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अब एसटीपी और ईटीपी लगाए बिना नहीं चला सकेंगे अस्पताल, 15 अस्पतालों को नोटिस
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पीलीभीत। स्वास्थ्य विभाग ने प्राइवेट अस्पतालों और नर्सिगहोमों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इन अस्पतालों में अब एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और ईटीपी (एफ्युलेंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्राइवेट अस्पतालों को नोटिस जारी कर सात दिन के अंदर एसटीपी और ईटीपी प्लांट लगाने के निर्देश दिए हैं। ऐसा न करने पर इन अस्पतालों का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही अस्पताल संचालकों पर सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
जनपद में करीब 70 से अधिक प्राइवेट अस्पताल और नर्सिंगहोमों का संचालन किया जा रहा है। अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था जनपद में नहीं है। इसकेे लिए अन्य जनपदों की दो कंपनियों को बायोमेडिकल वेस्ट उठाने का ठेका दिया गया है। इधर बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर शासन काफी सख्ती बरत रहा है। एनजीटी की सख्ती के बाद शासन ने गत वर्ष दिसंबर में 10 बेड वाले प्रत्येक अस्पताल और नर्सिगहोम में एसटीपी और ईटीपी प्लांट लगाने के निर्द,ेश दिए थे। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के दस बेड वाले अस्पतालों को नोटिस भेजकर दोनों प्लांट लगाने के निर्देश दिए।
इधर, अब शासन ने सभी प्राइवेट अस्पताल और नर्सिंगहोमों में एसटीपी और ईटीपी प्लाट लगाना अनिवार्य कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने भी इसको लेकर प्राइवेट अस्पतालों और नर्सिगहोम पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने अभी 15 निजी अस्पतालों को नोटिस भेजकर एसटीपी और ईटीपी प्लांट लगाने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में सप्ताह भर के भीतर प्लांट न लगाने पर अस्पताल का पंजीकरण नहीं किया जाएगा। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भी सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा।
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किसी भी जगह हो सकता है संक्रमण का खतरा
अस्पतालों से निकलने वाली तरल चीजों में ढेरों संक्रामक तत्व होते हैं। इससे भूमिगत जल संक्रमित होता है। इसके संपर्क में आने से अन्य तरह के संक्रमण का भी खतरा बढ़ जाता है। आम लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए ईटीपी और एसटीपी प्लांट लगाने के आदेश दिए हैं। लिक्विड वेस्ट में बैक्टीरिया और केमिकल होते हैं। यह अस्पतालों से नालों में पहुंचता है और अंत में कहीं-कहीं पेयजलस्रोतों में मिलता है। ऐसे दूषित पानी के पीने से पेट, स्किन, और कैंसर जैसी बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।
शासन के निर्देशानसुार सभी अस्पतालों और नर्सिगहोम में ईटीपी और एसटीपी प्लांट लगने हैं। इसको लेकर अब तक 15 अस्पतालों को नोटिस दिए जा चुके हैं। प्लांट न लगाने पर संबंधित अस्पताल का पंजीकरण नहीं किया जाएगा।
- डॉ. हरपाल सिंह, एसीएमओ/ नोडल अधिकारी
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जनपद में करीब 70 से अधिक प्राइवेट अस्पताल और नर्सिंगहोमों का संचालन किया जा रहा है। अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था जनपद में नहीं है। इसकेे लिए अन्य जनपदों की दो कंपनियों को बायोमेडिकल वेस्ट उठाने का ठेका दिया गया है। इधर बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर शासन काफी सख्ती बरत रहा है। एनजीटी की सख्ती के बाद शासन ने गत वर्ष दिसंबर में 10 बेड वाले प्रत्येक अस्पताल और नर्सिगहोम में एसटीपी और ईटीपी प्लांट लगाने के निर्द,ेश दिए थे। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के दस बेड वाले अस्पतालों को नोटिस भेजकर दोनों प्लांट लगाने के निर्देश दिए।
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इधर, अब शासन ने सभी प्राइवेट अस्पताल और नर्सिंगहोमों में एसटीपी और ईटीपी प्लाट लगाना अनिवार्य कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने भी इसको लेकर प्राइवेट अस्पतालों और नर्सिगहोम पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने अभी 15 निजी अस्पतालों को नोटिस भेजकर एसटीपी और ईटीपी प्लांट लगाने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में सप्ताह भर के भीतर प्लांट न लगाने पर अस्पताल का पंजीकरण नहीं किया जाएगा। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भी सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा।
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किसी भी जगह हो सकता है संक्रमण का खतरा
अस्पतालों से निकलने वाली तरल चीजों में ढेरों संक्रामक तत्व होते हैं। इससे भूमिगत जल संक्रमित होता है। इसके संपर्क में आने से अन्य तरह के संक्रमण का भी खतरा बढ़ जाता है। आम लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए ईटीपी और एसटीपी प्लांट लगाने के आदेश दिए हैं। लिक्विड वेस्ट में बैक्टीरिया और केमिकल होते हैं। यह अस्पतालों से नालों में पहुंचता है और अंत में कहीं-कहीं पेयजलस्रोतों में मिलता है। ऐसे दूषित पानी के पीने से पेट, स्किन, और कैंसर जैसी बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।
शासन के निर्देशानसुार सभी अस्पतालों और नर्सिगहोम में ईटीपी और एसटीपी प्लांट लगने हैं। इसको लेकर अब तक 15 अस्पतालों को नोटिस दिए जा चुके हैं। प्लांट न लगाने पर संबंधित अस्पताल का पंजीकरण नहीं किया जाएगा।
- डॉ. हरपाल सिंह, एसीएमओ/ नोडल अधिकारी