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एनएचएई की जमीन पर उड़ेला जा रहा शहर से निकलने वाला कूड़ा
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हाइवे पर लगा कूड़े का ढेर। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। शहर से निकलने वाला 65 मीट्रिक टन कूड़ा नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचआई) की जमीन पर डाला जा रहा है। नगरपालिका परिषद के पास कूड़ा डालने के लिए अपनी जमीन नहीं है। जो जमीन उसने देखी है, वह शहर से 12 किलोमीटर दूर है। वहां कूड़े की गाड़ियां जाती नहीं। कूड़े के निस्तारण के लिए जिस प्लांट का निर्माण कराया जा रहा है, वह भी अभी पूरा नहीं हो सका है। अगले साल इस प्लांट के शुरू होने की उम्मीद है।
नगरपालिका परिषद के पास कूड़ा डालने के लिए अपनी जगह नहीं है। इसी लिए गांव मीरापुर के पास कूड़ा डालने के लिए जमीन अधिग्रहण की गई है। जो शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर है। तीन किलोमीटर कच्चा रास्ता तय करने के बाद कूड़ा भरी ट्रॉलियां डंपिंग ग्राउंड तक नहीं पहुंच पातीं। इस कारण कूड़े को जहानाबाद तिराहे से सितारगंज की ओर जाने वाले एनएचआई की जमीन पर हाईवे किनारे डाला जा रहा है। आलम यह है कि जहानाबाद मोड़ के पास पूरी तरह अस्थाई डंपिंग ग्राउंड बन गया है। रेलवे क्रॉसिंग के आगे भी जगह-जगह कूड़ा डाला जा रहा है। इससे लोगों को दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। साथ ही शहर की सुंदरता पर भी दाग लग रहा है।
प्लांट और डंपिंग ग्राउंड तक नहीं पहुंच पा रहीं गाड़ियां
पालिका प्रशासन की ओर से कूड़ा निस्तारण को लेकर प्लांट लगाने की दो साल पहले कवायद शुरू हुई थी। इस पर गांव मीरापुर के पास 60 एकड़ ग्राम समाज की जमीन तलाश कर ली गई। इसी जमीन पर डंपिंग ग्राउंड बनाने और निस्तारण प्लांट लगाने की के लिए मंजूरी मिली। छह करोड़ की लागत से भवन निर्माण का काम जनवरी में शुरू करा दिया गया, मगर तीन किलोमीटर कच्चे रास्ते का किसी ने ध्यान नहीं दिया। बारिश के दौरान कच्चा रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है। जिस कारण कूड़ा भारी ट्रैक्टर ट्रॉलियों का डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। नतीजतन कर्मचारी हाईवे किनारे ही कूड़ा डाल देते हैं।
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इन दिनों कच्चे रास्ते में कीचड़ है। इसीलिए पिछले कई माह से कूड़ा भरी ट्रॉलिया नहीं आ रहीं है। जब आतीं हैं, तो रास्ते में कूड़ा गिरता हुआ जाता है। इससे गांव में गंदगी फैलने लगी है। रास्ते का निर्माण दूसरी ओर से होना है। अगर निर्माण हो जाए, तो गंदगी नहीं होगी। -रामबरन, ग्रामीण
अभी चक मार्ग 12 फीट चौड़ा है जिसे 19 फीट चौड़ा होना है। ऐसे में जमीन का पेच फंस रहा है। बिना मुआवजे के जमीन नहीं दी जाएगी। - रामऔतार, किसान
दिसंबर तक प्लांट का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद मशीनें मंगवाई जाएंगी। अगले साल प्लांट शुरू हो जाएगा। जिसके बाद कूड़े की समस्या नहीं रहेगी।- सुबोध कुमार, प्रोजेक्ट मैनेजर, सीएंडडीएस
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नगरपालिका परिषद के पास कूड़ा डालने के लिए अपनी जगह नहीं है। इसी लिए गांव मीरापुर के पास कूड़ा डालने के लिए जमीन अधिग्रहण की गई है। जो शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर है। तीन किलोमीटर कच्चा रास्ता तय करने के बाद कूड़ा भरी ट्रॉलियां डंपिंग ग्राउंड तक नहीं पहुंच पातीं। इस कारण कूड़े को जहानाबाद तिराहे से सितारगंज की ओर जाने वाले एनएचआई की जमीन पर हाईवे किनारे डाला जा रहा है। आलम यह है कि जहानाबाद मोड़ के पास पूरी तरह अस्थाई डंपिंग ग्राउंड बन गया है। रेलवे क्रॉसिंग के आगे भी जगह-जगह कूड़ा डाला जा रहा है। इससे लोगों को दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। साथ ही शहर की सुंदरता पर भी दाग लग रहा है।
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प्लांट और डंपिंग ग्राउंड तक नहीं पहुंच पा रहीं गाड़ियां
पालिका प्रशासन की ओर से कूड़ा निस्तारण को लेकर प्लांट लगाने की दो साल पहले कवायद शुरू हुई थी। इस पर गांव मीरापुर के पास 60 एकड़ ग्राम समाज की जमीन तलाश कर ली गई। इसी जमीन पर डंपिंग ग्राउंड बनाने और निस्तारण प्लांट लगाने की के लिए मंजूरी मिली। छह करोड़ की लागत से भवन निर्माण का काम जनवरी में शुरू करा दिया गया, मगर तीन किलोमीटर कच्चे रास्ते का किसी ने ध्यान नहीं दिया। बारिश के दौरान कच्चा रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है। जिस कारण कूड़ा भारी ट्रैक्टर ट्रॉलियों का डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। नतीजतन कर्मचारी हाईवे किनारे ही कूड़ा डाल देते हैं।
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इन दिनों कच्चे रास्ते में कीचड़ है। इसीलिए पिछले कई माह से कूड़ा भरी ट्रॉलिया नहीं आ रहीं है। जब आतीं हैं, तो रास्ते में कूड़ा गिरता हुआ जाता है। इससे गांव में गंदगी फैलने लगी है। रास्ते का निर्माण दूसरी ओर से होना है। अगर निर्माण हो जाए, तो गंदगी नहीं होगी। -रामबरन, ग्रामीण
अभी चक मार्ग 12 फीट चौड़ा है जिसे 19 फीट चौड़ा होना है। ऐसे में जमीन का पेच फंस रहा है। बिना मुआवजे के जमीन नहीं दी जाएगी। - रामऔतार, किसान
दिसंबर तक प्लांट का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद मशीनें मंगवाई जाएंगी। अगले साल प्लांट शुरू हो जाएगा। जिसके बाद कूड़े की समस्या नहीं रहेगी।- सुबोध कुमार, प्रोजेक्ट मैनेजर, सीएंडडीएस

मीरापुर गांव के पास निर्माणाधीन कूड़ा निस्तारण प्लांट। संवाद- फोटो : PILIBHIT