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चिकित्सक होने के बाद भी रेफरल यूनिट बना माधोटांडा सीएचसी

Mon, 02 May 2022 12:06 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 02 May 2022 12:06 AM IST
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Madhotanda CHC became a referral unit even after being a doctor
भगवती सिंह। - फोटो : PILIBHIT
कलीनगर। चिकित्सक होने के बाद भी माधोटांडा सीएचसी रेफरल यूनिट बना हुआ है। दो माह में दो चिकित्सकों के बदलने से स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो गई हैं। बीस दिन पूर्व चार्ज लेने वाले डॉ. सहिसपाल का भी गुरूवार को तबादला कर दिया गया। अब आयुष चिकित्सक को सीएचसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। चिकित्सकों के बदलने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित थीं, आयुष चिकित्सक के कार्यक्षेत्र में मेडिकल और इमरजेंसी सेवाएं नहीं आती। नतीजतन सीएचसी के अधीन नेपाल सीमा तक पड़ने वाले करीब पचास गांव के लोगों को अधूरी सेवाएं ही मिल पा रही हैं।
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कलीनगर तहसील क्षेत्र के माधोटांडा गांव में एक मात्र सीएचसी है। एक चिकित्सक के अलावा डेंटल चिकित्सक और दो फार्मासिस्ट की तैनाती चली आ रही है। स्वास्थ्य सेवाओं नाम पर मात्र मरहम पट्टी और सामान्य समस्याओं का उपचार करने की व्यवस्था है। ऐसा तब है जब रोजाना डेढ़ सौ लोगों की ओपीडी के अलावा कई इमरजेंसी केस भी सीएचसी में आते हैं।
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इधर एक माह पूर्व से चिकित्सक विनीत कुमार यादव मास्टर डिग्री में चयन होने के चलते लखनऊ चले गए। उनके जाने के बाद करीब दस दिन तक सीएचसी चिकित्सक विहीन रही। स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए अफसरों ने पूरनपुर से डॉ. सहिसपाल को माधोटांडा की जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने माधोटांडा में सेवाएं शुरू कर व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए आवास को दुरुस्त कराना शुरू किया, लेकिन बीस दिन रुकने के बाद गुरूवार को चिकित्सक का ट्रांसफर न्यूरिया भेज दिया गया। कुरैया अस्पताल में तैनात आयुष चिकित्सक छत्रपाल को माधोटांडा सीएचसी की जिम्मेदारी सौंपी गई।
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लोगों का कहना है कि आयुष चिकित्सक की तैनाती अच्छी खबर है, लेकिन एक एमबीबीएस चिकित्सक की मौजूदगी भी जरूरी है। माधोटांडा गांव में थाने के साथ क्षेत्र का दायरा काफी बड़ा है। एक्सीडेंट की घटनाओं के अलावा अन्य इमरजेंसी केस रोजाना आते हैं। आयुष चिकित्सक के कार्यक्षेत्र में यह सब सेवाएं नहीं आती हैं।
सीमा से पहले गांव के लोग भी माधोटांडा सीएचसी ही आते हैं
वैसे तो माधोटांडा सीएचसी के अधीन करीब पचास गांव के लोग स्वास्थ्य सेवाएं लेते हैं, लेकिन कुछ गांव ऐसे हैं जिन्हें अपनी समस्या के समाधान के लिए लंबी दूरी और समय का खर्च करना पड़ता है। इनमें भारत नेपाल सीमा से सटे बूंदीभूड़, बंदरभोज गांव ऐसे हैं जो माधोटांडा से करीब चालीस किमी दूर हैं। लेकिन लोग माधोटांडा सीएचसी आकर उपचार कराते हैं। दरअसल गभिया सहराई में स्थित पीएचसी में फार्मासिस्ट तैनात है, लेकिन जुकाम, बुखार जैसे सामान्य समस्याओं का उपचार ही हो पाता है।
चिकित्सक न होने से मेडिकल कराने को जाना पड़ता है पूरनपुर
चिकित्सक के न होने की परिस्थितियों में इमरजेंसी मरीज या थाने से संबंधित मेडिकल को रेफर कर पूरनपुर सीएचसी भेजा जाता है। इसमें कई असुविधाओं का सामना भी करना पड़ता है।
कोविड टेक्नीशियन संभाले हैं ब्लड लैब की अतिरिक्त जिम्मेदारी
कोविड को लेकर माधोटांडा सीएचसी में तैयारी जरूर बेहतर है। आक्सीजन प्लांट के अलावा करीब पचास बेड भी व्यवस्थित है। कोविड जांच के लिए टेक्नीशियन आशीष विश्वास जिम्मेेदारी संभाले हैं। अगर गर्भवती महिलाएं ब्लड संबंधित जांच के लिए पहुंचती है तो कोविड टेक्नीशियन ही ब्लड लैब की व्यवस्थाओं को देखते हैं।
इमरजेंसी की हो सुविधाएं, चिकित्सकों की संख्या भी बढ़नी जरूरी
माधोटांडा सीएचसी में चिकित्सकों की कमी है। क्षेत्र का दायरा काफी बढ़ा है। मेडिकल आदि की सुविधा के साथ इमरजेंसी सुविधाएं होनी भी जरूरी हैं। - अहमद वली, माधोटांडा

माधोटांडा की आबादी के साथ सीएचसी के दायरे में काफी गांव आते हैं। लंबे समय से चिकित्सकों की कमी है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए चिकित्सकों की संख्या बढ़ानी चाहिए। - भगवती सिंह, माधोटांडा

माधोटांडा गांव में स्थित सीएचसी का भवन।

माधोटांडा गांव में स्थित सीएचसी का भवन।- फोटो : PILIBHIT

 

अहमद वली।

अहमद वली।- फोटो : PILIBHIT

 

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