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Pilibhit News: कुपोषित बच्चों की जीवन रेखा बना एनआरसी वार्ड
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एनआरसी वार्ड में बच्चे की देखरेख करतीं चिकित्साधिकारी डाॅ. नीता सक्सेना। संवाद
पीलीभीत। जिला अस्पताल का एनआरसी (न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर) वार्ड कुपोषण से जूझ रहे बच्चों के इलाज में कारगर साबित हो रहा है। यहां जन्म से लेकर 59 सप्ताह तक के कुपोषित बच्चों को न केवल पोषणयुक्त भोजन दिया जा रहा है, बल्कि परिजनों को सही पोषण की जानकारी भी दी जा रही है। अप्रैल से अब तक वार्ड मेंं भर्ती 100 से अधिक बच्चे उचित आहार व बेहतर देखभाल मिलने से स्वस्थ होकर घर लौटे हैं।
एक अप्रैल से एक अगस्त तक वार्ड में 113 बच्चों को भर्ती किया जा चुका है। इसमें 94 बच्चे कुपोषण का हराकर पूर्ण रूप से स्वस्थ हो चुके हैं। इसमें आठ बच्चों का उपचार किया जा रहा है। छह कुपोषित बच्चों को दो दिन मेें ही ठीक किया जा चुका है। एनआरसी की चिकित्सा प्रभारी डॉ. नीता सक्सेना ने बताया कि बच्चों को नियमित पोषण युक्त आहार दिया जा रहा है। इसमें सूजी का हलवा, खिचड़ी, मुर्ररा पाउडर, नारियल का तेल, मूंगफली का पाउडर, शक्कर आदि से बनी थेरेटिक फीड दी जा रही है।
इससे बच्चों का वजन बढ़ रहा है। वार्ड में बच्चों के मनोरंजन के लिए खेल-खिलौने की भी व्यवस्था है। अगर बच्चा दो सप्ताह तक वार्ड के आहार व न्यूट्रिशियन का सेवन करेगा तो शत-प्रतिशत कुपोषण से बाहर हो जाएगा।
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दस बेड के साथ तीन अतिरिक्त की व्यवस्था
स्वास्थ्य विभाग की ओर से एनआरसी वार्ड में बच्चों की बेहतर देखभाल के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में दस बेड के संचालन के आदेश हैं। वहीं जिला अस्पताल में वार्ड ने खुद की ओर से तीन अतिरिक्त बेड की भी व्यवस्था बनाई हुई है। ताकि कुपोषित बच्चों की अगर संख्या बढ़ गई तो परिजनों को बच्चा भर्ती करने के लिए परेशानी का सामना नही करना पड़े।
इतने कर्मचारियों की है व्यवस्था
एनआरसी वार्ड में हालांकि कर्मचारियों की पर्याप्त तैनाती है। वार्ड में एक चिकित्साधिकारी, चार स्टाफ नर्स, एक डायटीशियन, एक कुक, एक सफाई कर्मी की व्यवस्था है।
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एक अप्रैल से एक अगस्त तक वार्ड में 113 बच्चों को भर्ती किया जा चुका है। इसमें 94 बच्चे कुपोषण का हराकर पूर्ण रूप से स्वस्थ हो चुके हैं। इसमें आठ बच्चों का उपचार किया जा रहा है। छह कुपोषित बच्चों को दो दिन मेें ही ठीक किया जा चुका है। एनआरसी की चिकित्सा प्रभारी डॉ. नीता सक्सेना ने बताया कि बच्चों को नियमित पोषण युक्त आहार दिया जा रहा है। इसमें सूजी का हलवा, खिचड़ी, मुर्ररा पाउडर, नारियल का तेल, मूंगफली का पाउडर, शक्कर आदि से बनी थेरेटिक फीड दी जा रही है।
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इससे बच्चों का वजन बढ़ रहा है। वार्ड में बच्चों के मनोरंजन के लिए खेल-खिलौने की भी व्यवस्था है। अगर बच्चा दो सप्ताह तक वार्ड के आहार व न्यूट्रिशियन का सेवन करेगा तो शत-प्रतिशत कुपोषण से बाहर हो जाएगा।
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दस बेड के साथ तीन अतिरिक्त की व्यवस्था
स्वास्थ्य विभाग की ओर से एनआरसी वार्ड में बच्चों की बेहतर देखभाल के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में दस बेड के संचालन के आदेश हैं। वहीं जिला अस्पताल में वार्ड ने खुद की ओर से तीन अतिरिक्त बेड की भी व्यवस्था बनाई हुई है। ताकि कुपोषित बच्चों की अगर संख्या बढ़ गई तो परिजनों को बच्चा भर्ती करने के लिए परेशानी का सामना नही करना पड़े।
इतने कर्मचारियों की है व्यवस्था
एनआरसी वार्ड में हालांकि कर्मचारियों की पर्याप्त तैनाती है। वार्ड में एक चिकित्साधिकारी, चार स्टाफ नर्स, एक डायटीशियन, एक कुक, एक सफाई कर्मी की व्यवस्था है।