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इलाज कराना है तो मरीज को अब कराना होगा बॉयोमैट्रिक

Sun, 13 Dec 2020 12:19 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 13 Dec 2020 12:19 AM IST
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If treatment is to be given, the patient will now have to undergo biometric
पीलीभीत। आयुष्मान योजना में फर्जीबाड़ा रोकने के लिए शासन-प्रशासन तमाम कोशिशें करने में जुटा है। एंटी फ्रॉड यूनिट के गठन के बाद शासन ने गोल्डन कार्ड के अलावा अब इलाज करने वाले अस्पताल को बॉयोमेट्रिक की सुविधा शुरू करनी होगी। अब अगर कोई भी लाभार्थी इलाज कराने आता है तो पहले उसका बॉयोमेट्रिक करना होगा। तभी अस्पताल में हुए इलाज का अस्पताल को भुगतान किया जाएगा। अगर ऐसा नहीं किया गया तो क्लेम का दावा निरस्त भी हो सकता है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष्मान योजना की शुरुआत इसलिए की थी कि गरीब और असहाय लोगों को बेहतर इलाज मिल सके। इस योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त में किया जाता है। सरकारी ही नहीं प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीज इलाज करा सकते हैं, जिसका भुगतान सरकार करती है।
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आयुष्मान योजना में जनपद में आठ लाख 46 हजार लाभार्थी हैं। योजना के तहत एक लाख 45 हजार लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड भी जारी किए गए हैं। इनमें 10 हजार 773 लाभांवित भी हो चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि कुछ मरीज अस्पतालों से मिलकर या अस्पताल मरीजों से मिलकर इस योजना में फर्जीबाड़ा कर रहे हैं। साठगांठ के तहत मामूली इलाज का लंबा चौड़ा बिल बनाकर सरकार को भेजा जा रहा है। इसी फर्जीबाड़े को रोकने के लिए शासन ने अब निर्देश दिए हैं कि आयुष्मान योजना के पैनल से जुड़े अस्पतालों को बॉयोमेट्रिक की सुविधा शुरू करनी होगी। अब कार्ड की फोटो कॉपी से काम नहीं चलेगा। इलाज के दौरान अस्पताल प्रशासन को अब गोल्डन कार्ड के अलावा मरीज की बॉयोमेट्रिक भी करनी होगी। इसके बाद पूरी डिटेल भरकर अस्पताल क्लेम के लिए भेजेंगे। फिर मरीज से जानकारी करने के बाद ही भेजे गए क्लेम का भुगतान किया जाएगा। खास बात यह है कि बॉयोमेट्रिक होने के बाद आधार कार्ड की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
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शासन से दिशा निर्देश मिले हैं कि पैनल से जुड़े जितने भी अस्पताल हैं सभी को बॉयोमेट्रिक मशीन की सुविधा अपने यहां शुरू करनी होगी। हालांकि कई जगह यह सुविधा पहले से भी है। अब इलाज के वक्त मरीज को बॉयोमेट्रिक करानी होगी, जिससे आयुष्मान कार्ड में फर्जीबाड़े के गुंजाइश नहीं रहेगी, वहीं अस्पताल प्रबंधन का भी जल्द भुगतान हो सकेगा।
- डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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