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तराई के मुख्य मार्ग पर बाघ की मौजूदगी से तराईवासी दहशत में

Tue, 07 Mar 2017 10:36 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
ब्यूरो /पीलीभीत Updated Tue, 07 Mar 2017 10:36 PM IST
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तराई क्षेत्र के प्रमुख मार्ग पर बाघ के आए दिन हो रहे हमलों के बाद तराईवासी दहशत में है। रोजाना  सैकड़ों लोग इस मार्ग से तहसील मुख्यालय जाते हैं। बाघ की मौजूदगी भी जंगल के बाहरी इलाके में एक माह से बनी हुई हैं। वहीं वन महकमा मात्र हाथियों पर बैठकर कांबिंग की औपचारिकताएं निभा रहा है, इसको लेकर लोगों में रोष है। टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हुई है।, ऐसा वन विभाग के सूत्र बताते हैं। जानकारों के मुताबिक जो बाघ अधिक ताकतवर होता हैं वह अपने वास स्थल में बूढ़े बाघ या मादा से अलग हुए बाघों की मौजूदगी से खुश नहीं रहता और उनको खदेड़ देता हैं। कभी-कभी क्षेत्र को लेकर संघर्ष भी होता है। इस संघर्ष में कमजोर बाघ की मौत भी हो जाती है। ऐसा टाइगर रिजर्व के जंगलों में पिछले वर्षों में होता रहा हैं। इधर तराई का लैहारी मार्ग, जो तराईवासियों के लिए पूरनपुर जाने वाला मुख्य मार्ग हैं, पर रोजाना सैकड़ों लोगों का आवागमन होता है। इस मार्ग पर बाघ के बढ़ रहे हमलों से तराईवासी दहशत में हैं। सुरक्षा के मद्देनजर लोग जत्थों के रूप में आ जा रहे हैं। इसी मार्ग के किनारे अर्जुनपुर, कीरतपुर इलाका भी पड़ता है। जहां एक माह से बाघ की मौजूदगी देखी जा रही है। मजबूरन यहां के लोगों को शाम होते ही घरों में दुबकना पड़ रहा है। हालांकि वन विभाग ने टाइगर रिजर्व बनने के बाद इस तराई जाने वाले मार्ग को बन्द करने के प्रयास किया था, लेेकिन जनता के दबाव के बाद इसे खोल दिया गया था। वहीं वन विभाग हाथियों पर बैठकर कांबिंग की औपचारिकताएं निभा रहा है। मैदानी इलाकों में बाघ प्रजनन काल होने के कारण अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं या ताकतवर बाघ द्वारा जंगलों से खदेड़े गए हैं, महकमे ने अभी तक इस पर गंभीरता से मंथन नहीं किया है। आने वाले समय में यह लापरवाही मानव के साथ-साथ बाघों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इधर डेढ़ माह से इलाके में बाघ की मौजूदगी से तराई व इसके आसपास के ग्रामीणों पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। यदि समय रहते वन विभाग नहीं चेता और बाघ ने कोई बड़ी घटना को अंजाम दिया तो टाईगर रिजर्व प्रशासन के साथ प्रशासन के लिए सिरदर्द बन सकता है।
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