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बेसिक स्कूलों की ऑनलाइन पढ़ाई में कम हो गए 25 फीसदी बच्चे
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पीलीभीत। लॉकडाउन के बाद परिषदीय विद्यालयों की ऑनलाइन पढ़ाई में रोजाना क्लास में शामिल होने वाले बच्चों की संख्या में 25 फीसदी की गिरावट आई है। इसकी वजह बच्चों के पास अपना मोबाइल फोन का न होना है। लॉकडाउन के दौरान जब अभिभावक घर पर थे तो बच्चे उनके मोबाइल से क्लास में हिस्सा ले लेते थे। अब अभिभावक अपना फोन साथ लेकर काम पर बाहर जाने लगे तो बच्चों की पढ़ाई छूट गई।
कोरोना संकट के इस दौर में बच्चों की पढ़ाई को लेकर केंद्र और राज्य सरकार का फोकस ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक ऑनलाइन शिक्षा पहुंचाने पर है। एंड्रायड मोबाइल फोन के अभाव में पहले ही जिले में 1,76,531 बच्चों के नामांकन का लक्ष्य हासिल नहीं हो पाया है। तय लक्ष्य के सापेक्ष 50 फीसदी बच्चों का ही नामांकन हुआ। लॉकडाउन के दौरान 1802 परिषदीय स्कूलों मेें से 1755 स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षा शुरू कराई गई। बेसिक शिखा विभाग ने जैसे तैसे 30 हजार से अधिक बच्चें को इसमें जोड़ने का दावा किया, मगर, लॉकडाउन के बाद अब परिषदीय स्कूलों की ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों की संख्या में 25 फीसदी तक की गिरावट आ गई।
लॉकडाउन के दौरान बच्चों के हाथ में आया एंड्रायड उनके माता-पिता का था। अब अनलॉक में यह दोबारा अभिभावकों की जेबों में पहुंच गया है। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान अभिभावक अपने घरों में मौजूद रहते थे। ऑनलाइन क्लास के लिए अध्ययन सामग्री, वीडियो और सवाल जवाब व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से बच्चों के मोबाइल फोन पर भेज दिए जाते थे। मगर, लॉकडाउन खत्म होने के बाद अभिभावक अपने काम से बाहर निकलने लगे। बच्चों को उनका फोन नहीं मिल पा रहा। जिला समन्वयक प्रशिक्षण डॉ. दीपक जायसवाल के मुताबिक अनलॉक के दौरान आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग से आने वाले बच्चों के अभिभावक मोबाइल फोन लेकर घर से काम पर निकलने लगे हैं। घरों में दूसरा एंड्रायड फोन नहीं होने की वजह से बच्चों की ऑनलाइन क्लास प्रभावित हो रही है।
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लॉकडाउन के बाद ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है। ऑनलाइन क्लास में बच्चों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इसे लेकर शिक्षकों को निर्देशित किया गया है। - मदनलाल वर्मा, प्रभारी बीएसए
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कोरोना संकट के इस दौर में बच्चों की पढ़ाई को लेकर केंद्र और राज्य सरकार का फोकस ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक ऑनलाइन शिक्षा पहुंचाने पर है। एंड्रायड मोबाइल फोन के अभाव में पहले ही जिले में 1,76,531 बच्चों के नामांकन का लक्ष्य हासिल नहीं हो पाया है। तय लक्ष्य के सापेक्ष 50 फीसदी बच्चों का ही नामांकन हुआ। लॉकडाउन के दौरान 1802 परिषदीय स्कूलों मेें से 1755 स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षा शुरू कराई गई। बेसिक शिखा विभाग ने जैसे तैसे 30 हजार से अधिक बच्चें को इसमें जोड़ने का दावा किया, मगर, लॉकडाउन के बाद अब परिषदीय स्कूलों की ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों की संख्या में 25 फीसदी तक की गिरावट आ गई।
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लॉकडाउन के दौरान बच्चों के हाथ में आया एंड्रायड उनके माता-पिता का था। अब अनलॉक में यह दोबारा अभिभावकों की जेबों में पहुंच गया है। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान अभिभावक अपने घरों में मौजूद रहते थे। ऑनलाइन क्लास के लिए अध्ययन सामग्री, वीडियो और सवाल जवाब व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से बच्चों के मोबाइल फोन पर भेज दिए जाते थे। मगर, लॉकडाउन खत्म होने के बाद अभिभावक अपने काम से बाहर निकलने लगे। बच्चों को उनका फोन नहीं मिल पा रहा। जिला समन्वयक प्रशिक्षण डॉ. दीपक जायसवाल के मुताबिक अनलॉक के दौरान आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग से आने वाले बच्चों के अभिभावक मोबाइल फोन लेकर घर से काम पर निकलने लगे हैं। घरों में दूसरा एंड्रायड फोन नहीं होने की वजह से बच्चों की ऑनलाइन क्लास प्रभावित हो रही है।
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लॉकडाउन के बाद ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है। ऑनलाइन क्लास में बच्चों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इसे लेकर शिक्षकों को निर्देशित किया गया है। - मदनलाल वर्मा, प्रभारी बीएसए