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अक्तूबर तक जिला कारागार में स्थापित होगा पीसीओ
पीलीभीत।
Updated Wed, 26 Aug 2015 11:18 PM IST
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जिला जेल में निरुद्ध बंदी अब जेल से ही अपने घर वालों से बात कर सकेंगे।
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सूबे की सभी जेलों में बायोमैट्रिक सिस्टम पर आधारित पीसीओ खोले जाएंगे।
शासन ने 3.70 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार कर कार्यदायी संस्था बीएसएनएल को धन
दे दिया है। पीलीभीत में 30 अक्तूबर से पूर्व यह सुविधा शुरू हो जाएगी।
अभी तक मुलाकाती व्यवस्था के तहत बंदी और कैदी अपने परिवार वालों से मिल पाता था। शासन ने अब सूबे की जेलों में बायोमैटिक पीसीओ खोले जाने की व्यवस्था की है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद बंदियों और कैदियों को घर वालों से बात करने के लिए उनके आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बंदी जेल से ही अपने घर वालों से बात कर सकेगा। शासन ने सूबे भर की जेलों में इसे लगाने का ठेका बीएसएनएल को दिया है।
इसके लिए 3.70 करोड़ रूपये भी कार्यदायी संस्था को अवमुक्त कर दिए हैं। बंदी पांच रुपये में पांच मिनट हफ्ते में और महीने में 20 मिनट ही बात कर सकेंगे।
अच्छे आचरण वाले कर सकेंगे बात
अच्छे आचरण वाले बंदियों को ही बात करने की सुविधा मिलेगी। जेल में दंडित होने वाले बंदियों को इस सुविधा से वंचित रखा जाएगा। इसके लिए बकायादा एक रजिस्टर भी मेनटेन होगा।
ऐसे काम करेंगी बायोमैट्रिक मशीन
बायोमैट्रिक मशीन में बंदी के अंगूठे का निशान और बंदी की इच्छानुसार उसके परिवार के अधिकतम दो मोबाइल नंबर फीड होंगे। बंदी के मशीन पर हाथ अंगूठा रखते ही दोनों नंबर सामने आ जाएंगे। बंदी जिस नंबर पर उंगली रखेगा। उसी पर आटोमैटिक कॉल कनेक्ट होगी। पांच मिनट पूरे होने पर कॉल स्वत: डिस्कनेक्ट हो जाएगी। कॉल डिस्कनेक्ट होते ही दो बाक्स बनकर स्क्रीन पर आएंगे। एक बाक्स में बंदी का पूरा डिटेल और दूसरे में उसकी बातचीत की रिकार्डिंग होंगी।
तीन महीने तक सुरक्षित रहेगी रिकार्डिंग
बंदी की बातचीत की आटो रिकार्डिंग तीन महीने तक सुरक्षित रहेगी। इसके बाद वह स्वत: डिलीट हो जाएगी। इस रिकार्डिंग को जरूरत पड़ने पर जेल प्रशासन सुन सकता है कि बंदी ने क्या बातें की।
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जिला कारगार में बायोमैट्रिक स्सिटम पर आधारित पीसीओ 30 अक्तूबर के पहले शुरू हो जाएगा। इसके लिए सारी कार्रवाई पूरी कर ली गई हैं। शासन से गाइड लाइन भी प्राप्त हो गई है। शासन का यह कदम काफी अच्छा है। इससे बंदियों को काफी राहत मिलेगी।
- विजय कुमार, जेल अधीक्षक, जिला कारागार
अभी तक मुलाकाती व्यवस्था के तहत बंदी और कैदी अपने परिवार वालों से मिल पाता था। शासन ने अब सूबे की जेलों में बायोमैटिक पीसीओ खोले जाने की व्यवस्था की है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद बंदियों और कैदियों को घर वालों से बात करने के लिए उनके आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बंदी जेल से ही अपने घर वालों से बात कर सकेगा। शासन ने सूबे भर की जेलों में इसे लगाने का ठेका बीएसएनएल को दिया है।
इसके लिए 3.70 करोड़ रूपये भी कार्यदायी संस्था को अवमुक्त कर दिए हैं। बंदी पांच रुपये में पांच मिनट हफ्ते में और महीने में 20 मिनट ही बात कर सकेंगे।
अच्छे आचरण वाले कर सकेंगे बात
अच्छे आचरण वाले बंदियों को ही बात करने की सुविधा मिलेगी। जेल में दंडित होने वाले बंदियों को इस सुविधा से वंचित रखा जाएगा। इसके लिए बकायादा एक रजिस्टर भी मेनटेन होगा।
ऐसे काम करेंगी बायोमैट्रिक मशीन
बायोमैट्रिक मशीन में बंदी के अंगूठे का निशान और बंदी की इच्छानुसार उसके परिवार के अधिकतम दो मोबाइल नंबर फीड होंगे। बंदी के मशीन पर हाथ अंगूठा रखते ही दोनों नंबर सामने आ जाएंगे। बंदी जिस नंबर पर उंगली रखेगा। उसी पर आटोमैटिक कॉल कनेक्ट होगी। पांच मिनट पूरे होने पर कॉल स्वत: डिस्कनेक्ट हो जाएगी। कॉल डिस्कनेक्ट होते ही दो बाक्स बनकर स्क्रीन पर आएंगे। एक बाक्स में बंदी का पूरा डिटेल और दूसरे में उसकी बातचीत की रिकार्डिंग होंगी।
तीन महीने तक सुरक्षित रहेगी रिकार्डिंग
बंदी की बातचीत की आटो रिकार्डिंग तीन महीने तक सुरक्षित रहेगी। इसके बाद वह स्वत: डिलीट हो जाएगी। इस रिकार्डिंग को जरूरत पड़ने पर जेल प्रशासन सुन सकता है कि बंदी ने क्या बातें की।
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जिला कारगार में बायोमैट्रिक स्सिटम पर आधारित पीसीओ 30 अक्तूबर के पहले शुरू हो जाएगा। इसके लिए सारी कार्रवाई पूरी कर ली गई हैं। शासन से गाइड लाइन भी प्राप्त हो गई है। शासन का यह कदम काफी अच्छा है। इससे बंदियों को काफी राहत मिलेगी।
- विजय कुमार, जेल अधीक्षक, जिला कारागार