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Pilibhit News: हस्ताक्षर के आधार पर दस्तावेजों से अधिकारियों के खंगाले जा रहे नाम

Wed, 25 Sep 2024 11:07 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 25 Sep 2024 11:07 PM IST
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Names of officers are being searched from documents on the basis of signatures
अमरिया। बरेली-सितारगंज हाईवे में घपलेबाजों के साथ साठगांठ करने वाले तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम दस्तावेजों में हुए हस्ताक्षर से खंगाले जा रहे हैं। इन अधिकारियों के नाम रिपोर्ट बनाकर शासन को कार्यवाही के लिए भेजे जाएंगे। इसके लिए एक विशेष टीम लगाई गई है।
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बरेली-सितारगंज हाईवे प्रकरण में अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से भी घपलेबाजों के साथ मिलकर खेल करने का खुलासा हुआ था। इसके बाद मंडलायुक्त ने तुरंत पीलीभीत से एसएएलओ को दस्तावेजों और स्टाफ सहित बरेली तलब कर लिया था। तीन सितंबर से सभी दस्तावेज बरेली में रखे हुए हैं। साथ ही एसएएलओ का स्टाफ दस्तावेजों की निगरानी के लिए अटैच कर दिया गया है।
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यहां बता दें कि भूमि अधिग्रहण के लिए हुए सर्वे के दौरान राजस्व, लोनिवि और एनएचएआई के अधिकारियों की ओर से साठगांठ की गई थी। इसका खुलासा मंडलायुक्त की ओर से की गई जांच रिपोर्ट में भी हुआ था। जांच के दौरान अपर मंडलायुक्त ने भी स्थलीय निरीक्षण किया था। इस बीच ग्रामीणों से सर्वे के दौरान की स्थिति पर प्रतिक्रिया ली थी।
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मामले में किसानों ने राजस्व विभाग के कर्मचारी, लेखपाल और तत्कालीन अधिकारियों पर घपलेबाजों के साथ साठगांठ करने का आरोप लगाया था। किसानों ने बताया था कि लेखपालों ने एलाइनमेंट केे दायरे में आने वाली भूमि के स्वामियों से एक लाख पर 20 हजार का कमीशन निर्धारित किया था। मुआवजा मिलने पर कमीशन देने की बात तय हुई थी। इसी मामले की जांच के बाद अब ऐसे लेखपालों, लोनिवि के अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम खंगालने शुरू कर दिए गए हैं।
मामले में अब तक तत्कालीन अधिशासी अभियंता का नाम भी सामने आ गया है। इस संबंध में लोनिवि के वर्तमान अधिशासी अभियंता की ओर से उनकी ओर से किए गए कार्यों की रिपोर्ट और मुआवजे की आकलन रिपोर्ट भी बरेली भेज दी गई है।


दस्तावेज न आने से मुआवजे की राह देख रहे छाेेटे किसान
बरेली से एसएएलओ पीलीभीत के दफ्तर में अब तक दस्तावेज नहीं आए हैं। साथ ही एसएएलओ का स्टाफ भी अब तक नहीं लौटा है। इसकी वजह से मुआवजा वितरण का कार्य रुका हुआ है। आए दिन किसान एसएएलओ दफ्तर से मायूस होकर लौट रहे हैं।


अब तक दस्तावेज और स्टाफ बरेली से नहीं आया है। इसकी वजह से किसानों को मुआवजा नहीं दिया सकता। आकलन रिपोर्ट के साथ ही अन्य सभी दस्तावेज बरेली से आने पर ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी। -विजय वर्धन तोमर, एसएएलओ


अब जांच पड़ताल के बाद ही



ढांचों का मिलेगा मुआवजा



- बरेली- सितारगंज हाईवे के भू-अधिग्रहण का मामला



- सिटी मजिस्ट्रेट तैयार करा रहे हैं ढांचों की जांच रिपोर्ट



संवाद न्यूज एजेंसी



पीलीभीत। बरेली-सितारगंज हाईवेे के भूअधिग्रहण में बनाए गए ढांचों के स्वामियों को मुआवजा मिलने की राह आसान नहीं है। सिटी मजिस्ट्रेट ने सभी ढांचों की जांच के लिए रिपोर्ट तैयार करनी शुरु कर दी है। जांच रिपोर्ट बरेली भेजी जाएगी। सबकुछ ठीक होने पर ही मुआवजा दिया जाएगा।



जिले में सदर और अमरिया तहसीलों में हाईवे निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहित की गई थी। इसमें दोनों तहसीलों के 27 गांवों की जमीनें ली गईं थीं। दो चरणों में हुई जांच के दौरान इसमें 50 लाख से अधिक मुआवजे वाले प्रकरणों की जांच की गई। इसमें सबसे बड़ी गड़बड़ी स्ट्रक्चर मामलों में पाई गई। ऐसे में अब जांच पूरी होने के बाद एसएलओ कार्यालय अब मुआवजा मामले में पूरी सतर्कता बरतेगा। बरेली से संबंधित अभिलेख आने के बाद अधिग्रहित भूमि के ढांचों की गहनता से पड़ताल की जाएगी।




भूमि अध्यापित अधिकारी विजय वर्धन तोमर के मुताबिक, अभिलेख आने के बाद स्ट्रक्चर वाले सभी छोटे-बड़े मामलों की एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट तैयार कर एनएचआई को भेजी जाएगी। उनके द्वारा जांच पड़ताल के बाद जिन ढांचों की रिपोर्ट ओके होगी, उसका संबंधित को मुआवजा दिया जाएगा। यदि जांच में मुआवजे की रकम मूल्यांकन से अधिक देना पाया गया तो इसकी जांच के बाद संबंधित को नोटिस भेज कर रकम की रिकवरी भी कराई जाएगी।
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