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Pilibhit News: नौजल्हा नंबर दो में 35 से अधिक बाढ़ पीड़ित परिवार राशन किट से वंचित, किया प्रदर्शन
Tue, 09 Sep 2025 11:55 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Tue, 09 Sep 2025 11:55 PM IST
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कलीनगर। शारदा व जगबूड़ा नदीकी बाढ़ ने कलीनगर तहसील के नोजल्हा नंबर-2 बंगाली कॉलोनी के 35 से अधिक परिवारों की जिंदगी मुश्किल बना दी है। बस्ती तक पहुंचने वाला मार्ग नदी के तेज बहाव से कट गया, जिससे लोगों का आवागमन बंद हो गया। लोगों का कहना है कि प्रशासन की मदद उन लोगों के पास तक नहीं पहुंची। आक्रोशित परिवारों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया।
गांव के स्थानीय बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि सड़क मरम्मत के लिए 200 ट्राली मिट्टी डालने का आदेश हुआ था, लेकिन ग्राम प्रधान की लापरवाही से केवल 70 ट्राली मिट्टी ही डलवाई गई। परिणामस्वरूप रास्ता आज भी टूटा पड़ा है। इस मुद्दे पर ग्रामीणों और प्रधान के बीच विवाद बढ़ गया। पीड़ितों का आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें धमकियां दी गईं और राशन किट से वंचित कर दिया गया। महिलाओं का कहना है कि रास्ता कटने से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और महिलाएं बाजार नहीं पहुंच पा रहीं। वहीं, आधार कार्ड और राशन कार्ड होने के बावजूद उन्हें किसी प्रकार की मदद नहीं दी गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान ने विरोध की शिकायत कर रमनगर चौकी पुलिस को बुलाया, जिसने पीड़ितों पर दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन जब मामला बच्चों और महिलाओं की शिक्षा व रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा था, तो ग्रामीणों ने झुकने से इनकार कर दिया। पीड़ितों ने स्पष्ट कहा है कि यदि उनकी समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी से मिलकर न्याय की गुहार लगाएंगे। उनका कहना है कि बंगाली समाज के इन परिवारों ने भी चुनाव में वोट दिया, लेकिन फिर भी उनकी उपेक्षा की जा रही है।
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गांव के स्थानीय बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि सड़क मरम्मत के लिए 200 ट्राली मिट्टी डालने का आदेश हुआ था, लेकिन ग्राम प्रधान की लापरवाही से केवल 70 ट्राली मिट्टी ही डलवाई गई। परिणामस्वरूप रास्ता आज भी टूटा पड़ा है। इस मुद्दे पर ग्रामीणों और प्रधान के बीच विवाद बढ़ गया। पीड़ितों का आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें धमकियां दी गईं और राशन किट से वंचित कर दिया गया। महिलाओं का कहना है कि रास्ता कटने से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और महिलाएं बाजार नहीं पहुंच पा रहीं। वहीं, आधार कार्ड और राशन कार्ड होने के बावजूद उन्हें किसी प्रकार की मदद नहीं दी गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान ने विरोध की शिकायत कर रमनगर चौकी पुलिस को बुलाया, जिसने पीड़ितों पर दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन जब मामला बच्चों और महिलाओं की शिक्षा व रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा था, तो ग्रामीणों ने झुकने से इनकार कर दिया। पीड़ितों ने स्पष्ट कहा है कि यदि उनकी समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी से मिलकर न्याय की गुहार लगाएंगे। उनका कहना है कि बंगाली समाज के इन परिवारों ने भी चुनाव में वोट दिया, लेकिन फिर भी उनकी उपेक्षा की जा रही है।
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