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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   How to accomplish the goal of the ODF

कैसे पूरा होगा ओडीएफ का लक्ष्य

Thu, 15 Jun 2017 06:56 PM IST
पीलीभ्ाीत ब्यूराो
पीलीभ्ाीत ब्यूराो Updated Thu, 15 Jun 2017 06:56 PM IST
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 जिले को ओडीएफ करने को 1.62 लाख शौचालयों का निर्माण किया जाना है। अब शासन से केवल दो किस्तों में सात करोड़ और पांच करोड़ रुपया जारी हुआ है जिससे मात्र 102 गांव में ही काम शुरू कराया जा सका है। दूसरी ओर मोरंग बजरी व मजूदर मिलने में भी दिक्कत आ रही है। ऐसे में समय से लक्ष्य पूरा होना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
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स्वच्छता मिशन के तहत जिले को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) करने के  लिए 31 दिसंबर का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जिले के सभी 721 गांव का सर्वे कराकर 1.62 लाख शौचालय निर्माण की जरूरत बताई है। इस पर 200 करोड़ से अधिक धनराशि खर्च होने की उम्मीद है। केंद्र और सरकार के मंत्री और अधिकारी इसको लेकर लगातार बैठकें और समीक्षा कर रहे हैं और समय से लक्ष्य हासिल करने की हिदायत भी दी जा रही है लेकिन लक्ष्य के अनुरूप न तो धनराशि अवमुक्त की जा रही है और न ही लक्ष्य के सापेक्ष कार्य चल रहा है। इस वित्तीय वर्ष में सात और पांच करोड़ की दो किस्तें ही मिली हैं जिनसे फिलहाल जिले के 201 गांव में शौचालयों का निर्माण शुरू कराया गया है। अब शासन से पांच करोड़ की धनराशि और जारी हुई है जिसे जल्द अन्य गांवों में भेजने को सूची बनाई जा रही है।
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आठ सौ शौचालय प्रतिदिन का औसत
31 दिसंबर तक जिले को ओडीएफ करने के लिए 1.62 लाख शौचालय बनाए जाने हैं। इसके लिए लगभग 200 दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में प्रतिदिन 810 शौचालयों का निर्माण कराना होगा, जो काफी मुश्किल काम है। एक शौचालय बनाने में दो मिस्त्री दो दिन लगाते हैं तो प्रतिदिन 3200 राजमिस्त्री चाहिए होंगे।
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सामग्री मिलने में भी दिक्कत
खनन में रोक और ओवरलोडिंग पर रोक के चलते मोरंग बालू के रेट काफी बढ़ गए हैं जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण सामग्री मुश्किल से और महंगी मिल रही है जिससे काम में गति नहीं आ पा रही है।
अब लाभार्थियों के खातों में पहुंची धनराशि
स्वच्छ भारत मिशन के तहत अभी तक ग्राम निधि के खातों में धनराशि भेजी जाती थी लेकिन इसमें प्रधानों व पंचायत सचिवों द्वारा गड़बड़ी की लगातार मिल रही शिकायतों पर अब डीएम ने शौचालय निर्माण की धनराशि लाभार्थी के खातों मेें भेजने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में जिन गरीब लाभार्थियों के बैंक खाते नहीं होंगे उन्हें भटकना पड़ेगा और समय से शौचालय निर्माण नहीं हो पाएगा।

जिले में शौचालय निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। प्रतिदिन इसकी समीक्षा भी की जा रही है। शासन से मिल रही धनराशि के अनुरूप समय से कार्य पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।
- शशिकांत पांडेय, डीपीआरओ
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