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मजबूरी है खटारा बसों से सफर करना 

Tue, 06 Jun 2017 10:29 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
ब्यूरो /पीलीभीत Updated Tue, 06 Jun 2017 10:29 PM IST
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It is compulsion to travel by ridiculous buses
मजबूरी है खटारा बसों से सफर करना
 ट्रेनों की सीमित संख्या के चलते यात्रियों को रोडवेज बस का सहारा लेना पड़ता है लेकिन सुविधाओं से रहित इन खटारा बसों से सफर कितना सुरक्षित है कोई नहीं जानता। ज्यादातर बसों के इमरजेंसी गेट खुलते ही नहीं हैं तो कई बसों में अग्निशमन के यंत्र नहीं है।पीलीभीत रोडवेज डिपो के पास लगभग 110 बसें हैं। इनमें 91 विभागीय और 20 अनुबंधित हैं। रोडवेज की बसों में जो कुछ दिन पूर्व नई आई हैं उनमें दो इमरजेंसी गेट के अलावा अग्निशमन के दो दो सिलेंडर भी हैं लेकिन पुरानी बसों की स्थिति काफी खराब है। लगभग हर बस में इमरजेंसी गेट है लेकिन वह समय पर खुलेगा भी इसका कोई भरोसा नहीं है क्योंकि बस बनने के बाद शायद ही उसे खोलकर कभी चेक किया गया हो। इतना ही नहीं बहुधा इन बसों में सामान भी ढोया जाता है जो अधिकांशत: इमरजेंसी गेट के पास ही  लगा दिया जाता है। ऐसे में यदि इमरजेंसी गेट खोलना पड़े तो मुश्किल ही नहीं असंभव होगा। वहीं इन बसों में अग्निशमन का कोई इंतजाम नहीं है। ड्राइवर केबिन के पास इतने सारे तार लटके रहते हैं जिससे कभी भी दुर्घटना हो सकती है। हालांकि प्रबंधन बसों की नियमित चेकिंग के दावे कर रहा है। एआरएम जुनैद शम्सी ने बताया कि समय समय पर बसों की चेकिंग की जाती है जिसमें इमरजेंसी गेट के साथ ही अन्य सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाता है। उन्होंने बताया पहले की बसों में अग्निशमन की कोई व्यवस्था नहीं थी लेकिन अब जो बसें आ रही हैं वह सभी सुविधाओं से युक्त हैं।
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