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Pilibhit News: जंगल की सैर पर लगा विराम, पीटीआर के पर्यटन सत्र में बना रिकाॅर्ड
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सफारी वाहन से जंगल की सैर करते सैलानी। स्रोत सोशल मीडिया
- फोटो : samvad
पीलीभीत। पीटीआर का सात माह तक चला पर्यटन सत्र मंगलवार को आम सैलानियों के लिए समाप्त हो गया। खराब संपर्क मार्गों, जर्जर पुल-पुलियों और सफारी संचालन के बदले नियमों जैसी चुनौतियों के बावजूद इस बार पीटीआर ने पर्यटकों की संख्या और राजस्व, दोनों मामलों में नया रिकॉर्ड बनाया। पूरे सत्र में 56,783 सैलानियों ने जंगल की सैर की, जो पिछले सत्र से 494 अधिक है। अब जंगल की सैर के लिए पर्यटकों को चार माह इंतजार करना होगा। नया पर्यटन सत्र नवंबर में शुरू होगा।
घने जंगल, हरियाली, नहरों का विस्तृत जाल और बाघों की मौजूदगी के लिए देशभर में पहचान बना चुके पीलीभीत टाइगर रिजर्व का वर्ष 2025-26 का पर्यटन सत्र मंगलवार को समाप्त हो गया। करीब सात माह तक चले इस सत्र में हजारों पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया।
सत्र के दौरान चार बाघिनों के साथ दस शावकों की चहलकदमी सैलानियों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण रही। हर वर्ष 15 नवंबर से शुरू होने वाला पर्यटन सत्र करीब सात माह तक संचालित किया जाता है। इस दौरान पीटीआर और वन निगम की देखरेख में जंगल सफारी के लिए व्यवस्थित 100 से अधिक वाहनों के माध्यम से पर्यटकों को जंगल भ्रमण कराया जाता है।
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मिनी गोवा के नाम से प्रसिद्ध चूका बीच, शारदा सागर डैम का प्राकृतिक सौंदर्य और बाघों के दीदार के लिए पीटीआर देशभर के प्रकृति प्रेमियों की पसंद बना हुआ है। इस बार पर्यटन सत्र के दौरान पीटीआर तक पहुंचने वाले प्रमुख मार्गों की जर्जर स्थिति, कई पुल-पुलियों के बंद रहने और सफारी संचालन से जुड़े नए नियमों के कारण शुरुआत में पर्यटकों की संख्या प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी। इसके बावजूद अंतिम आंकड़ों में पीटीआर ने पिछला रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। इस बार सैलानियों के लिए अलग-अलग क्षेत्र में 10 शावकों के साथ चार बाघिन की चहलकदमी भी खास रही।
राजस्व में भी हुआ इजाफा : पर्यटकों की बढ़ी संख्या का असर पीटीआर की आय पर भी दिखाई दिया। इस पर्यटन सत्र में पीटीआर को कुल 1 करोड़ 62 लाख 2 हजार 707 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले सत्र की तुलना में करीब दो लाख रुपये अधिक है। सबसे अधिक राजस्व मुस्तफाबाद स्थित प्रवेश काउंटर से प्राप्त हुआ। संवाद
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घने जंगल, हरियाली, नहरों का विस्तृत जाल और बाघों की मौजूदगी के लिए देशभर में पहचान बना चुके पीलीभीत टाइगर रिजर्व का वर्ष 2025-26 का पर्यटन सत्र मंगलवार को समाप्त हो गया। करीब सात माह तक चले इस सत्र में हजारों पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया।
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सत्र के दौरान चार बाघिनों के साथ दस शावकों की चहलकदमी सैलानियों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण रही। हर वर्ष 15 नवंबर से शुरू होने वाला पर्यटन सत्र करीब सात माह तक संचालित किया जाता है। इस दौरान पीटीआर और वन निगम की देखरेख में जंगल सफारी के लिए व्यवस्थित 100 से अधिक वाहनों के माध्यम से पर्यटकों को जंगल भ्रमण कराया जाता है।
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मिनी गोवा के नाम से प्रसिद्ध चूका बीच, शारदा सागर डैम का प्राकृतिक सौंदर्य और बाघों के दीदार के लिए पीटीआर देशभर के प्रकृति प्रेमियों की पसंद बना हुआ है। इस बार पर्यटन सत्र के दौरान पीटीआर तक पहुंचने वाले प्रमुख मार्गों की जर्जर स्थिति, कई पुल-पुलियों के बंद रहने और सफारी संचालन से जुड़े नए नियमों के कारण शुरुआत में पर्यटकों की संख्या प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी। इसके बावजूद अंतिम आंकड़ों में पीटीआर ने पिछला रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। इस बार सैलानियों के लिए अलग-अलग क्षेत्र में 10 शावकों के साथ चार बाघिन की चहलकदमी भी खास रही।
राजस्व में भी हुआ इजाफा : पर्यटकों की बढ़ी संख्या का असर पीटीआर की आय पर भी दिखाई दिया। इस पर्यटन सत्र में पीटीआर को कुल 1 करोड़ 62 लाख 2 हजार 707 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले सत्र की तुलना में करीब दो लाख रुपये अधिक है। सबसे अधिक राजस्व मुस्तफाबाद स्थित प्रवेश काउंटर से प्राप्त हुआ। संवाद

सफारी वाहन से जंगल की सैर करते सैलानी। स्रोत सोशल मीडिया- फोटो : samvad