{"_id":"60eb2f0b8ebc3eccc61997c6","slug":"investigation-pilibhit-news-bly45280040","type":"story","status":"publish","title_hn":"फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने वाले निलंबित कर्मचारियों की जांच कमेटी गठित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने वाले निलंबित कर्मचारियों की जांच कमेटी गठित
विज्ञापन
पीलीभीत। युवती का फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने के मामले में निलंबित किए गए नगरपालिका के पांच कर्मचारियों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। जांच कमेटी ने निलंबित कर्मचारियों से प्रमाणपत्र किस आधार पर बनाया गया था। इसका लिखित जवाब मांगा है। इसके अलावा जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र पटल पर दूसरे कर्मचारी को नियुक्त कर दिया है।
शहर के मोहल्ला शेर मोहम्मद निवासी अमरीन का उसके भाई व नगरपालिका में मृतक आश्रित में लगे उसके भाई शकील ने पिता की पेंशन बहन के नाम करने के लिए वर्ष 2018 में जन्म प्रमाणपत्र के लिए नगरपालिका में आवेदन किया था। इस पर पटल सहायक राहुल सक्सेना ने सफाई नायक विशेषपाल, पंजीकरणकर्ता नाजिम अली और वसीर की रिपोर्ट पर अमरीन की जन्मतिथि वर्ष 2002 दिखाते हुए जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिया। जबकि उसकी मां की मौत 2001 में ही हो गई थी। इसके बाद जब पेंशन में पेंच फंसा, तो 2019 में बिना जांच के दोबारा संशोधन कर जन्मतिथि की सन 1996 कर दी गई। बरेली कमिश्नरी में मामला पकड़ में आने के बाद आला अधिकारियों के निर्देश पर कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया। इस प्रकरण की जांच करने के लिए ईओ ने जांच कमेटी में जेई निर्माण इंद्रजीत, सफाई निरीक्षक साबिर अली और टैक्स निरीक्षक करनपाल को शामिल किया है। कमेटी ने अब उक्त लोगों ने प्रमाणपत्र बनवाने के दौरान दिए गए अभिलेख और प्रमाण जारी करने के संबंध में लिखित जवाब मांगा है। इसके अलावा पटल पर नगरपालिका के कर्मचारी शंकर राही को जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र का चार्ज दे दिया गया है। ईओ सुरेंद्र प्रताप ने बताया कि जांच कमेटी गठित कर दी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। पटल पर दूसरे कर्मचारियों को नियुक्त कर दिया है।
विज्ञापन
शहर के मोहल्ला शेर मोहम्मद निवासी अमरीन का उसके भाई व नगरपालिका में मृतक आश्रित में लगे उसके भाई शकील ने पिता की पेंशन बहन के नाम करने के लिए वर्ष 2018 में जन्म प्रमाणपत्र के लिए नगरपालिका में आवेदन किया था। इस पर पटल सहायक राहुल सक्सेना ने सफाई नायक विशेषपाल, पंजीकरणकर्ता नाजिम अली और वसीर की रिपोर्ट पर अमरीन की जन्मतिथि वर्ष 2002 दिखाते हुए जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिया। जबकि उसकी मां की मौत 2001 में ही हो गई थी। इसके बाद जब पेंशन में पेंच फंसा, तो 2019 में बिना जांच के दोबारा संशोधन कर जन्मतिथि की सन 1996 कर दी गई। बरेली कमिश्नरी में मामला पकड़ में आने के बाद आला अधिकारियों के निर्देश पर कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया। इस प्रकरण की जांच करने के लिए ईओ ने जांच कमेटी में जेई निर्माण इंद्रजीत, सफाई निरीक्षक साबिर अली और टैक्स निरीक्षक करनपाल को शामिल किया है। कमेटी ने अब उक्त लोगों ने प्रमाणपत्र बनवाने के दौरान दिए गए अभिलेख और प्रमाण जारी करने के संबंध में लिखित जवाब मांगा है। इसके अलावा पटल पर नगरपालिका के कर्मचारी शंकर राही को जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र का चार्ज दे दिया गया है। ईओ सुरेंद्र प्रताप ने बताया कि जांच कमेटी गठित कर दी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। पटल पर दूसरे कर्मचारियों को नियुक्त कर दिया है।
विज्ञापन