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नगर पंचायत का दर्ज मिल गया...अभी इतने से ही संतोष करें
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नगर पंचायत नौगवा पकड़िया के सरकारी स्कूलों के पास लगे गंदगी के ढेर। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। भले ही ग्राम पंचायत नौगवा पकडिय़ा के नाम की तरक्की होने दो साल पहले नगर पंचायत बन गई। मगर विकास के लिए अफसरों की उपेक्षाओं का शिकार है। शुद्धपेज जल की सुविधा हो या फिर सड़कों की मरम्मत और नालों की सफाई। पूरी तरह चौपट है। शुरूआत में शासन ने डेढ़ करोड़ का बजट भेजा था। इससे नाम मात्र का कार्यालय तो बना दिया गया, मगर विकास के नाम पर खेल कर दिया।
शहर से सटी ग्राम पंचायत नौगवा पकडिय़ा करीब चार किलोमीटर के एरिया में बसी हुई है। इसमें करीब 40 हजार की आबादी है। मानक पूरे होने पर इस ग्राम पंचायत को नगर पंचायत का दर्जा देने के लिए 2013 में कवायद शुरू हुई थी। मगर अज्ञात कवायद को स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद 2018 में फिर से कवायद शुरू हुई और शासन को प्रस्ताव भेजा गया। दिसंबर 2019 में कैबिनेट से मंजूरी तो मिल गई, ग्राम प्रधान के अधिकार बंद नहीं हो सके।
नवंबर 2020 में डीएम ने जिला पंचायत से अगल कर दिया गया। इससे नौगवा पकडिय़ा ग्राम पंचायत से पूर्ण रूप से नगर पंचायत बन गई। नगर पालिका पीलीभीत के ईओ को अतिरिक्त चार्ज दे दिया गया। इसके बाद नगर पंचायत स्तर का काम शुरू हो गया। मगर अभी तक परसीमन तक नहीं कराया गया। जबकि हर माह 20 से 25 लाख का बजट शासन से भेजा जाता है। नगर पंचायत निवासी संदीप सक्सेना ने बताया कि नगर पंचायत में सफाई के लिए ठेली और टैक्टर ट्रॉली खरीदे गए, वह खड़े खड़े गल चुके है। मगर उनका इस्तेमाल नहीं किया गया है। नगर पंचायत बनने के बाद विकास कार्य के नाम पर बजट की भी आमद शुरू हो गई, मगर गांव की तस्वीर साल बीतने के बाद भी नहीं बदली है।
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नगर पंचायत में यह कॉलोनिया है शामिल
नौगवा पकडिय़ा नगर पंचायत में ईदगाह कांशीराम कॉलोनी, वसुंधरा कॉलोनी, ट्रांसपोर्ट नगर कांशीराम कॉलोनी, राम वाटिका, मंडी समिति कॉलोनी, बस्तीराम राइस मिल कॉलोनी, शिवाजी कॉलोनी, असम चौराहा, इस्लाम नगर शामिल है। हालांकि दोनों काशीराम कॉलोनी बाद में शामिल की गईं है।
सात करोड़ खर्च होने के बाद भी नहीं मिला शुद्धपेय जल
ग्राम पंचायत के दौरान 2013 में सात करोड़ की लागत से टंकी का निर्माण शुरू हुआ था। इसके बाद 2018 में निर्माण काम पूरा हो गया था। ग्राम पंचायत के हैंडओंवर कर दिया गया था। मगर लोगों को इस टंकी का पानी नसीब नहीं हुआ है। जब नगर पंचायत होने के बाद पानी की सप्लाई शुुरू करने की कवायद शुरू की कई, तो पाइप लाइन समेत कई खामियां मिली। अब नगर पंचायत के अधिकारियों का दावा है कि जल निगम के जेई से मरम्मत को लेकर प्रस्ताव बनाया जा रहा है।
एक नजर में नगर पंचायत
आबादी 40 हजार
वोटर 15 हजार
घर 2500 करीब
स्कूल दो प्राथमिक
स्कूल एक जूनियर
स्कूल एक कंपोजिट
प्राइवेट स्कूल पांच
राशन की दुकान 03
