फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Most of the rice millers came on the back foot, started business

अधिकतर राइस मिलर्स बैकफुट पर आए, शुरू किया कारोबार

Thu, 14 Oct 2021 01:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 14 Oct 2021 01:33 AM IST
विज्ञापन
Most of the rice millers came on the back foot, started business
पूरनपुर। चावल की कुटाई 10 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 250 रुपये प्रति क्विंटल न करने, 67 किलोग्राम प्रति क्विंटल की जगह 60 किलोग्राम चावल की रिकवरी न होने पर कारोबार न करने की चेतावनी देने वाले राइस मिल मालिक बैकफुट पर आ गए। अधिकतर राइस मिल मालिकों ने कारोबार शुरू कर दिया। साथ ही सरकारी खरीद केंद्रों से धान लेने का एग्रीमेंट भी करा लिया।
विज्ञापन

राइस मिल मालिकों की 26 सितंबर को नगर के एक होटल में बैठक हुई थी। बैठक में धान खरीद केंद्रों को दिए जाने वाले चावल की कुटाई काफी कम होने पर चावल की रिकवरी 67 प्रतिशत लेने पर रोष व्यक्त किया गया था। कहा गया था कि कुटाई की दर चालीस साल पुरानी है। तब से महंगाई कई गुना बढ़ गई है। चावल कुटाई 67 प्रतिशत है। जबकि अब हाइब्रिड धान की बढ़ती खेती पर रिकवरी 60 प्रतिशत आ रही है। ऐसे में उनको भारी नुकसान हो रहा है। लंबे समय से मांग करने के बाद भी उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बैठक में धान की कुटाई 10 रुपये से बढ़ाकर 250 रुपये प्रति क्विंटल की जाए और चावल की रिकवरी 67 किलोग्राम प्रति क्विंटल से कम कर 60 किलोग्राम होने। साथ ही मांग पूरी न होने पर कारोबार न करने की चेतावनी दी थी। इसके अलावा धान खरीद सरकारी एजेंसियों की बजाय राइस मिल और आढ़तियों से कराने की मांग की गई थी। धान कुटाई की सालों से बकाया धनराशि का भुगतान कराने की मांग कर समस्याओं का समाधान न होने पर राइस मिलों की चाबियां प्रशासन को सौंपने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद अधिकांश राइस मिल मालिकों ने कई दिन तक धान की खरीद नहीं की। समस्याओं का समाधान न होने पर राइस मिल मालिक अब बैकफुट पर आ गए। अधिकांश राइस मिल मालिकों ने अपना कारोबार शुरू कर दिया। खरीद केंद्रों से धान कुटाई के लिए लेने का एग्रीमेंट भी करा लिया।
विज्ञापन

राइस मिल मालिक व्यापार कर फायदे में नहीं है। इसको लेकर सरकार, अफसरों से समस्याओं के समाधान की मांग की गई थी। मगर समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। करोड़ों रुपये लगाकर कब तक व्यापार को बंद किया जा सकता है। मजबूरन राइस मिल मालिकों ने कारोबार शुरू किया है। कुछ लोगों ने जीओ टैगिंग भी कराई है। समस्याओं के समाधान को लेकर प्रयास जारी रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

- सुखदेव सिंह, अध्यक्ष, राइस मिलर्स एसोसिएशन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed