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बाघों को ही नहीं, विदेशी परिंदों को भा रही टाइगर रिजर्व की फिजा

Fri, 11 Dec 2020 01:44 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 11 Dec 2020 01:44 AM IST
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Not only tigers, but foreign birds are enjoying the tiger reserve
पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व की आबोहवा पक्षियों को खासी रास आ रही है। खास बात यह है कि अब यहां विदेशी पक्षियों की प्रजातियां भी देखी गई हैं। बावजूद इसके यहां पक्षियों के संरक्षण से संबंधित कोई इंतजाम नहीं हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि यही स्थिति रही तो कुछ सालों बाद यहां विदेशी स्तर के पक्षियों की चहचहाहट खत्म हो जाएगी।
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पीलीभीत का जंगल मात्र बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रजाति के पक्षियों के लिए भी जाना जाता है। टाइगर रिजर्व के आंकड़ों के मुताबिक, पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में पक्षियों की लगभग 326 प्रजातियां पाई जाती हैं। पीटीआर के लिए यह बड़ी उपलब्धि की बात है, मगर इन सबके बीच पक्षियों के संरक्षण को लेकर यहां कभी कोई प्रयास नहीं किए गए। विशेषज्ञों के मुताबिक, बदलती जलवायु, वास स्थलों में कमी और मानवीय हस्तक्षेप के चलते पक्षियों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
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टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी के अख्तर मियां खान के मुताबिक, यहां विदेशी स्तर के कुछ ऐसे पक्षियों की प्रजातियां मौजूद हैं जो शेड्यूल वन से भी ऊपर हैं। सात समंदर पार से साइबेरियन पक्षी भी बड़ी संख्या में शारदा सागर डैम और बिलसंडा के पसगवां जलाशय में आते हैं और करीब तीन माह के विचरण के बाद यहां से लौट जाते हैं।
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पूर्व वन राज्यमंत्री के आदेश को नहीं मिली तवज्जो
माना जा रहा था कि टाइगर रिजर्व बनने के बाद यहां के जंगलों में पक्षियों की प्रजातियों को तवज्जो मिलेगी, मगर ऐसा नहीं हुआ। तत्कालीन सपा सरकार के वन राज्यमंत्री रहे फरीद महमूद किदवई ने बाइफरकेशन में पक्षियों के संबंधित एक कार्यक्रम के दौरान यहां के जंगलों में पक्षियों के संरक्षण को लेकर ठोस कदम उठाने की बात कही थी, मगर सरकार जाने के बाद जिम्मेदारों ने मामला ही दबा दिया।
इनसे कारणों से पक्षियों पर मंडरा रहा खतरा
अख्तर मियां खान ने बताया कि यहां जिस स्तर के पक्षियों की प्रजातियां देखी जा रही हैं, उसके चलते यहां पक्षी संरक्षण के इंतजाम होना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि कई ऐसे कारण हैं जिनसे इन पक्षियों पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं। इनमें जंगलों में फायर सीजन के दौरान आग लगाने, ग्लोबल वार्मिंग, वास स्थलों पर मानवीय हस्तक्षेप, सुरक्षा के इंतजाम न होना समेत कई अन्य कारण हैं। बेहतर होगा कि बाघों के साथ इन पक्षियों के संरक्षण का भी ध्यान दिया जाए।

ये हैं विदेशी स्तर के पक्षियों की प्रजातियां
- बंगाल फ्लोरिकन
- स्वांप फ्रानकोलिन
- स्लेटी बुडपैकर
- ग्रास आउल
- वल्चर की सात प्रजातियां
ग्रास लैंड मैनेजमेंट से बदल सकती है तस्वीर
टाइगर रिजर्व में वास स्थलों की कमी के चलते पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच रही हैं। ग्रासलैंड मैनेजमेंट को फॉलो कर पक्षियों का संरक्षण किया जा सकता है। यदि सरकार टाइगर रिजर्व में पक्षियों के संरक्षण पर ध्यान दे तो यहां पर्यटन की तस्वीर बदल सकती है।
- टीएच खान, पर्यावरणविद्
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