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Pilibhit News: यूपीआई पर एमडीआर से कारोबारी नाखुश, बोले-छोटे मुनाफे पर होगा असर

Sat, 19 Sep 2026 01:30 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2026 01:30 AM IST
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Merchants unhappy with UPI MDR; say small profit margins will be hit.
आशीष अग्रवाल
पीलीभीत। मोबाइल फोन पर क्यूआर कोड स्कैन कर चंद सेकंड में भुगतान करने की सुविधा अब कारोबारियों के लिए चिंता का कारण बनती दिख रही है।
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15 अक्तूबर से दो हजार रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लागू होने की व्यवस्था के बाद स्थानीय कारोबारियों ने इस पर नाराजगी जताई है। शुल्क ग्राहक से नहीं संबंधित कारोबारी से लिया जाएगा। हालांकि दो हजार रुपये तक के भुगतान पर यह शुल्क नहीं होगा व पात्र छोटे कारोबारियों को भी राहत दी गई है।
हालांकि अभी शहर के कारोबारी इस नई व्यवस्था को लेकर नाखुश दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि बाजार में अब अधिकांश ग्राहक बड़े भुगतान भी यूपीआई से ही करते हैं। कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, सराफा व अन्य दुकानों पर पांच-दस हजार रुपये के भुगतान आम हैं। ऐसे में हर बड़े डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगने से कारोबार की लागत बढ़ेगी। कारोबारियों के मुताबिक छोटे मुनाफे वाले व्यापार में अतिरिक्त शुल्क सीधे लाभ को प्रभावित करेगा।
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कारोबारियों का यह भी कहना है कि शुल्क का बोझ बढ़ने पर कुछ व्यापारी बड़े भुगतान में नकद को प्राथमिकता दे सकते हैं। लेकिन आम ग्राहक आजकल यूपीआई को ही प्राथमिकता दे रहा है। संवाद
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सरकार के फैसले से व्यापारी नाखुश
व्यापारियों पर एक कर और सरकार की ओर से लगाया गया है, जो कि पूरी तरह से गलत है। यूपीआई अब आम ग्राहक की आदत में शामिल है। इससे व्यापारियों को खासा नुकसान होगा।
- आशीष अग्रवाल, क्रॉकरी कारोबारी
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यूपीआई से लेन-देन सुरक्षित और सुविधाजनक है। लेकिन 0.4 प्रतिशत एमडीआर छोटे व्यापारियों की कमाई पर बोझ डालेगा, इसलिए जीरो-एमडीआर व्यवस्था लागू होनी चाहिए। यूपीआई के पक्ष में हैं, लेकिन एमडीआर शून्य हो।

- अभिषेक अग्रवाल, किराना व्यापारी
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सरकार के साथ हैं, लेकिन यूपीआई की आदत पहले सरकार ने डाली, जब बाजार में नकदी खत्म हो रही है, तो भुगतान सिर्फ कारोबारी को करना होगा। यह काफी हद तक जरूरी नहीं था।
- जॉय मैनी, कपड़ा कारोबारी

आशीष अग्रवाल

आशीष अग्रवाल

आशीष अग्रवाल

आशीष अग्रवाल

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