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ईश्वर से प्रेम करने वाले लोग ही प्राप्त कर पाते हैं सदबुद्धि : किरण
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बीसलपुर के जनता इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में प्रवचन देती विदुषी किरण आर्या।संवाद
बीसलपुर। एटा से आईं आर्यसमाज की विदुषी किरन आर्या ने कहा कि ईश्वर से प्रेम करने वाले लोग ही सदबुद्धि प्राप्त कर पाते हैं।
विदुषी ने जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज में आर्य समाज के तत्वावधान में चल रहे तीन दिवसीय वैदिक सत्संग में शनिवार को दूसरे दिन प्रवचन करते हुए कहा कि जिनके पास सद्बुद्धि होती है, वही लोग अन्य लोगों के मन को जीत पाते हैं और ऐसे ही लोगों की मरने के बाद मुक्ति हो पाती है।
बरेली से आए आर्यसमाज के विद्वान भानु प्रताप शास्त्री ने कहा कि स्वामी दयानंद ने आर्यसमाज की स्थापना कर हिंदू समाज पर बहुत बड़ा एहसान किया है। हिंदू समाज के लोगों को इसके लिए स्वामी दयानंद का हमेशा आभारी रहना चाहिए। अजमेर (राजस्थान ) से पधारे आर्यसमाज के विद्वान सोमदेव ने कहा कि इंसान को अपने कष्ट के लिए दूसरे को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए। ऐसा करने पर उसके कष्ट दूर नहीं हो पाते हैं। अपने कष्टों के बारे में इंसान को आत्म चिंतन करना चाहिए।
आत्म चिंतन में कष्ट का कारण मालूम हो जाता है। कारण मालूम होने पर उसके निदान का कारण मालूम करना चाहिए। उसके बाद कष्टों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। जयघोष और शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हो गया।
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प्रवचन शुरू होने से पहले कार्यक्रम स्थल पर वैदिक यज्ञ हुआ, जिसमें आर्यजनों ने आहुतियां डालीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्यसमाज के प्रधान मोहन स्वरूप ने और संचालन मंत्री राकेश कुमार ने किया। संवाद
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विदुषी ने जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज में आर्य समाज के तत्वावधान में चल रहे तीन दिवसीय वैदिक सत्संग में शनिवार को दूसरे दिन प्रवचन करते हुए कहा कि जिनके पास सद्बुद्धि होती है, वही लोग अन्य लोगों के मन को जीत पाते हैं और ऐसे ही लोगों की मरने के बाद मुक्ति हो पाती है।
बरेली से आए आर्यसमाज के विद्वान भानु प्रताप शास्त्री ने कहा कि स्वामी दयानंद ने आर्यसमाज की स्थापना कर हिंदू समाज पर बहुत बड़ा एहसान किया है। हिंदू समाज के लोगों को इसके लिए स्वामी दयानंद का हमेशा आभारी रहना चाहिए। अजमेर (राजस्थान ) से पधारे आर्यसमाज के विद्वान सोमदेव ने कहा कि इंसान को अपने कष्ट के लिए दूसरे को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए। ऐसा करने पर उसके कष्ट दूर नहीं हो पाते हैं। अपने कष्टों के बारे में इंसान को आत्म चिंतन करना चाहिए।
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आत्म चिंतन में कष्ट का कारण मालूम हो जाता है। कारण मालूम होने पर उसके निदान का कारण मालूम करना चाहिए। उसके बाद कष्टों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। जयघोष और शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हो गया।
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प्रवचन शुरू होने से पहले कार्यक्रम स्थल पर वैदिक यज्ञ हुआ, जिसमें आर्यजनों ने आहुतियां डालीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्यसमाज के प्रधान मोहन स्वरूप ने और संचालन मंत्री राकेश कुमार ने किया। संवाद