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मनरेगा घोटाला: जेल में बंद बर्खास्त एपीओ की संपत्ति की भी जांच शुरू
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पीलीभीत। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) योजना में फर्जी मस्टररोल और निजी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये का घोटाला करने के मामले में जेल भेजे गए अमरिया के पूर्व अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (एपीओ) पर जांच का शिकंजा और कसता जा रहा है। घोटाले में पद से बर्खास्त एपीओ की फर्म से जुड़े लेनदेन का साक्ष्य जुटाने के बाद अब उसकी संपत्ति की जांच भी शुरू कर दी गई है। सीडीओ डीएम से निर्देश मिलने के बाद एपीओ की संपत्ति की छानबीन बिंदुवार करने में जुट गए हैं।
मनरेगा में करोड़ों रुपये के घोटाले की शासन स्तर पर हुई शिकायत के बाद अमरिया ब्लॉक के पूर्व एपीओ अजय कुमार की जांच की गई थी। शिकायत में एपीओ पर निजी फर्म बनाकर मनरेगा में निर्माण सामग्री की खरीद और फर्जी मस्टररोल बनाकर करोड़ों रुपये का घोटाला करने का आरोप लगा था। जांच में काफी हद तक आरोप सही पाए गए। शासन के निर्देश पर एपीओ और तीन रोजगार सेवकों को बर्खास्त भी कर दिया गया था। मनरेगा योजना के उपायुक्त मृणाल सिंह की तहरीर पर कोतवाली में 26 अगस्त को मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। दूसरे दिन एपीओ और तीनों रोजगार सेवकों कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया गया था। मामले की जांच सीडीओ श्रीनिवास मिश्र कर रहे हैं।
सीडीओ ने प्रारंभिक दौर में जब मामले की गहनता से जांच की तो एपीओ की निजी फर्म से जुड़े तमाम कागजात एकत्र किए गए। एपीओ की फर्म के खाते में 3.64 करोड़ रुपये के भुगतान के साक्ष्य भी जांच में मिल चुके हैं। एपीओ के निजी खाते में 22 लाख रुपये की रकम भी जमा मिली थी। अभी इस मामले की जांच चल रही है। एपीओ पर आय से अधिक संपत्ति जुटाने के भी आरोप लगे थे। डीएम के निर्देश पर एपीओ की संपत्ति की जांच भी तेज कर दी गई है।
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मनरेगा से जुड़े अफसर-कर्मचारी भी घबराए
एपीओ और रोजगार सेवकों पर सख्त कार्रवाई होते ही शासन-प्रशासन का अनुशासन दिखने लगा था। प्रशासनिक हलकों में अब भी कुछ सवाल अनसुलझे रह गए हैं। एक एपीओ द्वारा तीन रोजगार सेवकों की मदद से मनरेगा में इतना बड़ा घोटाला करना आसान नहीं है। विकास भवन में चर्चा है कि एपीओ को राजनीतिक और विभागीय अफसरों का भी पूरा संरक्षण मिला था। करोड़ों रुपये के घपले में मनरेगा के एक अफसर का नाम भी उछल रहा है। इसके अलावा अमारिया में ब्लॉक स्तर पर पंचायत सचिव और बीडीओ की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यह माना जा रहा है कि मनरेगा के कामों की प्रत्येक ग्राम पंचायत की ठीक से जांच हुई तो उसमें ब्लॉक से लेकर जनपद मुख्यालय तक कई अफसरों की गर्दन फंसेंगी। एपीओ की संपत्ति की जांच शुरू होने के बाद एक बार मनरेगा से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ गई हैं।
एपीओ को पद से बर्खास्त करने के बाद जेल भेजा जा चुका है। उसकी फर्म से हुए लेनदेन की भी जांच की जा चुकी है। अब एपीओ की संपत्ति की जांच कराई जा रही है। उस जांच में जो भी निकलकर सामने आएगा, उसी आधार पर सख्त कार्रवाई करेंगे। - पुलकित खरे, डीएम
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मनरेगा में करोड़ों रुपये के घोटाले की शासन स्तर पर हुई शिकायत के बाद अमरिया ब्लॉक के पूर्व एपीओ अजय कुमार की जांच की गई थी। शिकायत में एपीओ पर निजी फर्म बनाकर मनरेगा में निर्माण सामग्री की खरीद और फर्जी मस्टररोल बनाकर करोड़ों रुपये का घोटाला करने का आरोप लगा था। जांच में काफी हद तक आरोप सही पाए गए। शासन के निर्देश पर एपीओ और तीन रोजगार सेवकों को बर्खास्त भी कर दिया गया था। मनरेगा योजना के उपायुक्त मृणाल सिंह की तहरीर पर कोतवाली में 26 अगस्त को मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। दूसरे दिन एपीओ और तीनों रोजगार सेवकों कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया गया था। मामले की जांच सीडीओ श्रीनिवास मिश्र कर रहे हैं।
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सीडीओ ने प्रारंभिक दौर में जब मामले की गहनता से जांच की तो एपीओ की निजी फर्म से जुड़े तमाम कागजात एकत्र किए गए। एपीओ की फर्म के खाते में 3.64 करोड़ रुपये के भुगतान के साक्ष्य भी जांच में मिल चुके हैं। एपीओ के निजी खाते में 22 लाख रुपये की रकम भी जमा मिली थी। अभी इस मामले की जांच चल रही है। एपीओ पर आय से अधिक संपत्ति जुटाने के भी आरोप लगे थे। डीएम के निर्देश पर एपीओ की संपत्ति की जांच भी तेज कर दी गई है।
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मनरेगा से जुड़े अफसर-कर्मचारी भी घबराए
एपीओ और रोजगार सेवकों पर सख्त कार्रवाई होते ही शासन-प्रशासन का अनुशासन दिखने लगा था। प्रशासनिक हलकों में अब भी कुछ सवाल अनसुलझे रह गए हैं। एक एपीओ द्वारा तीन रोजगार सेवकों की मदद से मनरेगा में इतना बड़ा घोटाला करना आसान नहीं है। विकास भवन में चर्चा है कि एपीओ को राजनीतिक और विभागीय अफसरों का भी पूरा संरक्षण मिला था। करोड़ों रुपये के घपले में मनरेगा के एक अफसर का नाम भी उछल रहा है। इसके अलावा अमारिया में ब्लॉक स्तर पर पंचायत सचिव और बीडीओ की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यह माना जा रहा है कि मनरेगा के कामों की प्रत्येक ग्राम पंचायत की ठीक से जांच हुई तो उसमें ब्लॉक से लेकर जनपद मुख्यालय तक कई अफसरों की गर्दन फंसेंगी। एपीओ की संपत्ति की जांच शुरू होने के बाद एक बार मनरेगा से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ गई हैं।
एपीओ को पद से बर्खास्त करने के बाद जेल भेजा जा चुका है। उसकी फर्म से हुए लेनदेन की भी जांच की जा चुकी है। अब एपीओ की संपत्ति की जांच कराई जा रही है। उस जांच में जो भी निकलकर सामने आएगा, उसी आधार पर सख्त कार्रवाई करेंगे। - पुलकित खरे, डीएम