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पखवाड़ा भर में दस बंदरों की संदिग्ध मौत, जहर देकर हत्या की आशंका
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पूरनपुर। रेलवे स्टेशन के आसपास घूमने वाले 10 बंदरों की 15 दिन में मौत हो चुकी है। आशंका है कि बंदरों की मौत जहर खाने से हुई। बंदरों की लगातार हो रही मौत से पूरे इलाके में गुस्सा है। एक बंदर बेहोशी की हालत में वन्यजीव प्रभाग के रेंजर ने पशु चिकित्सालय इलाज को भेज दिया। वन विभाग की ओर से बंदरों की देखरेख को टीम लगा दी गई है।
रेलवे स्टेशन के आसपास बड़ी संख्या में बंदर खाने की तलाश में विचरण करते हैं। 15 दिन में एक-एक कर बंदरों की हालत खराब होने लगी। फिर उनकी मौत होने लगी। कुछ बंदरों के शव आसपास के दुकानदारों ने रेलवे स्टेशन के पीछे साइकिल स्टैंड के समीप दफना दिए। बंदरों की हालत खराब होने की सूचना वन एवं वन्य जीव प्रभाग के अफसरों को दी गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया। न ही मृत बंदरों का पोस्टमार्टम कराया गया। रविवार को एक बंदर की फिर हालत खराब हो गई। सूचना पर टीम के साथ पहुंचे वन एवं वन्य जीव प्रभाग के रेंजर मोहम्मद अय्यूब हसन ने बेहोशी की हालत में पशु चिकित्सालय में भर्ती कराया। हालांकि बंदर ने कर्मचारी रामभजन के हाथ में काट भी लिया। अब जीवित बंदरों की देखरेख के लिए वन विभाग के कर्मचारियों की टीम को लगाया गया है। बंदरों की मौत पर आसपास के रहने वालों में गुस्सा है। रेलवे स्टेशन के आसपास रहने वालों का कहना है कि बंदरों ने खुद जहरीला पदार्थ तो खाया नहीं होगा। किसी ने बंदरों को जहर दिया है। पूरे मामले की जांच कर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
बंदरों की मौत की सूचना किसी ने नहीं दी। रविवार को बेहोशी की हालत में एक बंदर को पशु चिकित्सालय ले जाकर उसका इलाज कराया गया। पशु चिकित्साधिकारी ने बंदर की जहरीला पदार्थ खाने से हालत खराब होने की जानकारी दी है। अब वहां घूमने वाले बंदरों की देखरेख के लिए टीम को लगाया गया है। मृत बंदरों को दफनाने की जानकारी है। अब उन बंदरों के शव खांखर हो गए हैं। इनका पोस्टमार्टम नहीं कराया जा सकता।
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- मोहम्मद अय्यूब हसन, प्रभारी रेंजर वन एवं वन्य जीव प्रभाग
बंदरों को जहर देना गंभीर अपराध है। मैं अपने नेटवर्क से जहर देने वाले का पता लगाने की कोशिश करूंगी। आम जनता का कोई भी व्यक्ति मेरे व्यक्तिगत मोबाइल नंबर पर जहर देने वाले की गोपनीय सूचना दे सकता है या फिर स्थानीय सांसद के प्रतिनिधि के माध्यम से भी बता सकता है। उस पर सख्त कार्रवाई कराई जाएगी।
- मेनका गांधी, सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री
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रेलवे स्टेशन के आसपास बड़ी संख्या में बंदर खाने की तलाश में विचरण करते हैं। 15 दिन में एक-एक कर बंदरों की हालत खराब होने लगी। फिर उनकी मौत होने लगी। कुछ बंदरों के शव आसपास के दुकानदारों ने रेलवे स्टेशन के पीछे साइकिल स्टैंड के समीप दफना दिए। बंदरों की हालत खराब होने की सूचना वन एवं वन्य जीव प्रभाग के अफसरों को दी गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया। न ही मृत बंदरों का पोस्टमार्टम कराया गया। रविवार को एक बंदर की फिर हालत खराब हो गई। सूचना पर टीम के साथ पहुंचे वन एवं वन्य जीव प्रभाग के रेंजर मोहम्मद अय्यूब हसन ने बेहोशी की हालत में पशु चिकित्सालय में भर्ती कराया। हालांकि बंदर ने कर्मचारी रामभजन के हाथ में काट भी लिया। अब जीवित बंदरों की देखरेख के लिए वन विभाग के कर्मचारियों की टीम को लगाया गया है। बंदरों की मौत पर आसपास के रहने वालों में गुस्सा है। रेलवे स्टेशन के आसपास रहने वालों का कहना है कि बंदरों ने खुद जहरीला पदार्थ तो खाया नहीं होगा। किसी ने बंदरों को जहर दिया है। पूरे मामले की जांच कर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
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बंदरों की मौत की सूचना किसी ने नहीं दी। रविवार को बेहोशी की हालत में एक बंदर को पशु चिकित्सालय ले जाकर उसका इलाज कराया गया। पशु चिकित्साधिकारी ने बंदर की जहरीला पदार्थ खाने से हालत खराब होने की जानकारी दी है। अब वहां घूमने वाले बंदरों की देखरेख के लिए टीम को लगाया गया है। मृत बंदरों को दफनाने की जानकारी है। अब उन बंदरों के शव खांखर हो गए हैं। इनका पोस्टमार्टम नहीं कराया जा सकता।
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- मोहम्मद अय्यूब हसन, प्रभारी रेंजर वन एवं वन्य जीव प्रभाग
बंदरों को जहर देना गंभीर अपराध है। मैं अपने नेटवर्क से जहर देने वाले का पता लगाने की कोशिश करूंगी। आम जनता का कोई भी व्यक्ति मेरे व्यक्तिगत मोबाइल नंबर पर जहर देने वाले की गोपनीय सूचना दे सकता है या फिर स्थानीय सांसद के प्रतिनिधि के माध्यम से भी बता सकता है। उस पर सख्त कार्रवाई कराई जाएगी।
- मेनका गांधी, सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री