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Pilibhit News: 7.34 करोड़ की लागत से बने महिला चिकित्सालय में लटक रहे ताले
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पूरनपुर का नवनिर्मित महिला चिकित्सालय भवन । संवाद
पूरनपुर। नगर में 50 बेड के 7.34 करोड़ रुपये की लागत बने महिला चिकित्सालय भवन में महीनों से ताले लटके हुए है। हैंडओवर होने के करीब आठ महीने बाद भी अब तक महिला चिकित्सालय में फर्नीचर और चिकित्सीय उपकरण नहीं हैं। स्थिति यह है कि अब तक स्टाफ की तैनाती नहीं हुई है। इससे महिला चिकित्सालय का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। ऐसे में परिसर में एक छोटे से भवन में महिला अस्पताल चल रहा है।
पूरनपुर देहात में पूर्व में बने सात बेड के महिला चिकित्सालय भवन को ध्वस्त कर 50 बेड के स्वीकृत महिला अस्पताल का निर्माण 7.34 करोड़ रुपये की लागत से फरवरी 2019 में शुरू कराया गया था। अस्पताल का निर्माण कार्य जून 2021 में पूरा होना था, लेकिन निर्धारित अवधि के दो साल बाद भी अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं हो सका।
करीब आठ महीने पहले नवनिर्मित अस्पताल को हैंडओवर कर लिया गया। तब से अस्पताल भवन पर ताले लटक रहे है। क्षमता के अनुसार अब तक अस्पताल में फर्नीचर, चिकित्सीय उपकरण नहीं आए है। चिकित्सक और अन्य स्टाफ की तैनाती भी नहीं की गई है। करोड़ों की लागत से बना अस्पताल लोगों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है।
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शासन से स्टाफ की तैनाती होनी है। इसके लिए कई बार पत्राचार भी किया जा चुका है। शासन के फैसले नीतिगत होते है। अब चुनाव आचार संहिता चल रही है। इसके बाद फिर पत्राचार शुरू किया जाएगा।
- डॉ. आलोक शर्मा, सीएमओ
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पूरनपुर देहात में पूर्व में बने सात बेड के महिला चिकित्सालय भवन को ध्वस्त कर 50 बेड के स्वीकृत महिला अस्पताल का निर्माण 7.34 करोड़ रुपये की लागत से फरवरी 2019 में शुरू कराया गया था। अस्पताल का निर्माण कार्य जून 2021 में पूरा होना था, लेकिन निर्धारित अवधि के दो साल बाद भी अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं हो सका।
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करीब आठ महीने पहले नवनिर्मित अस्पताल को हैंडओवर कर लिया गया। तब से अस्पताल भवन पर ताले लटक रहे है। क्षमता के अनुसार अब तक अस्पताल में फर्नीचर, चिकित्सीय उपकरण नहीं आए है। चिकित्सक और अन्य स्टाफ की तैनाती भी नहीं की गई है। करोड़ों की लागत से बना अस्पताल लोगों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है।
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शासन से स्टाफ की तैनाती होनी है। इसके लिए कई बार पत्राचार भी किया जा चुका है। शासन के फैसले नीतिगत होते है। अब चुनाव आचार संहिता चल रही है। इसके बाद फिर पत्राचार शुरू किया जाएगा।
- डॉ. आलोक शर्मा, सीएमओ