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कवि सम्मेलनों में चमक बिखेर रहीं एकता, अनीता और सुल्तान जहां
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नीता विश्वकर्मा, कवयित्री
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। कविता और शायरी के क्षेत्र पुरुषों का वर्चस्व है लेकिन जमाना बदल रहा है। छोटे शहरों की युवतियां भी बड़े कवि सम्मेलन के मंचों की शोभा बढ़ा रहीं हैं। बीसलपर, पूरनपुर और पीलीभीत की युवतियों ने कवि सम्मेलन और मुशायरों के मंच पर जिले का मान बढ़ाया है। तीनों कवयित्रियां देश-विदेश में अपना नाम रोशन करने के इरादे से पढ़ने लिखने के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में आगे बढ़ रहीं हैं। अहम बात यह है कि इन तीनों के परिवार में न कोई कवि था न शायर। परिवार में साहित्य की कोई परंपरा नहीं लेकिन खुद की रुचि और स्कूली शिक्षा के दौरान गुरुजनों से मिले प्रोत्साहन ने उन्हें मंचीय कवि बना दिया।
तीन कवयित्रियों का प्रोफाइल
बांसुरी पर लिखी कविता ने दिलाई प्रसिद्धि
पीलीभीत की पहचान बनी बांसुरी पर लिखी कविता से प्रसिद्धि का मुकाम हासिल करने वाली एकता भारती मात्र 26 वर्ष की हैं। 10 वर्ष की उम्र में ही कविता लिखने रुचि पैदा हुई। जब वह बीसलपुर के सरस्वती विद्या मंदिर में 11वीं की छात्रा थीं तब उन्हें साहित्य में रुचि रखने वाले शिक्षक दिनेश गंगवार से प्रोत्साहन दिया। नतीजा कविता पढ़ने के लिए कवि सम्मेलनों के मंचों पर पहुंच गईं। अब तक 50 से अधिक छोटे बड़े कवि सम्मेलनों में भाग लिया। प्रीत बांसुरी के नाम से किताब लिखी जिसे साहित्य जगत में पसंद किया गया है। कई पुरस्कार और सम्मान भी मिले।
एकता भारती (22 वर्ष)
शिक्षा- एमए हिंदी फाइनल की छात्रा, राजकीय डिग्री कॉलेज, बीसलपुर, पीलीभीत
पिता-राजपाल शिक्षामित्र, मां- मीना देवी ग्रहणी
लोकप्रिय कविता- कन्हैया के अधर पर जो सजी थी राधिका बनकर वही मशहूर पीलीभीत की बांसुरी हूं मैं।
कविता और शायरी की मंच पर सुल्तान जहां को मिला मुकाम
अब 26 वर्ष की हो चुकीं सुल्तान जहां ने 21 वर्ष की उम्र में पहली बार नवाबगंज के कवि सम्मेलन में शायरी पढ़ी। लोगों ने पसंद की तो उन्हें कवि सम्मेलन और मुशायरों में बुलाया जाने लगा। देश के कई प्रांतों में अपनी शायरी का जादू चला चुकीं सुल्तान जहां के खानदान में कोई कवि और शायर नहीं रहा लेकिन उनके पिता शब्बीर खान गजल सुना करते थे। मां कैसर जहां गृहणी हैं घर में शेरो-शायरी का कोई माहौल नहीं है लेकिन गजल सुनते सुनते सुल्तान जहां में लिखने का जज्बा पैदा हो गया। अब तो वह मुशायरों और कवि सम्मेलनों में पीलीभीत की शान बनकर सामने आती हैं। राहत इंदौरी और सबीना अदीब उनके पसंदीदा हैं।
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सुल्तान जहां (26 वर्ष)
शिक्षा-एमए समाजशास्त्र
निवासी- पूरनपुर, निजी कंपनी में एमआर, बरेली में सेवारत
लोकप्रिय रचना- जिंदगी तेरे नाम कर दूंगा, प्यार को अपने आम कर दूंगा मुझे धोखा अगर दिया तूने तेरा जीना हराम कर दूंगा।
शृंगार रस की कविताओं से बनी अनीता विश्वकर्मा की पहचान
मुंशी प्रेमचंद और कवि जयशंकर प्रसाद को पढ़कर कविता और साहित्य की ओर प्रेरित हुईं अनीता विश्वकर्मा बेसिक शिक्षा परिषद के सैदपुर स्थित प्राइमरी स्कूल में शिक्षक हैं। पीलीभीत में 2018 में आयोजित कस्तूरी महोत्सव के कवि सम्मेलन मंच पर आईं अनीता विश्वकर्मा ऑनलाइन होने वाले कवि सम्मेलनों के जरिए देश-विदेश तक अपनी पहचान बना रहीं हैं। शृंगार रस की की कविताएं बहुत पसंद की गईं हैं। जो भी संपर्क में आए वह अपने जीवन में कुछ नया पाए और अपनी जिंदगी को इंसानियत के जज्बे के साथ बिताए। इसके लिए प्रेरणा देना ही उनके जीवन का मकसद बन गया है।
