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रोमानिया पहुंचे कई छात्र पर वतन वापसी की राह में मुश्किलें
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पीलीभीत। यूक्रेन में फंसे जिले के छात्र जैसे-तैसे रोमानिया और पड़ोसी देशों के बॉर्डर तक पहुंच चुके हैं। लेकिन वतन वापसी की राह में कई समस्याएं आ रही हैं। कुछ छात्र रोमानिया बॉर्डर पार गए हैं। फ्लाइट कब मिलेगी, इसके बारे में उनको कुछ जानकारी नहीं मिल रही है। फोन पर बातचीत के लिए नेटवर्क परेशान कर रहा है।
खारकीव में फंसे कुछ छात्रों ने भारतीय दूतावास की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। वीडियो जारी कर बताया कि खारकीव से बसें नहीं मिल रही हैं। जैसे-तैसे बॉर्डर पर पहुंच पा रहे हैं। जबकि दूसरे देशों के दूतावासों की तरफ से छात्रों को बसें उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं छात्रों के सामने खाने-पीने की चीजों की भी किल्लत होने लगी है। रोमानिया पहुंचे कुछ छात्रों से परिजन का संपर्क भी टूट गया है। उनके पास रोमानिया की मोबाइल सिम नहीं है। जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार जिले का कोई छात्र अभी पीलीभीत नहीं पहुंचा है।
रोमानिया पहुंचा सार्थक, टिकट को लेकर हो रहा परेशान- मझोला निवासी सार्थक रोमानिया पहुंच गया है। वहां उसका सिम काम नहीं कर रहा है। किसी दूसरे के मोबाइल से इंटरनेट कनेक्ट करके उसने घर वालों से व्हाट्सएप कॉल के जरिए बात की। उसने बताया कि बॉर्डर पर बहुत भीड़ है। हजारों की संख्या में लोग पहुंचे हुए हैं। खारकीव सिटी के लोग दूसरे शहरों में चले गए। कुछ लोग पोलैंड बॉर्डर पहुंचे हैं।
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वहां की स्थिति भी ठीक नहीं है। उसने बताया कि बॉर्डर तक पहुंचने के लिए उसे बारह किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। बॉर्डर के गेट पर रोमानिया जाने वालों की कतारें लगी हैं। उसने घर वालों को बताया कि रोमानिया का सिम नहीं है, जिस कारण बात करने में दिक्कत हो सकती है। वीजा मिल गया है, लेकिन हवाई जहाज का टिकट फाइनल नहीं हुुआ है। उसने बताया कि दूतावास की तरफ से बताया गया कि रोमानिया से हवाई सेवा मिल जाएगी। रात तक कुछ इंतजाम हो सकता है। वहीं सार्थक की सलामती को लेकर घर वाले परेशान हैं।
खारकीव में हाई अलर्ट की जानकारी से परिजन परेशान - साहूकारा निवासी राइस मिलर अजीम खां ने बताया कि पुत्र हैदर खां से रविवार को अपराह्न करीब साढ़े 11 बजे मोबाइल पर बात हुई। खारकीव में लगातार बम धमाकों के बढ़ने और वहां हाई अलर्ट जारी होने की जानकारी दी है।
पोलैंड के रास्ते से यूक्रेन के नागरिकों के अलावा किसी के पास न होने की जानकारी दे रहा है। बाजार बंद होने से खाने, पीने की चीजों का भी संकट बढ़ गया है। उसने वीडियो भेजकर घर वालों को बताया कि रात बंकर में गुजरी। अब वहां पानी भर गया है। बर्फबारी भी हो रही है।
संपर्क न होने से परेशान है मां और परिवार वाले
पूरनपुर। गांव भोपतपुर निवासी बलजीत सिंह अपनी पत्नी मनदीप कौर के साथ यूक्रेन में फंसे हुए है। बलजीत के रिश्ते के भाई मनवीर सिंह ने बताया कि शनिवार को बलजीत सिंह ने अपनी मां को दूसरे के मोबाइल से फोन कर ठीक होने की जानकारी दी थी। मगर शनिवार से उनका मोबाइल न मिलने से उनकी मां और अन्य परिवार के लोग खासे चिंतित है।
संदिग्ध समझकर सेना ने घेरा.. बमुश्किल बचाई जान- हजारा थाना क्षेत्र के हर्षित शुक्ला तीन महीने पहले यूक्रेन में एमबीबीएस करने गए है। खारकीव में मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहे थे। युद्ध में हर्षित भी खारकीव में फंसे है। रविवार को हर्षित ने अपने पिता प्रदीप शुक्ला से बात कर वहां का हाल बताया।
प्रदीप शुक्ला ने बताया कि खारकीव में फंसे लोगों को निकालने के लिए कोई गाइड लाइन अब तक जारी नहीं हुई है। पोलैंड वार्डर से भी नहीं घुसने दिया जा रहा है। भारतीय दूतावास से मिली गाइड लाइन पर हर्षित के कुछ साथी रेलवे स्टेशन पहुंचे। कुछ तो ट्रेन से आगे को निकल गए। बचे हुए छात्रों को यूक्रेन की सेना ने संदिग्ध मानकर घेर लिया। बमुश्किल छात्रों ने अपनी जान बचाई है। लगातार हालात खराब होने पर हर्षित के परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
