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Pilibhit News: सरकारी एंबुलेंसों में न कोई उपकरण और न प्राथमिक इलाज की सुविधा

Fri, 30 Jun 2023 12:26 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Fri, 30 Jun 2023 12:26 AM IST
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Neither equipment nor first aid facility in government ambulances
पीलीभीत। सरकारी एंबुलेंस नहीं... इन्हें टैक्सी कहना ज्यादा ठीक है। ऐसा हम नहीं बल्कि जिला अस्पताल के डॉक्टर ही कहते हैं। दरअसल, इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा के टोल फ्री नंबर 108 और 102 पर फोन करने पर जो एंबुलेंस पहुंचती हैं, उनमें मरीजों के लिए कोई प्राथमिक चिकित्सा सुविधा नहीं मिलती है। हालांकि इन एंबुलेंस में मरीज की प्राथमिक जांच और उन्हें आवश्यक दवाएं देने का प्रावधान है। सीएचसी या जिला अस्पताल पहुंचने पर चिकित्साधिकारी को मरीज की प्राइमरी केस हिस्ट्री दी जानी चाहिए, लेकिन किसी भी एंबुलेंस का कर्मचारी अपनी इस जिम्मेदारी को नहीं निभा रहा है।
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जिला अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण अंचलों से मरीजों को सरकारी एंबुलेंस से लाया जाता है। नियम तो यह है कि मरीज को इस एंबुलेंस में लिटाने के बाद उसका तापमान, ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल, ऑक्सीजन एंबुलेंस में तैनात ईएमटी को चेक करना चाहिए। यदि हालत गंभीर है तो डॉक्टर को फौरन सूचित करना चाहिए, ताकि मरीज का इलाज एंबुलेंस में ही शुरू किया जा सके। इन सभी एंबुलेंस में दवाएं भी मुहैया कराई गईं हैं, लेकिन किसी भी एंबुलेंस में मरीजों की न तो जांच की जा रही है और न ही उन्हें दवाएं दी जाती हैं। डॉक्टर कई बार इस बाबत उच्चाधिकारियों को अवगत भी करा चुके हैं। डॉक्टरों के मुताबिक कई एंबुलेंस कर्मी तो मरीज की बीमारी का ब्योरा भी फाॅर्म में नहीं भरते हैं।
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केस 01-
पूरनपुर के रजागंज निवासी मोहम्मद नाजिश को एंबुलेंस क्रमांक 5773 से जिला अस्पताल लाया गया। चिकित्साधिकारी डॉ. एससी गुप्ता उस समय ड्यूटी पर थे। एंबुलेंस स्टाफ ने न तो रास्ते में की गई मरीज की जांचों का कोई ब्योरा दिया और न ही कोई दवा दी। मरीज को अस्पताल लाने की पुष्टि के लिए प्रपत्र पर हस्ताक्षर भी नहीं किए। मरीज को छोड़कर चला गया। मरीज ने भी बताया कि रास्ते में उसकी कोई जांच नहीं हुई।
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केस 02-
अमरिया के छोटेलाल को सड़क हादसे में घायल होने पर एंबुलेंस क्रमांक 4567 से बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल लाया गया। छोटेलाल के मुताबिक, रास्ते में कहने के बावजूद कर्मचारी ने उन्हें दर्द निवारक इंजेक्शन नहीं लगाया और न ही कोई जांच की। जिला अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी डॉक्टर जसप्रीत ने बताया एंबुलेंस के कर्मचारी ने जांच व दवाओं का ब्योरा नहीं दिया और मरीज को छोड़कर चला गया।
केस 03-
गजरौला के गांव सिरसा की क्रांति देवी को चोट लगने पर एंबुलेंस क्रमांक 0032 से जिला अस्पताल लाया गया। रास्ते में क्रांति देवी की न तो कोई जांच हुई और नहीं दर्द निवारक दवा दी गई। चिकित्साधिकारी डॉ. शम्मी कपूर ने जब एंबुलेंस कर्मचारी से ब्योरा मांगा तो उसने न तो कोई ब्योरा दिया और न ही दस्तखत कराए। मरीज को छोड़कर चला गया। बाद में चिकित्सक ने महिला की इमरजेंसी में जांचें कराईं।
केस 04-
न्यूरिया के सिंघारपुर की रहने वाली रामश्री देवी को एंबुलेंस क्रमांक 0051 से जिला अस्पताल लाया गया। एंबुलेंस में न तो उनकी कोई जांच की गई और न ही दवा दी गई। चिकित्साधिकारी डॉ. शम्मी कपूर के मुताबिक, उन्होंने एंबुलेंस कर्मचारियों को कई बार नियमों के बारे में बताया है, लेकिन इस केस में भी कर्मचारी ने मरीज को छोड़ने संबंधी दस्तावेज पर उनके दस्तखत तक नहीं कराए और चला गया।

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सभी एंबुलेंस में ब्लड प्रेशर, शुगर और तापमान चेक करने के उपकरण मौजूद हैं। दवाएं भी पर्याप्त हैं। अब मामला संज्ञान में आया है, तो सेवा प्रदाता कंपनी के अधिकारियों को भी अवगत कराया जाएगा। एंबुलेंस स्टाफ को अनिवार्य तौर पर प्रारंभिक जांचें करनी ही चाहिए। - रोशन लाल, जिला प्रभारी एंबुलेंस सेवा।
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