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नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट अब नहीं बनेगा रोड़ा, पीटीआर ने दिखाई हरी झंडी

Wed, 08 Jun 2022 12:54 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jun 2022 12:54 AM IST
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NOC will no longer become a hindrance, PTR has shown the green signal
पीलीभीत। मैलानी रेलखंड पर वर्षों से रेलवे और पीटीआर के बीच चल एनओसी को लेकर समस्या, अब दूर हो गई है। जंगल क्षेत्र में पीटीआर ने शर्तों के साथ ब्रॉडगेज के काम को करने की अनुमति दे दी है। इसमें पांच अंडरपास बनेंगे। ट्रेन की स्पीड जंगल क्षेत्र में अधिकतम 30 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। अब तेजी के साथ काम पूरा हो सकेगा।
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लखनऊ रूट के मैलानी रेल खंड पर 2012 में आमान परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। 62 किलोमीटर लंबे इस रूट पर 88 करोड़ की लागत से काम पूरा करने का जिम्मा कार्यदायी संस्था रेल विकास निगम लिमिटेड को दिया गया था। प्रक्रिया पूरी होने के बाद आमान परिवर्तन के लिए 31 मई 2018 में मीटरगेज की ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया। इसके बाद एक जून 2018 से आमान परिवर्तन का काम शुरू कर दिया गया। जिसका 18 माह में काम पूरा करने का जिम्मा संस्था को दिया गया। काम गति पकड़ पाता, इससे पहले ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल क्षेत्र में ब्रॉडगेज की पटरिया डालने के लिए आपत्ति लग गई। जबकि नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के 2012 में ही संस्था की ओर से आवेदन कर दिया गया था। इसके बाद भी पीटीआर की ओर से अनुमति नहीं दी जा सकी। इससे काम रुक गया। बाद में कार्यदायी संस्था ने जंगल क्षेत्र के बाहरी हिस्से में शाहगढ़ से मैलानी के बीच में काम शुरू कर दिया। जो पूरा होने के बाद सीआरएस निरीक्षण भी हो चुका है।
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शाहगढ़-पीलीभीत के बीच आठ किलोमीटर में जंगल क्षेत्र है। इसमें एनओसी को लेकर पीटीआर और रेलवे का संयुक्त सर्वे किया। सर्वे में काम को लेकर पीटीआर की सहमति मिल गई थी, मगर कुछ अटकलें रह गईं थी। इससे काम शुरू नहीं हो सका। अब पीअीआर की ओर से शाहगढ़ और पीलीभीत के बीच आमान परिवर्तन के काम को हरी झंडी दे दी गई है। इसमें आठ किलोमीटर के जंगल में पांच अंडरपास, तार फेंसिंग, 20 से 30 तक ट्रेन की स्पीड पर सहमति बनी है।
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अब बारिश बन सकती है रोड़ा
पीटीआर से हरी झंडी मिलने के बाद भले ही आमान परितर्वन का काम शुरू होने के कयास लगाए जा रहे हों, मगर 15 जून से मानसून आ जाएगा। बारिश के मौसम में मिट्टी का कार्य नहीं हो पाएगा। कुछ माह के लिए अब बारिश रोड़ा बन सकती है।

रेलवे को जंगल में आमान परिवर्तन के लिए एनओसी दे दी गई है। कुछ मानक तय किए गए हैं। अब पीटीआर प्रशासन की ओर से काम को लेकर कोई रोकटोक रेलवे के लिए नहीं है।
- नवीन खंडेलवाल, उप निदेशक, पीटीआर
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