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खारकीव में फंसे कुछ छात्रों ने भारतीय दूतावास की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। वीडियो जारी कर बताया कि खारकीव से बसें नहीं मिल रही हैं। जैसे-तैसे बॉर्डर पर पहुंच पा रहे हैं। जबकि दूसरे देशों के दूतावासों की तरफ से छात्रों को बसें उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं छात्रों के सामने खाने-पीने की चीजों की भी किल्लत होने लगी है। रोमानिया पहुंचे कुछ छात्रों से परिजन का संपर्क भी टूट गया है। उनके पास रोमानिया की मोबाइल सिम नहीं है। जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार जिले का कोई छात्र अभी पीलीभीत नहीं पहुंचा है।
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रोमानिया पहुंचा सार्थक, टिकट को लेकर हो रहा परेशान- मझोला निवासी सार्थक रोमानिया पहुंच गया है। वहां उसका सिम काम नहीं कर रहा है। किसी दूसरे के मोबाइल से इंटरनेट कनेक्ट करके उसने घर वालों से व्हाट्सएप कॉल के जरिए बात की। उसने बताया कि बॉर्डर पर बहुत भीड़ है। हजारों की संख्या में लोग पहुंचे हुए हैं। खारकीव सिटी के लोग दूसरे शहरों में चले गए। कुछ लोग पोलैंड बॉर्डर पहुंचे हैं।
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वहां की स्थिति भी ठीक नहीं है। उसने बताया कि बॉर्डर तक पहुंचने के लिए उसे बारह किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। बॉर्डर के गेट पर रोमानिया जाने वालों की कतारें लगी हैं। उसने घर वालों को बताया कि रोमानिया का सिम नहीं है, जिस कारण बात करने में दिक्कत हो सकती है। वीजा मिल गया है, लेकिन हवाई जहाज का टिकट फाइनल नहीं हुुआ है। उसने बताया कि दूतावास की तरफ से बताया गया कि रोमानिया से हवाई सेवा मिल जाएगी। रात तक कुछ इंतजाम हो सकता है। वहीं सार्थक की सलामती को लेकर घर वाले परेशान हैं।
खारकीव में हाई अलर्ट की जानकारी से परिजन परेशान - साहूकारा निवासी राइस मिलर अजीम खां ने बताया कि पुत्र हैदर खां से रविवार को अपराह्न करीब साढ़े 11 बजे मोबाइल पर बात हुई। खारकीव में लगातार बम धमाकों के बढ़ने और वहां हाई अलर्ट जारी होने की जानकारी दी है।
पोलैंड के रास्ते से यूक्रेन के नागरिकों के अलावा किसी के पास न होने की जानकारी दे रहा है। बाजार बंद होने से खाने, पीने की चीजों का भी संकट बढ़ गया है। उसने वीडियो भेजकर घर वालों को बताया कि रात बंकर में गुजरी। अब वहां पानी भर गया है। बर्फबारी भी हो रही है।
संपर्क न होने से परेशान है मां और परिवार वाले
पूरनपुर। गांव भोपतपुर निवासी बलजीत सिंह अपनी पत्नी मनदीप कौर के साथ यूक्रेन में फंसे हुए है। बलजीत के रिश्ते के भाई मनवीर सिंह ने बताया कि शनिवार को बलजीत सिंह ने अपनी मां को दूसरे के मोबाइल से फोन कर ठीक होने की जानकारी दी थी। मगर शनिवार से उनका मोबाइल न मिलने से उनकी मां और अन्य परिवार के लोग खासे चिंतित है।
संदिग्ध समझकर सेना ने घेरा.. बमुश्किल बचाई जान- हजारा थाना क्षेत्र के हर्षित शुक्ला तीन महीने पहले यूक्रेन में एमबीबीएस करने गए है। खारकीव में मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहे थे। युद्ध में हर्षित भी खारकीव में फंसे है। रविवार को हर्षित ने अपने पिता प्रदीप शुक्ला से बात कर वहां का हाल बताया।
प्रदीप शुक्ला ने बताया कि खारकीव में फंसे लोगों को निकालने के लिए कोई गाइड लाइन अब तक जारी नहीं हुई है। पोलैंड वार्डर से भी नहीं घुसने दिया जा रहा है। भारतीय दूतावास से मिली गाइड लाइन पर हर्षित के कुछ साथी रेलवे स्टेशन पहुंचे। कुछ तो ट्रेन से आगे को निकल गए। बचे हुए छात्रों को यूक्रेन की सेना ने संदिग्ध मानकर घेर लिया। बमुश्किल छात्रों ने अपनी जान बचाई है। लगातार हालात खराब होने पर हर्षित के परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।