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Pilibhit News: पीटीआर से सटे इलाके में बेनामी संपत्तियों को बेचने की फिराक में इल्हाम
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पीलीभीत। डीआईओएस कार्यालय के करोड़ों रुपये के घोटाले का मुख्य आरोपी इल्हाम ने लाखों रुपये पीटीआर से सटे इलाके में जमीनों को खरीदने पर भी खपाए हैं। खातों की जांच के दौरान पुलिस ने जमीन के विक्रेताओं से भी पूछताछ की। बताया जाता है कि यहां जमीन इल्हाम ने अपने अन्य परिचितों के नाम से खरीदी। वह इन जमीनों को बिक्री करने की फिराक में है।
डीआईओएस कार्यालय में चपरासी से बाबू बनकर इल्हाम शम्सी ने करीब आठ सालों तक विभिन्न मदों के करोड़ों रुपये ठिकाने लगा दिए। इल्हाम बेधड़क डीआईओएस से लेकर वित्त एवं लेखा विभाग, कोषागार के अधिकारियों और कर्मचारियों के मेज के पेज से गुजरे वाउचर पर हस्ताक्षर कराकर धनराशि को अपनी पत्नियों समेत रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में भेजता रहा। आठ साल तक चले इस खेल की किसी को भनक नहीं लग सकी। फरवरी 2026 में उसकी एक पत्नी अर्शी के खाते में एक करोड़ की धनराशि का ट्रांजेक्शन होने पर बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारियों को शक हुआ। तब इस घोटाले का खुलासा हो सका था। इसके बाद डीएम की सख्ती पर शहर कोतवाली में इल्हाम और उसकी पत्नी अर्शी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने विवेचना शुरू कर जांच को आगे बढ़ाया तो करीब 50 से अधिक खातों में 30 करोड़ की धनराशि भेजे जाने की बात सामने आई। पुलिस की टीमों ने खातों की जांच कर पांच करोड़ से अधिक की धनराशि को फ्रीज कराया। इसके साथ मामले में अबतक अर्शी के अलावा उसकी दो अन्य पत्नियों समेत आठ महिला आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। संवाद
जांच में इस बात से उठा पर्दा
जांच में यह भी सामने आया कि इल्हाम ने कुछ धनराशि को माधोटांडा क्षेत्र के लोगों के खातों में भी ट्रांजेक्शन किया था। जांच के आधार पर पुलिस ने उन लोगों को चिह्नित किया। इसपर सामने आया कि इल्हाम ने कलीनगर क्षेत्र में पीटीआर के सटे इलाके में जमीनी खरीदी थी, लेकिन यह जमीनें उसने अपने नाम न कराकर अपने परिचितों के नाम खरीदी। पुलिस ने विक्रेता से धनराशि से संबंधित जानकारी जुटाई थी। जांच मेें यह सामने आया है कि इल्हाम इन जमीनों को गुपचुप तरीके से बेचने की फिराक में है। हालांकि इसकी भनक लगती ही पुलिस सक्रिय हो गई है। संवाद
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मामले में जुड़े लोगों को चिह्नित करने की प्रक्रिया है जारी : कोतवाल
कोतवाल सत्येंद्र कुमार ने बताया कि आरोपी द्वारा जिन खातों में धनराशि भेजी गई। उसी के आधार पर लोगों को चिह्नित किया जा रहा है। अभी तक की जांच में जमीनों पर लगाई गई धनराशि को भी ट्रेस किया गया है, जो भी तथ्य सामने आ रहे उसपर गहनता से जांच कराई जा रही है।
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डीआईओएस कार्यालय में चपरासी से बाबू बनकर इल्हाम शम्सी ने करीब आठ सालों तक विभिन्न मदों के करोड़ों रुपये ठिकाने लगा दिए। इल्हाम बेधड़क डीआईओएस से लेकर वित्त एवं लेखा विभाग, कोषागार के अधिकारियों और कर्मचारियों के मेज के पेज से गुजरे वाउचर पर हस्ताक्षर कराकर धनराशि को अपनी पत्नियों समेत रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में भेजता रहा। आठ साल तक चले इस खेल की किसी को भनक नहीं लग सकी। फरवरी 2026 में उसकी एक पत्नी अर्शी के खाते में एक करोड़ की धनराशि का ट्रांजेक्शन होने पर बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारियों को शक हुआ। तब इस घोटाले का खुलासा हो सका था। इसके बाद डीएम की सख्ती पर शहर कोतवाली में इल्हाम और उसकी पत्नी अर्शी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने विवेचना शुरू कर जांच को आगे बढ़ाया तो करीब 50 से अधिक खातों में 30 करोड़ की धनराशि भेजे जाने की बात सामने आई। पुलिस की टीमों ने खातों की जांच कर पांच करोड़ से अधिक की धनराशि को फ्रीज कराया। इसके साथ मामले में अबतक अर्शी के अलावा उसकी दो अन्य पत्नियों समेत आठ महिला आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। संवाद
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जांच में इस बात से उठा पर्दा
जांच में यह भी सामने आया कि इल्हाम ने कुछ धनराशि को माधोटांडा क्षेत्र के लोगों के खातों में भी ट्रांजेक्शन किया था। जांच के आधार पर पुलिस ने उन लोगों को चिह्नित किया। इसपर सामने आया कि इल्हाम ने कलीनगर क्षेत्र में पीटीआर के सटे इलाके में जमीनी खरीदी थी, लेकिन यह जमीनें उसने अपने नाम न कराकर अपने परिचितों के नाम खरीदी। पुलिस ने विक्रेता से धनराशि से संबंधित जानकारी जुटाई थी। जांच मेें यह सामने आया है कि इल्हाम इन जमीनों को गुपचुप तरीके से बेचने की फिराक में है। हालांकि इसकी भनक लगती ही पुलिस सक्रिय हो गई है। संवाद
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मामले में जुड़े लोगों को चिह्नित करने की प्रक्रिया है जारी : कोतवाल
कोतवाल सत्येंद्र कुमार ने बताया कि आरोपी द्वारा जिन खातों में धनराशि भेजी गई। उसी के आधार पर लोगों को चिह्नित किया जा रहा है। अभी तक की जांच में जमीनों पर लगाई गई धनराशि को भी ट्रेस किया गया है, जो भी तथ्य सामने आ रहे उसपर गहनता से जांच कराई जा रही है।