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गुरुगोविंद सिंह के प्रकाशोत्सव पर सजा दीवान
ब्यूरो, अमर उजाला पीलीभीत
Updated Thu, 08 Jan 2015 11:16 PM IST
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गुरुवार को गुरुद्वारा श्री सिंह सभा में दीवान सजा। इसमें गुरुगोविंद सिंह महाराज के बताए रास्ते पर चलने का आह्वान किया गया। शाम को धार्मिक फिल्म का प्रदर्शन हुआ।
दीवान में गुरुद्वारा श्री सिंह सभा के निधान सिंह, फतेह सिंह के हजूरी रागी जत्था, लखीमपुर खीरी के रंजीत सिंह के रागी जत्था, दमदमा साहिब गुरुद्वारा गोमती गुरुद्वारा के केवल सिंह के रागी जत्था ने गुरुवाणी का शबद कीर्तन किया। गुरमत ज्ञान कालेज के कथावाचक प्रोफेसर नक्षत्र सिंह ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना असहायों की मदद को की थी। लोग उनके उपदेश से भटक रहे हैं। गुरु महाराज के बताए रास्ते पर चलने की जरुरत है। केवल सिंह कोमल के ढाढी जत्थे ने रानी भैणी, दुनीचंद, विचित्र सिंह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि बेमुख होए राम ते लग्गण जन्म विजोग (राम से मुख मोड़ने का हस्र गलत होता है)। इस दौरान लंगर चला। इसमें तमाम लोगों ने प्रसाद लिया। समारोह में प्रधान बलजीत सिंह खैरा, जागीर सिंह, जोगेंद्र सिंह, अमरजीत सिंह माटा, कश्मीर सिंह, सुखविंदर सिंह, पलविंदर सिंह, कुलवंत सिंह, गुरमुख सिंह आदि प्रमुख लोग थे। संचालन मास्टर गुरदयाल सिंह ने किया।
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दीवान में गुरुद्वारा श्री सिंह सभा के निधान सिंह, फतेह सिंह के हजूरी रागी जत्था, लखीमपुर खीरी के रंजीत सिंह के रागी जत्था, दमदमा साहिब गुरुद्वारा गोमती गुरुद्वारा के केवल सिंह के रागी जत्था ने गुरुवाणी का शबद कीर्तन किया। गुरमत ज्ञान कालेज के कथावाचक प्रोफेसर नक्षत्र सिंह ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना असहायों की मदद को की थी। लोग उनके उपदेश से भटक रहे हैं। गुरु महाराज के बताए रास्ते पर चलने की जरुरत है। केवल सिंह कोमल के ढाढी जत्थे ने रानी भैणी, दुनीचंद, विचित्र सिंह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि बेमुख होए राम ते लग्गण जन्म विजोग (राम से मुख मोड़ने का हस्र गलत होता है)। इस दौरान लंगर चला। इसमें तमाम लोगों ने प्रसाद लिया। समारोह में प्रधान बलजीत सिंह खैरा, जागीर सिंह, जोगेंद्र सिंह, अमरजीत सिंह माटा, कश्मीर सिंह, सुखविंदर सिंह, पलविंदर सिंह, कुलवंत सिंह, गुरमुख सिंह आदि प्रमुख लोग थे। संचालन मास्टर गुरदयाल सिंह ने किया।
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