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चीनी मिल नहीं, शासन की कमी से लटका भुगतान
पीलीभीत, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 27 Jul 2016 11:13 PM IST
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बकाया गन्ना मूल्य भुगतान में देरी पर जिला गन्ना अधिकारी (डीसीओ) की ओर से ललित हरि चीनी मिल को जारी नोटिस पर मिल प्रबंधन ने पलटवार किया है। मिल के एचआर हेड आशीष गुप्ता ने यह स्वीकार किया है कि मिल पर किसानों का 3053.27 लाख रूपया बकाया है लेकिन इसके लिए मिल नहीं बल्कि शासन जिम्मेदार है। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार यदि मिल के लिए विद्युत कॉरपोरेशन को बेची गई बिजली की धनराशि के साथ-साथ समिति कमीशन की प्रतिपूर्ति और केंद्र सरकार से सब्सिडी की धनराशि दे दे तो किसानों का पूरा भुगतान हो जाएगा।
आशीष गुप्ता ने बताया कि पेराई सत्र 2015-16 में एलएच शुगर फैक्ट्री ने कुल 109.48 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद की। इसका कुल वाजिब गन्ना मूल्य 30642.32 लाख रुपये होता है। शासनादेश के अनुसार गन्ना मूल्य भुगतान की प्रथम किस्त 230 रूपये प्रति क्विंटल की दर से पेराई सत्र समापन तक नियमानुसार भुगतान कर दिया गया था। शेष भुगतान के सापेक्ष 22 रुपये प्रति क्विंटल शासन द्वारा निर्धारित तीन माह की अवधि में भुगतान कर दिया गया। उन्होंने बताया कि अब चीनी मिल पर शेष अंतर का मात्र 3053.27 लाख रुपये गन्ना मूल्य बाकी है।
उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित मिल ने पॉवर कॉरपोरेशन को 2185.82 लाख रुपये की बिजली दी है। इसका भुगतान अभी तक शासन से प्राप्त नहीं हो सका है। इसी तरह समिति कमीशन की करीब 327.70 लाख रुपये प्रतिपूर्ति और भारत सरकार से 490.00 लाख रुपये सब्सिडी मिलना बाकी है। इस प्रकार इन तीनों मदों से मिल को 3003.52 लाख रुपये मिलना है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र लिख भुगतान की मांग की जा चुकी है। यह भी बताया गया है कि उक्त धनराशि की मांग किए जाने संबंधी भेजे पत्र में स्पष्ट तौर पर यह भी लिखा गया है कि संबंधित भुगतान गन्ना किसानों को दिया जाना है, लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं मिल सका है। उन्होंने बताया कि हाल ही में गन्ना आयुक्त को पत्र लिख कर उक्त बकाया धनराशि को जिला गन्ना अधिकारी और चीनी मिल के संयुक्त खाते में भेजने का भी अनुरोध किया जा चुका है। जिससे इस धनराशि का संपूर्ण उपयोग गन्ना मूल्य भुगतान में किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस तरह साफ है कि गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर चीनी मिल की कोई शिथिलता नहीं है, लंबित भुगतान मात्र शासन से धन प्राप्त न होने के कारण ही है। उन्होंने कहा कि यह चीनी मिल हमेशा किसानों के विश्वासों पर खरी उतरी है। यह मिल किसान हित में समय से भुगतान करती रही है और आगे भी करती रहेगी।
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आशीष गुप्ता ने बताया कि पेराई सत्र 2015-16 में एलएच शुगर फैक्ट्री ने कुल 109.48 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद की। इसका कुल वाजिब गन्ना मूल्य 30642.32 लाख रुपये होता है। शासनादेश के अनुसार गन्ना मूल्य भुगतान की प्रथम किस्त 230 रूपये प्रति क्विंटल की दर से पेराई सत्र समापन तक नियमानुसार भुगतान कर दिया गया था। शेष भुगतान के सापेक्ष 22 रुपये प्रति क्विंटल शासन द्वारा निर्धारित तीन माह की अवधि में भुगतान कर दिया गया। उन्होंने बताया कि अब चीनी मिल पर शेष अंतर का मात्र 3053.27 लाख रुपये गन्ना मूल्य बाकी है।
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उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित मिल ने पॉवर कॉरपोरेशन को 2185.82 लाख रुपये की बिजली दी है। इसका भुगतान अभी तक शासन से प्राप्त नहीं हो सका है। इसी तरह समिति कमीशन की करीब 327.70 लाख रुपये प्रतिपूर्ति और भारत सरकार से 490.00 लाख रुपये सब्सिडी मिलना बाकी है। इस प्रकार इन तीनों मदों से मिल को 3003.52 लाख रुपये मिलना है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र लिख भुगतान की मांग की जा चुकी है। यह भी बताया गया है कि उक्त धनराशि की मांग किए जाने संबंधी भेजे पत्र में स्पष्ट तौर पर यह भी लिखा गया है कि संबंधित भुगतान गन्ना किसानों को दिया जाना है, लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं मिल सका है। उन्होंने बताया कि हाल ही में गन्ना आयुक्त को पत्र लिख कर उक्त बकाया धनराशि को जिला गन्ना अधिकारी और चीनी मिल के संयुक्त खाते में भेजने का भी अनुरोध किया जा चुका है। जिससे इस धनराशि का संपूर्ण उपयोग गन्ना मूल्य भुगतान में किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस तरह साफ है कि गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर चीनी मिल की कोई शिथिलता नहीं है, लंबित भुगतान मात्र शासन से धन प्राप्त न होने के कारण ही है। उन्होंने कहा कि यह चीनी मिल हमेशा किसानों के विश्वासों पर खरी उतरी है। यह मिल किसान हित में समय से भुगतान करती रही है और आगे भी करती रहेगी।
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