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Pilibhit News: मंडी में न किसान और न धान, सिर्फ कागजों में बढ़ रही खरीद

Tue, 28 Nov 2023 11:03 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 28 Nov 2023 11:03 PM IST
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Neither farmers nor paddy in the market, purchases increasing only on paper
मंडी में सूना पड़ा धान खरीद केंद्र । संवाद
महज 28 दिन में 2.88 से बढ़कर खरीद हो गई 15 फीसदी
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संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। धान खरीद का लक्ष्य बढ़ाने के लिए लगता है अफसरों ने कोई जादू सीख लिया है। हैं। यही कारण है कि एकाएक धान खरीद के आंकड़ों में जबरदस्त उछाल आ गया है। जो खरीद 26 अक्तूबर तक महज 2.88 फीसदी थी। वह अब 28 दिनों में अचानक बढ़कर एकाएक 15 फीसदी हो गई है। यह हाल तब है जब इन 28 दिनों में सात दिन अवकाश के थे तो मंडी में न तो किसान दिखाई दे रहे थे और न ही धान।
जिले में सरकार के आदेश के तहत पहली अक्तूबर से धान खरीद शुरू होनी थी। अवकाश होने के कारण यह खरीद तीन अक्तूबर से 161 केंद्रों पर शुरू कराई गई। शासन की ओर से इस बार खरीद का लक्ष्य तीन लाख मीट्रिक टन दिया गया।
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शुरुआती दौर में केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहा जबकि आढ़तों पर धान की जमकर खरीद हुई। दस अक्तूबर के बाद से कुछ सेंटरों पर खरीद होती दिखी। अक्तूबर में जब धान बेचा जाता है तब पूरे माह खरीद का आंकड़ा तीन प्रतिशत पार नहीं कर सका।
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नवंबर के पहले सप्ताह तक खरीद महज पांच प्रतिशत ही हो सकी। मंडी में धान और किसान का हाल देखकर लग रहा था कि इस बार आंकड़ा दस प्रतिशत भी पार नहीं हो सकेगा। इसके बाद दीपावली की भी छुट्टियां पड़ गईं। इसके बाद केंद्रों पर धान आना बंद हो गया।
इक्का-दुक्का किसान ही केंद्रों पर दिखे। खुद कृषि अधिकारी विनोद यादव ने बताया कि 90 प्रतिशत से ज्यादा धान कट चुका है। 65 से 70 प्रतिशत किसानों ने तो खेतों में गेहूं की बुआई तक कर दी है। इतना ही नहीं हाल ही में निरीक्षण को पीलीभीत मंडी में पहुंचे पीसीयू के एमडी श्रीकांत गोस्वामी को भी केंद्रों पर सन्नाटा मिला।
इधर, अफसरों ने ऐसी जादुई छड़ी घुमाई कि मंडी और केंद्रों पर धान न होने के बाद भी 23 नवंबर तक जिले में हर एजेंसी ने 28 दिनों में दोगुनी खरीद कर ली। धान खरीद का आंकड़ा 2.88 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत पहुंच गया।

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नमी के सीजन में हो रही धान खरीद
धान खरीद केंद्रों का नियम है कि अगर धान में 17 प्रतिशत तक नमी है तो ही वे खरीदेंगे। इससे ज्यादा नमी निकलने पर वह धान को सूखा कर लाने को कहते हैं। अक्तूबर में मौसम ठीक रहता है। नवंबर में अब जहां कोहरा पड़ रहा है। धूप भी नहीं निकल रही ऐसे में धान में नमी ज्यादा है। लेकिन सरकारी आंकड़ों से साफ है कि अब धान में नमी नहीं है। ऐसे में अफसरों का खरीद का यह खेल किसी की समझ में नहीं आ रहा है।



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आंकड़े एक नजर में (मीट्रिक टन में)
26 अक्तूबर तक 23 नवंबर तक
खाद्य विभाग 35,13.24 1,30,85.60
पीसीएफ 19,12.93 1,03,55.95
यूपीएसएस 13,47.61 9,195.17
पीसीयू 16,23.30 9,459.22
मंडी समिति 165.08 903.90
भाखानि 63.76 123.08
कुल 86,25.92 43,122. 91
प्रतिशत 2.88 15.00
00
यह है 23 नवंबर तक भुगतान का आंकड़ा (करोड़ में)
खाद्य विभाग- 22.21

पीसीएफ- 18.38
यूपीएसएस- 14.08

पीसीयू- 11.86
मंडी समिति-15.52

भाखानि- 26.87 लाख
00
पूरी पारदर्शिता के साथ धान खरीद की जा रही है। गड़बड़ी करने वाले केंद्र प्रभारियों पर कार्रवाई भी हो रही है।
- वीके शुक्ला, डिप्टी आरएमओ
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पिछले साल भी हुआ था धान खरीद में खेल



धान खरीद का आंकड़ा बढ़ाने का खेल इस बार पहली बार नहीं हुआ है। पिछले साल भी खरीद के अंतिम दिनों में आंकड़े इसी तरह से बढ़ाए गए थे। पिछले साल भी तीन लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य था। 90 प्रतिशत से ज्यादा धान खरीद दिखा दी गई। यह हाल तब था जब जनवरी माह में लगातार पांच दिनों तक बारिश हुई थी मंडी समेत पूरे शहर में पानी भर गया था। तब अधिकारियों ने जांच की बात कही लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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