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Pilibhit News: मिशनरियों ने उठाया अंधविश्वास, अशिक्षा और कमजोर आर्थिक स्थिति का फायदा

Tue, 17 Jun 2025 11:51 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Tue, 17 Jun 2025 11:51 PM IST
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Missionaries took advantage of superstition, illiteracy and poor economic condition
जितेंद्र अवस्थी
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पीलीभीत। जिले में नेपाल बॉर्डर से सटे गांवों के ग्रामीणों की कमजोर आर्थिक स्थिति, अशिक्षा और अंधविश्वास का फायदा ईसाई मिशनरियों ने उठाया है। रुपये, सरकारी योजनाओं का लाभ और प्रार्थना से बीमारी से निजात का झांसा देकर बड़े स्तर पर धर्मांतरण कराया गया। धनराशि और स्वास्थ्य लाभ न मिलने पर ग्रामीणों ने प्रार्थना सभा में जाना बंद किया तो उन्हें परेशान किया गया। पुलिस-प्रशासन भले ही धर्मांतरण के दावों को झुठलाता रहा, लेकिन हाल ही में दर्ज हुए मुकदमे और घर वापसी कार्यक्रम इसकी गवाही दे रहे हैं।
पीलीभीत की सीमा नेपाल से सटी है। बैल्हा, टाटरगंज उर्फ सिंघाड़ा, वमनपुरी आदि करीब 12 ग्राम सभाओं में करीब 22 हजार की आबादी रहती है। इन ग्राम पंचायतों में अधिकांश आबादी राय सिख है। शारदा पार इलाके में आने वाली इन ग्राम सभाओं में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। बाढ़-कटान प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से खेती-किसानी भी प्रभावित रहती है। शिक्षा का स्तर पर काफी कम है। बॉर्डर से सटे गांवों के ग्रामीणों की इन समस्याओं का फायदा ईसाई मिशनरियों ने उठाया और बड़े स्तर पर धर्मांतरण का खेल खेला गया।
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वर्ष 2020 से अब तक करीब 3000 सिखों का धर्मांतरण कराया गया। बैल्हा कमेटी गुरुद्वारा के अध्यक्ष जरनैल सिंह और सचिव परमजीत सिंह के प्रयासों से सिख समाज के लोग सक्रिय हुए। जांच के बाद ऑल इंडिया सिख पंजाबी वेलफेयर काउंसिल एवं लखनऊ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने फरवरी 2025 में कार्यक्रम का आयोजन कर लोगों की घर वापसी कराई। सोमवार को राघवपुरी में हुए समारोह में भी 61 परिवारों की घर वापसी कराई गई है। संवाद
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ये है प्रमुख वजह
- नेपाल सीमा से सटे अधिकांश गांव शारदा पार के इलाके में आते हैं।
- इन गांवों के लोग बाढ़ और कटान का दंश झेलते हैं।
- आवागमन के नाम पर सड़कें खस्ताहाल हैं।
- शिक्षा और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह क्षेत्र काफी पिछड़ा है।
- पैंटून पुल हटने से यह क्षेत्र तहसील मुख्यालय से भी कट जाता है।
- नेपाल की खुली सीमा से बेरोकटोक आवाजाही से धर्मांतरण का खेल भी खुलकर खेला गया।
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