सफाई को लेकर लगातार कर्मचारियों को भेजा जा रहा है। 25 कर्मचारी और दो सफाई नायक तैनात किए गए है। कई सड़कों का प्रस्ताव बनाकर भेजा जा रहा है। इसके बाद भी निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया जाएगा। टैंक को लेकर भी जेई से प्रस्ताव बनाया जा रहा। जिससे सप्लाई शुरू हो सके। - सुरेंद्र प्रताप, प्रभारी ईओ
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शहर से सटी ग्राम पंचायत नौगवा पकडिय़ा करीब चार किलोमीटर के एरिया में बसी हुई है। इसमें करीब 40 हजार की आबादी है। मानक पूरे होने पर इस ग्राम पंचायत को नगर पंचायत का दर्जा देने के लिए 2013 में कवायद शुरू हुई थी। मगर अज्ञात कवायद को स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद 2018 में फिर से कवायद शुरू हुई और शासन को प्रस्ताव भेजा गया। दिसंबर 2019 में कैबिनेट से मंजूरी तो मिल गई, ग्राम प्रधान के अधिकार बंद नहीं हो सके।
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नवंबर 2020 में डीएम ने जिला पंचायत से अगल कर दिया गया। इससे नौगवा पकडिय़ा ग्राम पंचायत से पूर्ण रूप से नगर पंचायत बन गई। नगर पालिका पीलीभीत के ईओ को अतिरिक्त चार्ज दे दिया गया। इसके बाद नगर पंचायत स्तर का काम शुरू हो गया। मगर अभी तक परसीमन तक नहीं कराया गया। जबकि हर माह 20 से 25 लाख का बजट शासन से भेजा जाता है। नगर पंचायत निवासी संदीप सक्सेना ने बताया कि नगर पंचायत में सफाई के लिए ठेली और टैक्टर ट्रॉली खरीदे गए, वह खड़े खड़े गल चुके है। मगर उनका इस्तेमाल नहीं किया गया है। नगर पंचायत बनने के बाद विकास कार्य के नाम पर बजट की भी आमद शुरू हो गई, मगर गांव की तस्वीर साल बीतने के बाद भी नहीं बदली है।
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नगर पंचायत में यह कॉलोनिया है शामिल
नौगवा पकडिय़ा नगर पंचायत में ईदगाह कांशीराम कॉलोनी, वसुंधरा कॉलोनी, ट्रांसपोर्ट नगर कांशीराम कॉलोनी, राम वाटिका, मंडी समिति कॉलोनी, बस्तीराम राइस मिल कॉलोनी, शिवाजी कॉलोनी, असम चौराहा, इस्लाम नगर शामिल है। हालांकि दोनों काशीराम कॉलोनी बाद में शामिल की गईं है।
सात करोड़ खर्च होने के बाद भी नहीं मिला शुद्धपेय जल
ग्राम पंचायत के दौरान 2013 में सात करोड़ की लागत से टंकी का निर्माण शुरू हुआ था। इसके बाद 2018 में निर्माण काम पूरा हो गया था। ग्राम पंचायत के हैंडओंवर कर दिया गया था। मगर लोगों को इस टंकी का पानी नसीब नहीं हुआ है। जब नगर पंचायत होने के बाद पानी की सप्लाई शुुरू करने की कवायद शुरू की कई, तो पाइप लाइन समेत कई खामियां मिली। अब नगर पंचायत के अधिकारियों का दावा है कि जल निगम के जेई से मरम्मत को लेकर प्रस्ताव बनाया जा रहा है।
एक नजर में नगर पंचायत
आबादी 40 हजार
वोटर 15 हजार
घर 2500 करीब
स्कूल दो प्राथमिक
स्कूल एक जूनियर
स्कूल एक कंपोजिट
प्राइवेट स्कूल पांच
राशन की दुकान 03
सफाई को लेकर लगातार कर्मचारियों को भेजा जा रहा है। 25 कर्मचारी और दो सफाई नायक तैनात किए गए है। कई सड़कों का प्रस्ताव बनाकर भेजा जा रहा है। इसके बाद भी निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया जाएगा। टैंक को लेकर भी जेई से प्रस्ताव बनाया जा रहा। जिससे सप्लाई शुरू हो सके। - सुरेंद्र प्रताप, प्रभारी ईओ