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सतर्क हए लोग, जंगल क्षेत्र में 13 किलोमीटर तारफेसिंग, वर्ष 2018 से नहीं हुई मानव-वन्य जीव संघर्ष की कोई घटना
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पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या के साथ ही मानव और वन्यजीव के बीच संघर्ष की घटनाएं भी हुईं। वर्ष 2014 से 2018 तक 34 लोग बाघ हमले में जान गंवा चुके हैं। जबकि 17 बाघ भी मौत के शिकार हुए हैं। इसके कारण अलग अलग हैं। अच्छी बात यह है कि पिछले दो वर्षों में जंगल से बाहर बाघ के हमले में कमी आई। ग्रामीण भी जागरूक हुए हैं।
जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद बाघों के संरक्षण और संवर्धन को लेकर प्रयास शुरू किए जाने लगे लेकिन मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष रोकने के लिए अहम कदम नहीं उठाए गए। नतीजा यह निकला कि वर्ष 2014 से वर्ष 2018 तक मानव वन्य जीव संघर्ष की ताबड़तोड़ घटनाएं हुईं। घटनाओं के बाद विभागीय अधिकारी भी गंभीर हुए। सांसद निधि के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों में जंगल सीमा पर तार फेंसिंग की गई।
वहीं आबादी क्षेत्र के निकट बाघों की चहल कदमी और हमलों की स्थिति से सीख लेकर ग्रामीण भी जागरूक होने लगे। नतीजा यह निकला कि जंगल से बाहर बाघों की चहलकदमी तो बनी रही लेकिन हमले की घटनाएं कम होने लगीं।
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पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल का कहना है कि मानव वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित माला क्षेत्र में 13 किलोमीटर दायरे में तार फेंसिंग कराई गई। अब 50 किलोमीटर इलाके में तार फेंसिंग कराने का कार्य भी जल्द शुरू कर दिया जाएगा। जंगल से बाहर वन्यजीवों की मौजूदगी को रोकने के प्रयास जारी हैं ताकि मानव वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा ना हो सके।
अमरिया में है बाघों का कुनबा पर नहीं है हमलावर
पीलीभीत। वर्ष 2021 पिछले साल जंगल से बाहर निकल कर आया बाघ कलीनगर और माधोटांडा के अलावा हरदोई ब्रांच नहर पर एक माह तक डेरा जमाए रहा। विभाग की ओर से निगरानी की गई लेकिन हमले की कोई घटना सामने नहीं आई। इसके अलावा अमरिया तहसील क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से बाघों का कुनबा आबादी क्षेत्र में शरण लिए हुए हैं। कुनबे को शिफ्ट करने के लिए विभाग की ओर से प्रयास किए गए लेकिन अभी तक कोई अमल नहीं हो सका।
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जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद बाघों के संरक्षण और संवर्धन को लेकर प्रयास शुरू किए जाने लगे लेकिन मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष रोकने के लिए अहम कदम नहीं उठाए गए। नतीजा यह निकला कि वर्ष 2014 से वर्ष 2018 तक मानव वन्य जीव संघर्ष की ताबड़तोड़ घटनाएं हुईं। घटनाओं के बाद विभागीय अधिकारी भी गंभीर हुए। सांसद निधि के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों में जंगल सीमा पर तार फेंसिंग की गई।
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वहीं आबादी क्षेत्र के निकट बाघों की चहल कदमी और हमलों की स्थिति से सीख लेकर ग्रामीण भी जागरूक होने लगे। नतीजा यह निकला कि जंगल से बाहर बाघों की चहलकदमी तो बनी रही लेकिन हमले की घटनाएं कम होने लगीं।
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पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल का कहना है कि मानव वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित माला क्षेत्र में 13 किलोमीटर दायरे में तार फेंसिंग कराई गई। अब 50 किलोमीटर इलाके में तार फेंसिंग कराने का कार्य भी जल्द शुरू कर दिया जाएगा। जंगल से बाहर वन्यजीवों की मौजूदगी को रोकने के प्रयास जारी हैं ताकि मानव वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा ना हो सके।
अमरिया में है बाघों का कुनबा पर नहीं है हमलावर
पीलीभीत। वर्ष 2021 पिछले साल जंगल से बाहर निकल कर आया बाघ कलीनगर और माधोटांडा के अलावा हरदोई ब्रांच नहर पर एक माह तक डेरा जमाए रहा। विभाग की ओर से निगरानी की गई लेकिन हमले की कोई घटना सामने नहीं आई। इसके अलावा अमरिया तहसील क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से बाघों का कुनबा आबादी क्षेत्र में शरण लिए हुए हैं। कुनबे को शिफ्ट करने के लिए विभाग की ओर से प्रयास किए गए लेकिन अभी तक कोई अमल नहीं हो सका।