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Pilibhit News: ठोस योजना न होने से हर साल झेलना पड़ता है बाढ़ का दंश

Thu, 03 Jul 2025 11:30 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 03 Jul 2025 11:30 PM IST
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Lack of concrete planning leads to floods every year
जनपद के सीमावर्ती क्षेत्र में गत वर्ष नदी के कटान से क्षतिग्रस्त पड़ा बांध। संवाद
कलीनगर। नेपाल सीमा से सटे गांवों में पिछले कई सालों से बारिश के दौरान नदियां तबाही मचाती हैं। नदी के मुहाने पर बसे बंदरबोज, बूंदीभूड़ और नौजल्हा गांवों में नदी के कारण खतरा अधिक रहता है। लोगों का आरोप है कि बाढ़ नियंत्रण कार्यों के नाम पर लापरवाही बरती जाती है। ठोस परियोजना पर अमल नहीं होने से गांवों के लोगों को खामियाजा भुगतना पड़ता है।
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कलीनगर तहसील क्षेत्र के उत्तराखंड और नेपाल की सीमा से सटे बंदर भोज, बूंदीभूड़, नोजल्हा समेत सीमावर्ती कई गांव ऐसे हैं जो पिछले कई वर्षों से जगबूड़ा और सनेडी नदियों की बाढ़ का दंश झेलते आ रहे हैं। हर साल बाढ़ के समय घरों में पानी भर जाता है। घरेलू सामान बचाना तक मुश्किल हो जाता है।
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परेशानी के बीच ग्रामीण ऊंचे स्थानों का सहारा लेते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में इन नदियों का पानी नेपाल क्षेत्र से होकर शारदा नदी में पहुंच जाता था। इससे स्थिति नहीं बिगड़ती थी। नेपाल सरकार ने अपने क्षेत्र में बाढ़ से बचाव पर ध्यान दिया, जबकि जनपद सीमा में ठोस काम नहीं कराए गए।
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हालांकि पूर्व में पत्थर की बनाई गई ठोकरों से पानी का प्रवाह इन गांवों की ओर काफी हद तक रुका था, लेकिन समय के साथ अभियंताओं ने अपनी नजरें फेर ली। नतीजा यह निकला की नदियां नेपाल से खिसकती हुई भारतीय क्षेत्र की ओर बढ़ने लगीं। इसका खामियाजा सीमावर्ती क्षेत्र की जनता को भी भुगतना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि आवाज उठाने के बाद जब भी प्रशासनिक अफसर दौरे पर आते हैं तो सिंचाई विभाग के अधिकारी उन्हें गुमराह कर देते हैं। आरोप है कि मजबूत कार्य कराने के बजाय पूर्व में नदी ने बांध के जिन हिस्सों को क्षतिग्रस्त किया उसे भी सही नहीं कराया जा सका है। हर साल बड़े पैमाने पर बाढ़ योजनाएं क्षतिग्रस्त हो रही हैं।




--बड़ा बजट मंजूर होने के बाद भी सिंचाई विभाग की ओर से सीमावर्ती क्षेत्र की जनता को राहत देने के लिए ठोस कार्य नहीं कराया जाता। हर साल बाढ़ की बर्बादी का मंजर देखना पड़ता है। - संजय तिवारी, बूंदीभूड़


बाढ़ के दौरान करीब पांच गांवों में पानी भर जाता है। जहरीले सांप भी आ जाते हैं। इससे जान बचाना मुश्किल हो जाता है। इसके बाद भी तबाही रोकने को ठोस कार्य नहीं कराए जाते। - इंद्रजीत राजभर, पूर्व प्रधान, बूंदीभूड़

--नेपाल ने अपने क्षेत्र में निर्माण ऊंचे करा लिए हैं। इससे नोमैंस लैंड से सटे इलाके में जगबूढ़ा नदी का प्रवाह अधिक रहता है। पूर्व में जनपद सीमा में बांध का जो हिस्सा खुल गया था। उसे इस बार बंद नहीं कराया गया है। इंडो नेपाल सीमा पर सड़क बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके पूरा होने के बाद ठोस कार्य पर अमल किया जाएगा।




- आशुतोष कुमार, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड

जनपद के सीमावर्ती क्षेत्र में गत वर्ष नदी के कटान से क्षतिग्रस्त पड़ा बांध। संवाद

जनपद के सीमावर्ती क्षेत्र में गत वर्ष नदी के कटान से क्षतिग्रस्त पड़ा बांध। संवाद

जनपद के सीमावर्ती क्षेत्र में गत वर्ष नदी के कटान से क्षतिग्रस्त पड़ा बांध। संवाद

जनपद के सीमावर्ती क्षेत्र में गत वर्ष नदी के कटान से क्षतिग्रस्त पड़ा बांध। संवाद

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