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अब पूरनपुर में सदमे से किसान की मौत
पूरनपुर/पीलीभीत।
Updated Thu, 16 Apr 2015 11:35 PM IST
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बारिश में नुकसान हुई फसल
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से चिंतित गांव मुझा निवासी 58 वर्षीय किसान सरफुद्दीन की बीते नौ तारीख
को तबीयत खराब हो गई। डॉक्टरों ने उसे ब्रेन हैमरेज बताया। इलाज के लिए उसे
लखनऊ ले जाया गया। बुधवार की रात उनकी मौत हो गई। अब जिले में फसल नुकसान
के सदमे में मरने वाले किसानों की संख्या बढ़ कर 16 हो गई है।
किसान के चचेरे भाई जाबिर ने बताया कि उसके भाई सरफुद्दीन के पास 85 डिस्मिल कृषि भूमि है। ग्रामीण बड़ौदा बैंक शाखा से करीब 55 हजार रुपये लोन लेकर खेत में गेहूं की फसल की थी। नौ अप्रैल को खेत से फसल खराब देखकर लौटे सरफुद्दीन की हालत खराब हो गई और गुमसुम रहने लगे।
हालत बिगड़ती तो परिवार वालों ने जिला के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों ने उसको ब्रेन हैमरेज होने की जानकारी देकर बाहर दिखाने को कहा। फिर लखनऊ के एक प्राइवेट अस्पताल में ले गए। जहां इलाज के दौरान बुधवार रात उसकी मौत हो गई। किसान का शव घर पहुंचते ही परिवार वालों में कोहराम मच गया।
सरफुद्दीन के परिवार में पत्नी रुकसाना, सात बेटे 25 वर्षीय शमशुद्दीन, 23 वर्षीय जफर, 18 वर्षीय चन्ना, 17 वर्षीय फाजिल, 15 वर्षीय तन्नु, 13 वर्षीय आजिल, छह वर्षीय काला और दो पुत्री 27 वर्षीय शबाना, 22 वर्षीय उसना है। शबाना की शादी हो चुकी है। उसना की शादी की बात चल रही थी। गांव में राजस्वकर्मियों द्वारा मनचाहा सर्वे किए जाने के चलते सरफुद्दीन को सहायता राशि तक नहीं दी जा सकी है।
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किसान सरफुद्दीन करीब एक सप्ताह से बीमार था। उसकी बीमारी के चलते मौत हुई है। गांव में सर्वे कराया गया था। राजस्वकर्मियों द्वारा सर्वे के बाद एक सूची तैयार की गई थी। इसके आधार पर पीड़ित किसानों को पहले ही सहायता बंटवा दी गई है।
- ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, एसडीएम पूरनपुर
लेखपालों के आगे राजस्व प्रशासन फेल
बिलसंडा। बारिश से चौपट हुई फसल के मुआवजे के लिए सरकार भले ही संजीदा हो, लेकिन स्थानीय राजस्व प्रशासन गंभीर नहीं है। फसलों की बर्बादी की वजह से जहां किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हैं वहीं कुछ किसान हुए नुकसान का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन इसके बाबजूद क्षेत्र के तमाम गांव आज भी ऐसे हैं जहां पर किसानों की फसल के हुए नुकसान का सर्वे तक नहीं कराया गया। गांव माहमदपुर सिमरा निवासी कृषक रामू तिवारी, बद्रीप्रसाद दिनकर, हरीश कुमार समेत कृषकों का कहना है कि हल्का लेखपाल ने आज तक गांव में आकर नुकसान हुई फसल का सर्वे ही नहीं किया। किसानों का कहना है कि जब सर्वे ही नहीं हुआ तो मुआवजा मिलने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? कमोबेश इसी तरह क्षेत्र के अन्य गांवों की है।
सर्वे के लिए सुविधा शुल्क मांगा
