकारियों की कार्रवाई को गलत बताते हुए धरने पर बैठ गए। लीला कर रहे पात्र भी उनके समर्थन में आ गए और लीला बंद कर धरने में शामिल हुए। मौजूद लोगों ने भी धरने का समर्थन कर दिया। अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। एसडीएम-सीओ ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन कोई नहीं माना। करीब दो घंटे चले धरने के बाद विधायक रामसरन वर्मा की मौजूदगी में वार्ता शुरू हुई। जिसके बाद झूले और खेल तमाशे सवा सात बजे शुरू करा दिए गए, तब जाकर मामला पूरी तरह से शांत हो सका। हंगामे के चलते रविवार को होने वाली लंका दहन लीला का मंचन नहीं हो सका।
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खेल-तमाशे चेक किए गए तो मानकों की अनदेखी सामने आई। इस पर मानक पूरा होने तक इसको बंद कराया गया था। खेल-तमाशे वालों ने मानक पूरे करने का आश्वासन दिया है। इस पर उनको शुरू करा दिया है। - सौरभ दुबे, एसडीएम
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मेला हमारा सौ साल से इसी मानक के अनुसार होता है। कभी किसी अधिकारी ने कोई आपत्ति नहंी की। इस बार बेवजह परेशान किया गया है। यह गलत था, इसलिए धरना दिया गया था। - गोपाल कृष्ण अग्रवाल, मेला प्रबंधक
मेले में विवाद का पता लगते ही मौके पर गया था। दोनों पक्षों को बैठाकर बातचीत कराई गई। इसके बाद मामला शांत करा दिया गया है। - रामसरन वर्मा, विधायक