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UP: खूंखार बाघिन का नया ठिकाना कानपुर चिड़ियाघर, पीलीभीत में 45 दिन में तीन लोगों की ली जान
Sat, 26 Jul 2025 12:43 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jul 2025 12:43 PM IST
सार
पीलीभीत के न्यूरिया क्षेत्र में तीन लोगों की जान लेने वाली बाघिन का अब नया ठिकाना कानपुर चिड़ियाघर है। शासन की मंजूरी मिलने के बाद उसे कानपुर भेज दिया गया।
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पिंजरे में कैद बाघिन।
- फोटो : वन विभाग
विस्तार
पीलीभीत में 15 से अधिक गांवों में 45 दिन से दहशत फैलाने वाली बाघिन का नया ठिकाना अब कानपुर का चिड़ियाघर होगा। बेहोश कर पिंजरे में कैद की गई बाघिन को छोड़ने को लेकर ट्रेंकुलाइज एक्सपर्ट और वन अफसरों की संयुक्त रिपोर्ट पर शासन ने मंजूरी दी है। अफसरों का कहना है कि शुक्रवार देर रात बाघिन को लेकर टीम कानपुर के लिए रवाना हो गई।
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न्यूरिया थाना क्षेत्र के गांवों में नौ जून से बाघिन का आतंक शुरू हुआ था। मेवातपुर गांव की सीमा में गन्ने की सिंचाई कर रहे किसान मुकेश कुमार को बाघिन ने अपना पहला शिकार बनाया था। इसके बाद बाघिन महेशपुर, मेवातपुर, टाह पौटा, सैजना, फुलहर, मंडरिया, डंडिया, महेशपुर समेत कई गांव की सीमा में चहलकदमी कर लोगों के लिए दहशत का पर्याय बनी। 45 दिन के अंदर बाघिन ने तीन इंसानों को हमला कर मार दिया था। बाघिन को पकड़ने के लिए वन विभाग की 20 से अधिक टीमें क्षेत्र में खाक छान रहीं थीं।
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13 घंटे चले ऑपरेशन के बाद मिली सफलता
लंबे इंतजार के बाद बृहस्पतिवार सुबह डंडिया गांव में बाघिन की मौजूदगी दिखने के बाद टीम ने उसकी घेराबंदी की थी। करीब 13 घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद देर शाम करीब 6:30 बजे ट्रेंकुलाइज एक्सपर्ट डॉ. नासिर और डॉ. दक्ष गंगवार ने बाघिन को डॉट मार कर बेहोश कर दिया। पिंजरे में कैद करने के बाद बाघिन को कड़ी सुरक्षा के बीच जिला मुख्यालय के सेफ हाउस में लाया गया था।
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पूरी तरह स्वस्थ है बाघिन
चिकित्सकों के पैनल ने उसकी स्वास्थ्य जांच की। बाघिन पूरी तरह से स्वस्थ निकली। उसके बाद बाघिन को छोड़ने को लेकर मंथन किया गया। एक्सपर्ट और दोनों डिविजनों के डीएफओ की ओर से रिपोर्ट शासन को भेजी गई। इस पर शासन ने अनुमति दे दी। इंसानों पर लगातार हमलों को देखते हुए बाघिन को कानपुर चिड़ियाघर छोड़ने का निर्णय लिया गया है। शुक्रवार देर रात ट्रेंकुलाइज एक्सपर्ट डॉ. नासिर और वन अफसरों की निगरानी में बाघिन को कानपुर के लिए रवाना किया जाएगा।
13 घंटे तक ड्रोन समेत तकनीकी संसाधनों से रखी नजर
इंसानों को मारने के साथ ही क्षेत्र में दहशत का पर्याय बनी बाघिन की डंडिया गांव में घेराबंदी की गई थी। इस दौरान विभागीय अफसरों ने हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल किया। लगातार 13 घंटे तक ड्रोन से निगरानी की गई। एक मिनट भी बाघिन को आंखों से ओझल नहीं होने दिया। वन अफसरों ने इस ऑपरेशन को आपरेशन थर्ड आई नाम दिया।
चिकित्सकों के पैनल ने उसकी स्वास्थ्य जांच की। बाघिन पूरी तरह से स्वस्थ निकली। उसके बाद बाघिन को छोड़ने को लेकर मंथन किया गया। एक्सपर्ट और दोनों डिविजनों के डीएफओ की ओर से रिपोर्ट शासन को भेजी गई। इस पर शासन ने अनुमति दे दी। इंसानों पर लगातार हमलों को देखते हुए बाघिन को कानपुर चिड़ियाघर छोड़ने का निर्णय लिया गया है। शुक्रवार देर रात ट्रेंकुलाइज एक्सपर्ट डॉ. नासिर और वन अफसरों की निगरानी में बाघिन को कानपुर के लिए रवाना किया जाएगा।
13 घंटे तक ड्रोन समेत तकनीकी संसाधनों से रखी नजर
इंसानों को मारने के साथ ही क्षेत्र में दहशत का पर्याय बनी बाघिन की डंडिया गांव में घेराबंदी की गई थी। इस दौरान विभागीय अफसरों ने हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल किया। लगातार 13 घंटे तक ड्रोन से निगरानी की गई। एक मिनट भी बाघिन को आंखों से ओझल नहीं होने दिया। वन अफसरों ने इस ऑपरेशन को आपरेशन थर्ड आई नाम दिया।
कम नहीं हो रहा गुस्सा, खाने को दिया बकरे का मांस
बेहोश कर लाई गई बाघिन का स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है। हालांकि बाघिन का गुस्सा कम नहीं हो रहा है। शुक्रवार को उसे खाने के लिए बकरे का मांस दिया गया। थोड़ा बहुत मांस खाया भी, अब उसको छोड़ने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
बेहोश कर लाई गई बाघिन का स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है। हालांकि बाघिन का गुस्सा कम नहीं हो रहा है। शुक्रवार को उसे खाने के लिए बकरे का मांस दिया गया। थोड़ा बहुत मांस खाया भी, अब उसको छोड़ने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
बाघिन का स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है। उसको खाने के लिए बकरे का मांस दिया गया। सुरक्षा के लिहाज से उसे कानपुर के चिड़ियाघर में छोड़ने का निर्णय लिया गया है। अनुमति मिल गई है। देर रात उसे एक्सपर्ट की निगरानी में रवाना कर दिया जाएगा। - भारत कुमार, डीएफओ सामाजिक वानिकी प्रभाग