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भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पिलर 20 से 22 के बीच बसी है नेपाली आबादी, बढ़ सकता है विवाद

Mon, 15 Jun 2020 12:42 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, माधोटांडा (पीलीभीत)
संवाद न्यूज एजेंसी, माधोटांडा (पीलीभीत) Published by: बरेली ब्यूरो Updated Mon, 15 Jun 2020 12:42 PM IST
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Pillar 20 to 22 on Indo Nepal international border occupied by Nepali population may leads to increase controversy
भारत नेपाल सीमा (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

भारत-नेपाल सीमा पर नोमेंस लैंड में अवैध कब्जा दोनों देशों के लिए सीमा विवाद को और बढ़ा सकता है। दोनों देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमा के पिलर संख्या 20 से लेकर 22 के बीच नेपाली नागरिकों ने नोमैंस लैंड पर कब्जा करके अपने घर बना रखे हैं। इसे लेकर दोनों देशों के अफसरों की कई बार बैठकें भी हुईं, मगर विवाद नहीं सुलझा। 

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ताजा हालात में यह मुद्दा गरम होने पर दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ सकता है। पड़ोसी देश नेपाल का अब तक हमारे मित्र देशों शुमार था। पिछले कुछ दिनों से नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार ने भारत के कुछ क्षेत्रों पर अपना दावा करते हुए अपने देश के नक्शों में शामिल कर लिया। 
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इससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। हाल ही में बिहार के सीतामढ़ी में भारत-नेपाल सीमा पर काम करने वाले श्रमिकों पर नेपाल की सेना ने फायरिंग कर दी। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए। पीलीभीत में भारत-नेपाल सीमा पर नोमेंस लैंड पर नेपाली नागरिकों ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर रखा है। 
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इसे हटाने के लिए पूर्व में कई बार दोनों देशों के सीमावर्ती जनपदों के अफसरों की बैठकें भी होती रही हैं। मगर, समस्या का समाधान नहीं हो सका। पिछले दिनों सर्वे ऑफ इंडिया और सर्वे ऑफ नेपाल ने कई स्थानों पर सीमा क्षेत्र का मूल्यांकन कर सर्वे शुरू किया था। 

इसमें कहीं नेपाल की जमीन भारत, तो कहीं भारत की जमीन नेपाली क्षेत्र में आ रही थी। यह समस्या अंतरराष्ट्रीय पिलर एक दूसरे से अधिक दूरी पर लगने के कारण थी। सर्वे करने वाली टीमों ने अंतरराष्ट्रीय पिलर के बीच में सब पिलर भी लगाने शुरू किए थे। 

नियमानुसार नोमैंस लैंड के आसपास कोई आबादी नहीं होनी चाहिए। तीन माह पहले नेपाली नागरिकों ने नोमैंस लैंड पर भारतीय क्षेत्र में सड़क बनाने को पत्थर और बजरी भी डाल दी थी। मामला सामने आने पर एसएसबी जवानों ने पत्थर और बजरी हटवा दिया था, मगर यह कभी भी दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ा सकता है।

थाना हजारा क्षेत्र में सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से स्थापित सब पिलर में से एक पिलर को नेपाली नागरिकों ने क्षतिग्रस्त कर दिया था। तब एसएसबी जवानों ने थाना हजारा में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। हालांकि, बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। 

नेपाली अपनी जमीन बताकर कर चुके हैं नारेबाजी

नेपाल विपक्षी दलों के नेताओं ने पिछले कुछ वर्षों में नेपाली नागरिकों के साथ अंतरराष्ट्रीय पिलर 20 और 21 के बीच भारत विरोधी नारेबाजी कर उसे अपनी जमीन बताते हुए काला पानी तक कूच किया था। 

यह मामला उस दौरान खासा सुर्खियों में रहा था। अब फिर सीमा विवाद की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। मगर, स्थानीय स्तर पर अफसर इस मामले में टिप्पणी करने से बच रहे हैं।

जिलाधिकारी चंपावत एवं नोडल अधिकारी (नोमेंस लैंड), सुरेंद्र नारायण पांडेय ने कहा कि नेपाल सीमा के मामले सुलझाने के लिए जनवरी में बैठक हुई थी। इसमें चार जनपद चंपावत, ऊधमसिंह नगर, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी के अफसर शामिल हुए थे। उसके बाद लॉकडाउन लग गया। अब नेपाल सीमा पर कहीं विवाद है तो संबंधित जनपद के प्रशासनिक अफसर ही उस पर निर्णय लेंगे।

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