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Pilibhit News: पीटीआर में बढ़ी हाथियों की दस्तक, संरक्षण के साथ संघर्ष की भी चिंता

Tue, 14 Jul 2026 01:03 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2026 01:03 AM IST
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Increased elephant presence in PTR; concerns arise regarding both conservation and conflict.
पीटीआर से सटे इलाके में खेतों में घूमते हाथी। फाइल फोटो
माला और महोफ रेंज में लंबे समय तक ठहर रहे झुंड, जानकार मान रहे बदलते व्यवहार का संकेत
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पीलीभीत। नेपाल से आने वाले जंगली हाथियों की गतिविधियों में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। वर्षों तक सीमापार प्राकृतिक कॉरिडोर का उपयोग कर किशनपुर वन्यजीव विहार तक पहुंचने वाले हाथी अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व की माला और महोफ रेंज में लंबे समय तक रुक रहे हैं। विशेषज्ञ इसे बदलते आवासीय व्यवहार का संकेत मान रहे हैं। उनका मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति आगे भी जारी रहती है तो पीटीआर उत्तर भारत में बाघों के साथ-साथ हाथी संरक्षण का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। हालांकि इसके साथ मानव-हाथी संघर्ष जैसी चुनौतियां भी बढ़ेंगी।

भारत-नेपाल सीमा पर स्थित पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) लंबे समय से सीमापार वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। विशेष रूप से नेपाल के शुक्लाफांटा क्षेत्र से आने वाले जंगली हाथी हर वर्ष हरीपुर-बराही क्षेत्र से होते हुए किशनपुर वन्यजीव विहार तक पहुंचते रहे हैं। कुछ समय वहां बिताने के बाद वे उसी मार्ग से वापस नेपाल लौट जाते थे। यह दशकों से चला आ रहा एक स्थापित मौसमी प्रवास रहा है, जिसे स्थानीय ग्रामीणों और वन विभाग ने लगातार देखा है। हाल के वर्षों में हाथियों की गतिविधियों में एक नया बदलाव सामने आया है।
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हाथियों के कई झुंड अब केवल बराही, हरीपुर और किशनपुर तक सीमित नहीं रह रहे, बल्कि पीटीआर की माला और महोफ में लंबे समय तक ठहरने लगे हैं। वन विभाग के फील्ड इनपुट और लगातार देखी जा रही गतिविधियां इस बात की ओर संकेत कर रही हैं कि हाथी इन क्षेत्रों को केवल गुजरने के रास्ते के रूप में नहीं, बल्कि संभावित आवास के रूप में भी अपनाने लगे हैं।
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डीएफओ मनीष सिंह का कहना है कि हाथियों की महोफ और माला रेंज में चहलकदमी बढ़ी है। इसपर विभागीय मंथन के साथ उनकी निगरानी को लेकर भी गंभीरता बरती जा रही है। संवाद


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भोजन, पानी और सुरक्षित आवास बन रहे प्रमुख कारण
वन्यजीव जानकार अख्तर मियां के अनुसार, किसी भी वन्यजीव द्वारा नया क्षेत्र अपनाने के पीछे भोजन, जल स्रोत और सुरक्षित आवास सबसे महत्वपूर्ण कारण होते हैं। माला और महोफ रेंज घने साल के जंगलों, विस्तृत घासभूमियों और प्राकृतिक जल स्रोतों से समृद्ध हैं। इन क्षेत्रों का वन क्षेत्र अपेक्षाकृत चौड़ा है और पिछले कुछ वर्षों में संरक्षण एवं आवास सुधार के कार्यों से यहां की पारिस्थितिकी और मजबूत हुई है। ऐसे में हाथियों को यहां पर्याप्त भोजन, पानी और अपेक्षाकृत सुरक्षित वातावरण मिल रहा है।
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