अनीता विश्वकर्मा (31 वर्ष)
मां - कंचन शर्मा, पिता- हरिशंकर
शिक्षा - एमए, बीएड, बीटीसी, निवासी पीलीभीत
लोकप्रिय रचना- खतों की देखो खता हमारी, खतों में भेजा गुलाब हमने, जो खत गुलाबी खुले लवों से, तुम्हें भेजा शबाब हमने।
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तीन कवयित्रियों का प्रोफाइल
बांसुरी पर लिखी कविता ने दिलाई प्रसिद्धि
पीलीभीत की पहचान बनी बांसुरी पर लिखी कविता से प्रसिद्धि का मुकाम हासिल करने वाली एकता भारती मात्र 26 वर्ष की हैं। 10 वर्ष की उम्र में ही कविता लिखने रुचि पैदा हुई। जब वह बीसलपुर के सरस्वती विद्या मंदिर में 11वीं की छात्रा थीं तब उन्हें साहित्य में रुचि रखने वाले शिक्षक दिनेश गंगवार से प्रोत्साहन दिया। नतीजा कविता पढ़ने के लिए कवि सम्मेलनों के मंचों पर पहुंच गईं। अब तक 50 से अधिक छोटे बड़े कवि सम्मेलनों में भाग लिया। प्रीत बांसुरी के नाम से किताब लिखी जिसे साहित्य जगत में पसंद किया गया है। कई पुरस्कार और सम्मान भी मिले।
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एकता भारती (22 वर्ष)
शिक्षा- एमए हिंदी फाइनल की छात्रा, राजकीय डिग्री कॉलेज, बीसलपुर, पीलीभीत
पिता-राजपाल शिक्षामित्र, मां- मीना देवी ग्रहणी
लोकप्रिय कविता- कन्हैया के अधर पर जो सजी थी राधिका बनकर वही मशहूर पीलीभीत की बांसुरी हूं मैं।
कविता और शायरी की मंच पर सुल्तान जहां को मिला मुकाम
अब 26 वर्ष की हो चुकीं सुल्तान जहां ने 21 वर्ष की उम्र में पहली बार नवाबगंज के कवि सम्मेलन में शायरी पढ़ी। लोगों ने पसंद की तो उन्हें कवि सम्मेलन और मुशायरों में बुलाया जाने लगा। देश के कई प्रांतों में अपनी शायरी का जादू चला चुकीं सुल्तान जहां के खानदान में कोई कवि और शायर नहीं रहा लेकिन उनके पिता शब्बीर खान गजल सुना करते थे। मां कैसर जहां गृहणी हैं घर में शेरो-शायरी का कोई माहौल नहीं है लेकिन गजल सुनते सुनते सुल्तान जहां में लिखने का जज्बा पैदा हो गया। अब तो वह मुशायरों और कवि सम्मेलनों में पीलीभीत की शान बनकर सामने आती हैं। राहत इंदौरी और सबीना अदीब उनके पसंदीदा हैं।
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सुल्तान जहां (26 वर्ष)
शिक्षा-एमए समाजशास्त्र
निवासी- पूरनपुर, निजी कंपनी में एमआर, बरेली में सेवारत
लोकप्रिय रचना- जिंदगी तेरे नाम कर दूंगा, प्यार को अपने आम कर दूंगा मुझे धोखा अगर दिया तूने तेरा जीना हराम कर दूंगा।
शृंगार रस की कविताओं से बनी अनीता विश्वकर्मा की पहचान
मुंशी प्रेमचंद और कवि जयशंकर प्रसाद को पढ़कर कविता और साहित्य की ओर प्रेरित हुईं अनीता विश्वकर्मा बेसिक शिक्षा परिषद के सैदपुर स्थित प्राइमरी स्कूल में शिक्षक हैं। पीलीभीत में 2018 में आयोजित कस्तूरी महोत्सव के कवि सम्मेलन मंच पर आईं अनीता विश्वकर्मा ऑनलाइन होने वाले कवि सम्मेलनों के जरिए देश-विदेश तक अपनी पहचान बना रहीं हैं। शृंगार रस की की कविताएं बहुत पसंद की गईं हैं। जो भी संपर्क में आए वह अपने जीवन में कुछ नया पाए और अपनी जिंदगी को इंसानियत के जज्बे के साथ बिताए। इसके लिए प्रेरणा देना ही उनके जीवन का मकसद बन गया है।
अनीता विश्वकर्मा (31 वर्ष)
मां - कंचन शर्मा, पिता- हरिशंकर
शिक्षा - एमए, बीएड, बीटीसी, निवासी पीलीभीत
लोकप्रिय रचना- खतों की देखो खता हमारी, खतों में भेजा गुलाब हमने, जो खत गुलाबी खुले लवों से, तुम्हें भेजा शबाब हमने।

सुल्तान जहां, शायर- फोटो : PILIBHIT

एकता भारती कवयित्री। संवाद - फोटो : PILIBHIT