पूरनपुर। गांव पिपरिया दुलई की मुन्नी देवी, हितेश कुमार, रवि कुमार सिंह, अभयराज सिंह आदि ने एसडीएम कार्यालय में दिए शिकायती पत्र में हल्का लेखपाल पर ठीक से सर्वे न करने और सर्वे के नाम पर सुविधा शुल्क मांगने का आरोप लगाया है। पत्र में नुकसान हुई फसल का मुआवजा दिलवाने की मांग की गई है।
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किसान के चचेरे भाई जाबिर ने बताया कि उसके भाई सरफुद्दीन के पास 85 डिस्मिल कृषि भूमि है। ग्रामीण बड़ौदा बैंक शाखा से करीब 55 हजार रुपये लोन लेकर खेत में गेहूं की फसल की थी। नौ अप्रैल को खेत से फसल खराब देखकर लौटे सरफुद्दीन की हालत खराब हो गई और गुमसुम रहने लगे।
हालत बिगड़ती तो परिवार वालों ने जिला के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों ने उसको ब्रेन हैमरेज होने की जानकारी देकर बाहर दिखाने को कहा। फिर लखनऊ के एक प्राइवेट अस्पताल में ले गए। जहां इलाज के दौरान बुधवार रात उसकी मौत हो गई। किसान का शव घर पहुंचते ही परिवार वालों में कोहराम मच गया।
सरफुद्दीन के परिवार में पत्नी रुकसाना, सात बेटे 25 वर्षीय शमशुद्दीन, 23 वर्षीय जफर, 18 वर्षीय चन्ना, 17 वर्षीय फाजिल, 15 वर्षीय तन्नु, 13 वर्षीय आजिल, छह वर्षीय काला और दो पुत्री 27 वर्षीय शबाना, 22 वर्षीय उसना है। शबाना की शादी हो चुकी है। उसना की शादी की बात चल रही थी। गांव में राजस्वकर्मियों द्वारा मनचाहा सर्वे किए जाने के चलते सरफुद्दीन को सहायता राशि तक नहीं दी जा सकी है।
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किसान सरफुद्दीन करीब एक सप्ताह से बीमार था। उसकी बीमारी के चलते मौत हुई है। गांव में सर्वे कराया गया था। राजस्वकर्मियों द्वारा सर्वे के बाद एक सूची तैयार की गई थी। इसके आधार पर पीड़ित किसानों को पहले ही सहायता बंटवा दी गई है।
- ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, एसडीएम पूरनपुर
लेखपालों के आगे राजस्व प्रशासन फेल
बिलसंडा। बारिश से चौपट हुई फसल के मुआवजे के लिए सरकार भले ही संजीदा हो, लेकिन स्थानीय राजस्व प्रशासन गंभीर नहीं है। फसलों की बर्बादी की वजह से जहां किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हैं वहीं कुछ किसान हुए नुकसान का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन इसके बाबजूद क्षेत्र के तमाम गांव आज भी ऐसे हैं जहां पर किसानों की फसल के हुए नुकसान का सर्वे तक नहीं कराया गया। गांव माहमदपुर सिमरा निवासी कृषक रामू तिवारी, बद्रीप्रसाद दिनकर, हरीश कुमार समेत कृषकों का कहना है कि हल्का लेखपाल ने आज तक गांव में आकर नुकसान हुई फसल का सर्वे ही नहीं किया। किसानों का कहना है कि जब सर्वे ही नहीं हुआ तो मुआवजा मिलने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? कमोबेश इसी तरह क्षेत्र के अन्य गांवों की है।
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सर्वे के लिए सुविधा शुल्क मांगा
पूरनपुर। गांव पिपरिया दुलई की मुन्नी देवी, हितेश कुमार, रवि कुमार सिंह, अभयराज सिंह आदि ने एसडीएम कार्यालय में दिए शिकायती पत्र में हल्का लेखपाल पर ठीक से सर्वे न करने और सर्वे के नाम पर सुविधा शुल्क मांगने का आरोप लगाया है। पत्र में नुकसान हुई फसल का मुआवजा दिलवाने की मांग की गई है।
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