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वनकर्मियों को दी कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी
पीलीभ्ाीत ब्यूराो
Updated Sat, 22 Apr 2017 10:46 PM IST
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कायऱ्र्यश्ााला
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वन एवं इसके बाहर जंगल से जुड़ी घटनाओं पर कार्रवाई के दौरान वनकर्मी कई गलतियां कर देते हैं जिससे अपराधियों को लाभ मिल जाता है। इसके लिए वनसंरक्षक वीके सिंह के निर्देश पर शनिवार को मंडलीय विधिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। पीलीभीत टाईगर रिजर्व कार्यालय में हुई कार्यशाला में वन संरक्षक, एवं डीएफओ के अलावा दुधवा, पीलीभीत व शाहजहांपुर से आए वन विभाग से जुड़े अधिवक्ताओं ने वन एवं वन्यजीव अधिनियमों की विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही विवेचना एवं केस लिखते समय की जाने वाली छोटी छोटी गलतियों के बारे में बताया। वन संरक्षक ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य विभागीय अधिकारियों को नियमों एवं इसमें हुए बदलाव की जानकारी देना है। कार्यशाला से वनाधिकारियों की कार्यक्षमता में बढ़ोत्तरी होगी साथ ही अपराध व अपराधों पर भी अंकुश लगेगा। कार्यशाला में वनसंरक्षा के अलावा डीएफओ आदर्श कुमार, कैलाश प्रकाश, बीएम सिंह, एसडीओ केपी सिंह, मंडल के सभी रेंजर एवं डिप्टी रेंजर मौजूद रहे।
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कार्यशाला में हावी रही अव्यवस्थाएं
वन्यजीव संरक्षण पर हुई विधिक कार्यशाला के लिए वन विभाग के सभागार में तैयारियां की गई थीं लेकिन प्रतिभागियों की संख्या काफी अधिक होने के चलते एक वक्त पर भोजन के लिए पंडाल की मेज हटवाकर कुर्सियां लगाई गई। इसके चलते 11 बजे शुरू होने वाली कार्यशाला 1.30 बजे के बाद शुरू हो सकी।
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वन्यजीव संरक्षण की कार्यशाला में मुर्गे की दावत
वन विभाग की ओर से वन एवं वन्यजीव संरक्षण को लेकर कार्यशाला हुई थी। इसमें वन्यजीवों की हत्या एवं इससे जुड़े अपराध रोकने पर चर्चा हुई। वहीं कार्यशाला के बाद मुर्गे की दावत उड़ाई गई। इसपर कई वनकर्मी काना फूसी करते नजर आए। इसमें बड़ा सवाल यह भी है कि जब शहर में मीट की दुकानें बंद हैं और बकरे मुर्गे नहीं काटे जा रहे हैं तो मुर्गे का मीट आया कहां से।
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कार्यशाला में हावी रही अव्यवस्थाएं
वन्यजीव संरक्षण पर हुई विधिक कार्यशाला के लिए वन विभाग के सभागार में तैयारियां की गई थीं लेकिन प्रतिभागियों की संख्या काफी अधिक होने के चलते एक वक्त पर भोजन के लिए पंडाल की मेज हटवाकर कुर्सियां लगाई गई। इसके चलते 11 बजे शुरू होने वाली कार्यशाला 1.30 बजे के बाद शुरू हो सकी।
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वन्यजीव संरक्षण की कार्यशाला में मुर्गे की दावत
वन विभाग की ओर से वन एवं वन्यजीव संरक्षण को लेकर कार्यशाला हुई थी। इसमें वन्यजीवों की हत्या एवं इससे जुड़े अपराध रोकने पर चर्चा हुई। वहीं कार्यशाला के बाद मुर्गे की दावत उड़ाई गई। इसपर कई वनकर्मी काना फूसी करते नजर आए। इसमें बड़ा सवाल यह भी है कि जब शहर में मीट की दुकानें बंद हैं और बकरे मुर्गे नहीं काटे जा रहे हैं तो मुर्गे का मीट आया कहां से।
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