फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   No sturggle bitween huaman and wild animal since 2018

सतर्क हए लोग, जंगल क्षेत्र में 13 किलोमीटर तारफेसिंग, वर्ष 2018 से नहीं हुई मानव-वन्य जीव संघर्ष की कोई घटना

Thu, 03 Mar 2022 12:50 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 12:50 AM IST
विज्ञापन
No sturggle bitween huaman and wild animal since 2018
पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या के साथ ही मानव और वन्यजीव के बीच संघर्ष की घटनाएं भी हुईं। वर्ष 2014 से 2018 तक 34 लोग बाघ हमले में जान गंवा चुके हैं। जबकि 17 बाघ भी मौत के शिकार हुए हैं। इसके कारण अलग अलग हैं। अच्छी बात यह है कि पिछले दो वर्षों में जंगल से बाहर बाघ के हमले में कमी आई। ग्रामीण भी जागरूक हुए हैं।
विज्ञापन

जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद बाघों के संरक्षण और संवर्धन को लेकर प्रयास शुरू किए जाने लगे लेकिन मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष रोकने के लिए अहम कदम नहीं उठाए गए। नतीजा यह निकला कि वर्ष 2014 से वर्ष 2018 तक मानव वन्य जीव संघर्ष की ताबड़तोड़ घटनाएं हुईं। घटनाओं के बाद विभागीय अधिकारी भी गंभीर हुए। सांसद निधि के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों में जंगल सीमा पर तार फेंसिंग की गई।
विज्ञापन

वहीं आबादी क्षेत्र के निकट बाघों की चहल कदमी और हमलों की स्थिति से सीख लेकर ग्रामीण भी जागरूक होने लगे। नतीजा यह निकला कि जंगल से बाहर बाघों की चहलकदमी तो बनी रही लेकिन हमले की घटनाएं कम होने लगीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल का कहना है कि मानव वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित माला क्षेत्र में 13 किलोमीटर दायरे में तार फेंसिंग कराई गई। अब 50 किलोमीटर इलाके में तार फेंसिंग कराने का कार्य भी जल्द शुरू कर दिया जाएगा। जंगल से बाहर वन्यजीवों की मौजूदगी को रोकने के प्रयास जारी हैं ताकि मानव वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा ना हो सके।

अमरिया में है बाघों का कुनबा पर नहीं है हमलावर
पीलीभीत। वर्ष 2021 पिछले साल जंगल से बाहर निकल कर आया बाघ कलीनगर और माधोटांडा के अलावा हरदोई ब्रांच नहर पर एक माह तक डेरा जमाए रहा। विभाग की ओर से निगरानी की गई लेकिन हमले की कोई घटना सामने नहीं आई। इसके अलावा अमरिया तहसील क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से बाघों का कुनबा आबादी क्षेत्र में शरण लिए हुए हैं। कुनबे को शिफ्ट करने के लिए विभाग की ओर से प्रयास किए गए लेकिन अभी तक कोई अमल नहीं हो सका।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed